- उपकेन्द्र की संपत्ति को पहुंचा चुके हैं नुकसान

- उपकेंद्र में अत्यधिक महंगे एवं संवेदनशील उपकरणों का किया गया है प्रयोग

आगरा. आगरा और मथुरा की विद्युत सप्लाई की कमान 'बंदरों' के हाथ में है. बंदर कभी भी इन दोनों जनपदों की विद्युत सप्लाई ठप कर सकते हैं. इसके बचाव के लिए विद्युत पावर कॉरपोरेशन ने जिलाधिकारी को एक पत्र भी लिखा है.

400 केवी उपकेंद्र है कब्जे में

400 केवी आगरा साउथ उपकेंद्र तहसील किरावली के गांव डावली में स्थित है. इस पर बंदरों का पूरी तरह से कब्जा है. तार फेंसिंग होने के बावजूद भी बंदर उपकेंद्र में प्रवेश कर जाते हैं. कई बार कर्मचारियों पर भी हमला कर चुके हैं. बंदर काफी आक्रामक रुख अख्तियार करते हैं. कभी भी बंदर उप केंद्र में बड़ा नुकसान कर सकते हैं. यह उपकेंद्र आगरा और मथुरा की विद्युत आपूर्ति के लिए काफी महत्वपूर्ण है.

जीआईएस पद्धति पर है आधारित

आगरा साउथ 400 केवी उपकेंद्र अत्याधुनिक जीआईएस पद्धति पर आधारित है. उपकेंद्र परिसर में अत्यधिक महंगे एवं संवेदनशील उपकरणों का प्रयोग किया गया है. पिछले कुछ समय से उपकेंद्र पर इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

100 बंदर रहते हैं हमेशा

डीएम को लिखे पत्र पॉवर कॉरपोरेशन ने उल्लेख किया है कि उपकेंद्र पर कम से कम 100 बंदर रहते हैं, जो कि लगातार उपकेंद्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं. कई बार बंदरों के उत्पात से विद्युत सप्लाई में व्यवधान पैदा हो जाता है.

झेलना पड़ता है आक्रोश

उपकेंद्र पर बंदरों के खानपान की व्यवस्था भी नहीं है, जिसके कारण बंदर आसपास के खेतों में जाकर फसलों में नुकसान पहुंचाते हैं. फसलों में हुए नुकसान का गुस्सा किसान उपकेंद्र के कर्मचारियों पर उतारते हैं. कई बार किसानों ने कर्मचारियों के साथ आक्रोश व्यक्त किया है. जिसके कारण कर्मचारी किसानों से भय मानते हैं. वहीं दूसरी ओर बंदरों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. कभी भी महत्वपूर्ण उपकरणों को बंदर नुकसान पहुंचा सकते हैं. बंदरों से निजात का कोई न कोई समाधान निकाला जाए.