लखनऊ (ब्यूरो)। प्रदेश की जनता को गुरुवार से महंगी बिजली का करंट लगने जा रहा है. हाल में नियामक आयोग की ओर से बिजली दरों में की गई वृद्धि आज से लागू होने जा रही है, जिससे साफ है कि उपभोक्ताओं के पास अब जो बिल आएगा, उसको देखकर थोड़ा झटका लग सकता है. उधर, दर वृद्धि किए जाने से उपभोक्ता परिषद खासा आक्रोशित है.

इस तरह समझें दर वृद्धि

- 12 प्रतिशत की दर बढ़ोत्तरी शहरी उपभोक्ताओं पर

- 12 से 15 प्रतिशत तक कुल टैरिफ बढ़ोत्तरी

- 4.8 प्रतिशत रेग्युलेटरी सरचार्ज समाप्त

- 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी उद्योगों की

- 400 रुपए के स्थान पर 500 रुपए देने होंगे ग्रामीण अनमीटर्ड उपभोक्ताओं को

- 14 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी अनमीटर्ड किसानों की

- 36 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी शहरी बीपीएल उपभोक्ताओं की

शहरी उपभोक्ताओं पर भार

प्रदेश के शहरी घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की दरों में स्लैबवाइज लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. वहीं उद्योगों की दरों में 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.

सभी कैटेगरी पर पड़ेगा बोझ

प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की समस्त श्रेणियों में औसत 12 से 15 प्रतिशत की दर बढ़ोत्तरी की गई है, जहां रेग्युलेटरी सरचार्ज 4.8 प्रतिशत को समाप्त कर दिया गया, वहीं रेग्युलेटरी असेट 11,852 करोड़ का उपभोक्ताओं को फौरी तौर पर लाभ नहीं दिया गया है. ग्रामीण अनमीटर्ड बिजली उपभोक्ता जो पहले 1 किलोवाट पर 400 रुपया देते थे, अब उन्हें 500 रुपया देना पड़ेगा यानी कि 25 प्रतिशत वृद्धि. गांव का अनमीटर्ड किसान जो 150 रु. प्रति हॉर्सपावर देता था, अब उसे 170 रु. प्रति हॉर्सपावर देना होगा यानी कि उसकी दरों में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि की गई है.

बिना मांग बढ़ोत्तरी की गई

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग ने यह भी नहीं देखा कि जहां बिजली कंपनियों के अनुमोदित अतिरिक्त राजस्व जो बिजली दर बढ़ोत्तरी से प्राप्त होगा, वह 3593 करोड़ होता है लेकिन उससे भी अधिक 3872 करोड़ राजस्व के एवज में टैरिफ वृद्धि कर दी. मतलब साफ है कि बिना मांग बढ़ोत्तरी की बरसात.

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