कानपुर। रामपुर के नवाब खानदान का खासबाग पैलेस बहुत ही खास है। कोसी नदी किनारे स्थित इस महल को यूरोपीय इस्लामी शैली में बनाया गया है और इसके चारों ओर बाग है। इस आलीशान महल को अरबों रुपये की लागत से बनाया गया है और इसे ऐसे बनाया गया कि भीषण गर्मी में भी पूरी तरह ठंडा रहे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नवाब खानदान की अरबों रुपये की संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया चल रही है। इस संपत्ति में नवाब खानदान का खासबाग पैलेस भी शामिल है। बताया जाता है कि इस महल में ढाई सौ कमरे व सिनेमा हॉल समेत कई अन्य बड़े हॉल हैं।

1930 में बनकर तैयार हुआ था खासबाग पैलेस

खासबाग पैलेस 1930 में बनकर तैयार हुआ था। इस महल के चारों ओर स्थित बाग में आम, अमरूद व विभिन्न प्रजातियों के एक लाख से अधिक पेड़ लगे हैं। इस महल के बड़े बड़े हॉल बर्माटीक (लकड़ी) और बेल्जियम ग्लास के झूमरों से सजाए गए हैं।खासबाग पैलेस में नवाब का आफिस, सिनेमा हॉल, सेंट्रल हॉल, संगीत हॉल, स्विमिंग पूल भी बनाया गया है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल हॉल में बेशकीमती पेंटिंग लगी थीं, जो बाद में खराब हो गईं। कोठी के मेन दरवाजे पर गुंबद बने हैं और महल की सीढियां इटेलियन मार्बल से बनी हैं।

ब्रिटिश आर्किटेक्ट की देखरेख में बनाया गया यह महल

पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां पेशे से आर्किटेक्ट भी हैं। इस महल को ब्रिटिश आर्किटेक्ट की देखरेख में बनाया गया था। दीवारों की अंदरूनी सतह चिकनी है और दीवारों की मोटाई भी ज्यादा है। इसकी छत को हॉट तकनीक से बनाया गया है, जिसकी मोटाई करीब दो फीट है। नवाब जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां की पत्नी पूर्व सांसद बेगम नूरबानो बताती हैं कि वह दस साल महल में रहीं हैं।

देश का पहला फुल एयरकंडीशन्ड महल है खासबाग पैलेस

बताया जाता है कि यह भारत का पहला पूरी तरह एयरकंडीशन्ड महल है। महल में कमरों को ठंडा रखने के लिए बर्फखाना बनाया गया था, जिसमें लोहे के फ्रेम में बर्फ की सिल्ली रखी जाती थीं। इनके पास में दो मीटर से भी बड़े साइज के पंखे लगे थे। पंखे को चलाने के लिए 150 हार्सपावर की बिजली मोटर लगाई गई। पंखे बहुत तेज चलता था, जिसकी हवा बर्फ की सिल्लियों से होकर महल के कमरों में जाती। कमरों तक हवा पहुंचाने के लिए पूरे महल के नीचे दो गुणा दो फीट की पक्की नाली बनाई गई। इस सेंट्रल नाली से कमरों के लिए छोटी-छोटी नालियां बनाई गईं। इन नालियों के मुंह पर फ्रेम लगाए गए, इनसे जरूरत के मुताबिक ही हवा निकलती थी। इस सिस्टम की देखरेख के लिए इंजीनियरों की पूरी टीम थी।

Posted By: Mukul Kumar

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