लाइसेंस छुड़ाने के नाम पर 5 रुपये गूगल-पे करवाये और कुछ देर में खाता साफ कर दिया

देहरादून

इंटरनेट पर फर्जी आरटीओ बनकर आम लोगों और सरकार को चूना लगाने का धंधा खूब फल-फूल रहा है. इससे एक ओर जहां परिवहन विभाग की साख पर बट्टा लग रहा है, वहीं विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता भी सवालों के घेरे में है. फ्राइडे को दून के वसंत विहार थाने में एक युवती ने लाइसेंस छुड़ाने के नाम पर फर्जी आरटीओ की साइट के जरिए 48 हजार से ज्यादा की ठगी होने का मामला दर्ज कराया. जब पुलिस ने परिवहन विभाग से संपर्क किया तो साइट ही फर्जी पाई गई. इसके बाद एआरटीओ अरविंद पांडेय ने गूगल को लेटर लिखकर फर्जी साइट को हटाने का अनुरोध किया. इसके बाद गुगल से फर्जी साइट को हटा दिया गया है.

5 रुपये पे किये और खाता साफ

इंटरनेट पर फर्जी तरीके से आरटीओ के नाम पर वेबसाइट बनाने और लोगों के साथ ठगी करने के मामले ने एक बार फिर परिवहन विभाग की साख पर बट्टा लगाने का काम किया है. फ्राइडे को परिवहन विभाग के अधिकारियों के उस समय होश उड़ गए जब वसंत बिहार थाना पुलिस ने गूगल पर आरटीओ के नाम से दर्ज नंबर द्वारा ठगी कर 48 हजार 900 रुपए निकालने की सूचना दी. पुलिस ने बताया कि बल्लूपुर चौक निवासी नीलम कुमारी की एक सहेली का पिछले माह मोटर व्हीकल एक्ट में चालान हो गया था. इस दौरान उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी जब्त हो गया. डीएल को छुड़ाने के लिए बीते ट्यजडे को गूगल पर आरटीओ दून की वेबसाइट सर्च की, जहां उसे एक मोबाइल नंबर मिला, जिसने बताया कि वह आरटीओ का कर्मचारी है, उसने एक लिंक भेजकर गूगल पे पर पांच रुपए ट्रांसफर करने के लिए कहा. जैसे ही नीलम ने गूगल पे कर 5 रुपए ट्रांसफर कर दिए. इसके पांच मिनट बाद उसके खाते से 48 हजार 900 रुपए डेबिट होने का मैसेज आया. पीडि़त ने कम्पलेन दर्ज कराई. इसके बाद परिवहन विभाग को जानकारी दी गई. एआरटीओ ने गुगल को इस संबंध में कम्पलेन दर्ज कराई. इसके बाद गुगल द्वारा फर्जी साइट को हटा दिया गया.

फर्जी टैक्स रसीदें काटने का मामला आ चुका है सामने

परिवहन विभाग की फर्जी साइट बनाकर लोगों से ठगी और राजस्व को चूना लगाने का ये पहला मामला नहीं है, इससे पहले मई 2019 में उत्तर प्रदेश और हरियाणा में बैठकर उत्तराखंड में आने वाले व्यावसायिक वाहनों की परिवहन विभाग के नाम पर फर्जी टैक्स रसीदें काटने का बड़ा खुलासा हो चुका है. इस पूरे गिरोह के तीन आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है. आरोपी परिवहन विभाग के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर करीब 50 लाख तक के राजस्व की चपत लगा चुके है. पुलिस ने एक को रामपुर तिराहा मुजफ्फरनगर, यूपी और बाकी दो आरोपियों को हरियाणा से दबोचा था. मामला तब पकड़ में आया जब एआरटीओ एक मई 2019 को मसूरी रोड पर कुठालगेट में चेकिंग चल रही थी. कि राजस्थान नंबर का एक टैंपो ट्रेवलर पकड़ा. इसकी टैक्स रसीद फर्जी थी. उसके चालक ने बताया कि उसने हरियाणा में टैक्स रसीद कटवाई थी. पुलिस जांच में पता चला कि हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में बैठकर गिरोह इस पूरे कारनामे को अंजाम दे रहा. फर्जी वेबसाइट को गोडेडी डॉटकॉम के जरिये पंजीकृत किया हुआ था. आरोपी हरियाणा से नेटवर्क चल रहा था. और एक साथी मुजफ्फरनगर में भी फर्जी टैक्स रसीदें काटता था.

कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल

आरटीओ के नाम से फर्जी साइट बनाकर लोगों और राजस्व को चूना लगाने के मामलों से विभाग के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. विभागीय सूचनाएं लीक होने से कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है. सवाल ये भी उठता है कि पांच हजार में फर्जी साइट बनाकर लाखों रुपए कमाने का यह धंधा अधिकारियों की नाक के नीचे कैसे फल फूल रहा है.

----------

इस प्रकार से फोन के माध्यम से कोई भी ऑनलाइन पैसा जमा करने की व्यवस्था नहीं है. लोगों से अनुरोध है किसी भी प्रकार की धनराशि या तो ऑनलाइन परिवहन डॉट जीओवी डॉट इन की साइट से ऑनलाइन जमा होता है या सीधे कार्यालय में उपस्थित होकर जमा किया जा सकता है कैश काउंटर पर. इसके अलावा किसी भी प्रकार से कोई धनराशि किसी के माध्यम से जमा ना कराएं वह वैध भी नहीं नहीं है.

अरविंद पांडेय, एआरटीओ