आगरा. केदार नगर निवासी चौधरी बीरी सिंह की खुशी का उस समय ठिकाना नहीं रहा, जब बीएलओ ढूंढ़ते हुए उनके घर पहुंचे. वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए वह कई दिनों से बीएलओ को तलाश रहे थे. अब जब बीएलओ ही उनके दरवाजे पर पहुंच गए, तो महीनों की समस्या का मिनटों में समाधान हो गया. ये संभव निर्वाचन आयोग की सख्ती के चलते हुआ. आयोग के निर्देश हैं कि वोटर लिस्ट वेरीफिकेशन तभी माना जाएगा, जब संबंधित परिवार के कम से कम एक सदस्य का आईडेंटिटी कार्ड को लिंक किया जाएगा.

बीएलओ की तलाश में भटकते रहते हैं

चौधरी बीरी सिंह ने बताया कि वह कई दिनों से बेटे का नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए भटक रहे थे. तहसील से लेकर पास ही बूथ तक के कई बार चक्कर लगा चुके थे. लेकिन, बीएलओ घर के दरवाजे पर पहुंचे तो बड़ी राहत मिली. समस्या का समाधान भी हो गया. ऐसी ही समस्या सिर्फ चौधरी जी की नहीं, बल्कि अधिकतर लोग इसके पीडि़त हैं. वोटर कार्ड हासिल करना हो या फिर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना हो, वह बीएलओ की तलाश में सिर्फ भटकते रहते हैं.

अब दे रहे घर-घर दस्तक

बीएलओ अब चाहकर भी घर बैठे मतदाता सूची का सत्यापन नहीं कर सकेंगे. क्योंकि आयोग ने इस बार यह निश्चित कर दिया है कि प्रत्येक परिवार के कम से कम एक सदस्य का आधार कार्ड वोटर लिस्ट से लिंक करना होगा. तभी माना जाएगा कि बीएलओ ने घर-घर जाकर वोटर लिस्ट का वेरीफिकेशन किया है. इसका असर ये देखने को मिल रहा है कि जो बीएलओ एक स्थान पर बैठकर ही सत्यापन कर दिया कर देते थे, अब वे घर-घर दस्तक दे रहे हैं.

फर्जी नाम हट सकेंगे

सूत्रों के मुताबिक फर्जी वोटिंग को रोकने के लिए आयोग ने ये कदम उठाया है. जिन वोटर्स की मौत हो चुकी है, लेकिन उनके नाम लिस्ट से नहीं कट सके हैं. ऐसे में कई बार फर्जी मतदान होता है, जो कि झगडे़ का भी कारण बन जाता है. इसके साथ ही परिवार के किसी एक सदस्या का आधार कार्ड या फिर डीएल, पासपोर्ट की कॉपी लगाई जाती है, उससे यह साबित हो जाता है कि यह परिवार यही पर रहता है. दो एड्रेस एक ही पते के मैच कर रहे हैं. मतदाता सूची का सत्यापन भी सही होगा. जिन लोगों के बीएलओ की लापरवाही से मतदाता सूची में नाम नहीं जुडे़ सके हैं, तो जब बीएलओ घर-घर जाएगा ऐसे लोगों के नाम भी आसानी से जुड़ सकेंगे.

पहली बार हो रहा ऐसा

पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि मतदाता सूची के सत्यापन के लिए बीएलओ घर-घर पहुंच रहे हैं. सबसे पहले वे परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड मांग रहे हैं. इसके बाद लिस्ट में नाम जुड़वाने और कटवाने की जानकारी कर रहे हैं.

अभियान का समय

एक से 30 सितंबर

आधार नहीं होने पर ये डॉक्युमेंट दे सकते हैं

- पासपोर्ट

- ड्राइविंग लाइसेंस

- रिलेशन कार्ड

- आईडेंटिटी कार्ड, (सरकार द्वारा जारी)

- बैंक पासबुक

- किसान बही या फिर किसान कार्ड