मंजिल नहीं बताएंगे हाउस टैक्स चुराएंगे

2019-02-25T06:00:35Z

110 नगर निगम के कुल वार्ड

8 जोन में बंटा है नगर निगम

5 लाख 48 हजार भवन स्वामी शहर में

172 करोड़ हाउस टैक्स वसूला 31 मार्च 18 तक

225 करोड़ टैक्स वसूली का लक्ष्य मार्च 19 तक

- तीन मंजिल का मकान, हाउस टैक्स जमा कर रहे सिर्फ दो मंजिल का

- रेजीडेंशियल बिल्डिंग का हो रहा कॉमर्शियल यूज

abhishekmishra@inext.co.in

LUCKNOW :

नगर निगम की ओर से शहर में घरों की संख्या की वास्तविकता सामने लाने के लिए जीआईएस सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद भले ही मकानों की संख्या की सही तस्वीर सामने आए, लेकिन अभी जो सच सामने आया है, वह हैरान करने वाला है। सर्वे में सामने आया है कि तीन से चार मंजिला आलीशान मकानों में रहने वाले दो से तीन मंजिल का ही टैक्स भर रहे हैं। जिससे निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है।

रेजीडेंशियल का कॉमर्शियल यूज

जीआईएस सर्वे के दौरान पांच से दस प्रतिशत ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिसमें निगम के रिकॉर्ड में मकान रेजीडेंशियल के रूप में दर्ज है लेकिन जब टीम वहां पहुंची तो पता चला कि पूरे मकान का कॉमर्शियल यूज हो रहा है। जबकि तीन से चार फीसद ऐसे मामले आए हैं, जिसमें मकान का एक हिस्सा कॉमर्शियल यूज किया जा रहा है। ऐसे भवन स्वामियों की अलग से लिस्ट बनाई जा रही है।

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ये भी जानें

- 2 से 2.50 लाख भवन स्वामी ही भरते हैं हाउस टैक्स

- 5 से 6 शिकायतें टैक्स असेसमेंट की हर सप्ताह

सर्वे एक नजर में

6 वार्डो से शुरू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट

3 माह के अंदर सर्वे पूरा होगा

110 वार्डो में अभी चल रहा जीअाईएस सर्वे

सर्वे का सच (अभी तक)

15 प्रतिशत मामले एक मंजिल का टैक्स न देने से जुड़े

3 से 4 फीसदी भवन के कॉमर्शियल यूज के सामने आए

12 हजार मकान सामने आए

जीआईएस सर्वे के पहले चरण में छह वार्डो में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया। सर्वे से पता चला कि इन वार्डो में मकानों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इन वार्डो को मिलाकर करीब 12 हजार मकान नए सामने आए। अब यह पता लगाया जा रहा है कि ये मकान कब से वार्डो में हैं। इसके आधार पर इनसे हाउस टैक्स वसूला जाएगा।

खेल के पीछे कौन है

यहसवाल भी सामने आ रहा है कि आखिर निगम कर्मचारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। क्या जानबूझकर टैक्स का आंकलन नहीं किया गया। अब निगम प्रशासन दावा कर रहा है कि सर्वे पूरा होने के बाद इस स्थिति के जिम्मेदारों से सवाल किए जाएंगे।

जब से बना, तब से टैक्स

टैक्स चोरी करने वाले भवन स्वामियों की अलग से वार्डवार लिस्ट बन रही है। जिससे सर्वे के दौरान ही इन्हें नोटिस जारी की जाए। यह भी जानकारी सामने आई है कि टैक्स चोरी में सामने आने वाले भवन स्वामियों से उस वक्त से टैक्स लिया जाएगा, जब से उन्होंने अपने भवन में नई मंजिल बनाई है या जब से कॉमर्शियल यूज कर रहे हैं।

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सीलिंग की कार्रवाई

अगर भवन स्वामी जानकारी नहीं देता है तो उस भवन की उस मंजिल को सील किया जाएगा, जिसका उसने टैक्स नहीं भरा है। कॉमर्शियल यूज में पूरे भवन को ही सील किया जाएगा।

जीआईएस सर्वे के दौरान भवन स्वामियों द्वारा टैक्स चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। इनकी अलग से लिस्ट बनवाई जा रही है। हर किसी से शत प्रतिशत टैक्स की भरपाई होगी।

- डॉ। इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त


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