- लाइब्रेरी बिल्डिंग 4 मंजिला और कलेक्ट्रेट की ग्रीन बिल्डिंग 5 मंजिला होगी

-दून स्मार्ट सिटी के 1407.5 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में से 940 करोड़ पर काम शुरू

-दावा, स्मार्ट सिटी कंपनी फिलहाल 23 कार्यो को जमीन पर उतारने पर जुटी

देहरादून, स्मार्ट सिटी के तहत अब दून सिटी में स्मार्ट प्रोजेक्ट्स के स्मार्ट कार्य भी शुरू होने लगे हैं. परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पर चार मंजिला मॉडर्न लाइब्रेरी अस्तित्व में आएगी. यह वर्तमान दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर का ही दूसरा पार्ट होगा. यहां कम से कम 500 स्टूडेंट्स एक साथ स्टडी कर पाऐंगे. इधर, हरिद्वार रोड स्थित रोडवेज वर्कशाप में पूरा कलेक्ट्रेट समाएगा. पांच मंजिले भवन को इंटीग्रेटेड ऑफिसस-कॉम्लेक्स ग्रीन बिल्डिंग नाम दिया जाएगा.

धरना स्थल होगा शिफ्ट

स्मार्ट सिटी के तहत तिब्बती मार्केट के ठीक सामने मौजूद धरनास्थल पर अब प्रदर्शनकारी नजर नहीं आएंगे. यहां माडर्न लाइब्रेरी बनाने के लिए मेजरमेंट भी कर दिया गया है. यहां पर पर अब दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर का एक्सटेंशन होगा. चार मंजिला बिल्डिंग बनकर तैयार कराई जाएगी. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट मैनेजर कंसल्टेंसी (पीएमसी) के टीम लीडर के अनुसार अगले 15-20 दिनों में इसके निर्माण के लिए टेंडर भी जारी कर दिए जाएंगे. बताया गया कि यहां पर मौजूद धरनास्थल दूसरे स्थानों पर शिफ्ट कर दिया जाएगा.

ऐसी होगी मॉडर्न लाइब्रेरी

-4 मंजिला इमारत बनाई जाएगी.

-ई-रीडिंग की व्यवस्था होगी.

-एक साथ 500 स्टूडेंट्स बैठ पाएंगे.

-मॉडर्न लाइब्रेरी में आरएफ (आईडी) टैग फैसिलिटी होगी.

-आरएफ (आईडी) टैग मतलब रेडियो फ्रीक्वेंसी से लैस.

-शुरुआत खर्च का अनुमान 12.5 करोड़ है.

-लाइब्रेरी का नाम मॉडर्न दून लाइब्रेरी होगी.

रोडवेज वर्कशाप पर कलेक्ट्रेट

हरिद्वार रोड स्थित रोडवेज वर्कशाप को भी शिफ्ट करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. बताया गया कि इस जमीन पर 6 मंजिला बिल्डिंग बनाई जाएगी. जहां फ्लोरवाइज डीएम, सीडीओ अन्य जिला स्तरीय ऑफिस होंगे. करीब 25.5 बीघा लैंड में तैयार होने वाली बिल्डिंग को ग्रीन बिल्डिंग नाम दिया जाएगा. इसके लिए स्मार्ट सिटी के तहत 184 करोड़ रुपए भी मंजूर कर दिए गए हैं. वर्कशाप शिफ्टिंग के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया जा रहा है. बेसमेंट पर पार्किंग होगी. हालांकि, रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश महामंत्री प्रदीप पंत का कहना है कि वर्कशाप शिफ्ट करने के बदले में परिवहन निगम को केवल 20 करोड़ दिए जा रहे हैं, जबकि इसकी कीमत इससे कई अधिक है.