-इंडस्ट्रीज को वेब के लिए हजारों रुपए करने को होना पड़ रहा मजबूर

-पॉलीथिन पर इंडस्ट्रीज में कंफ्यूजन, स्टेट व केंद्र की गाइड लाइन जारी करने की डिमांड

देहरादून, इंडस्ट्री डिपार्टमेंट के इंडस्ट्रियलिस्ट को दी जाने वाली सुविधाएं झूठी साबित हो रही हैं. सबसे ज्यादा वेब साइट को लेकर है. जिसको डिपार्टमेंट यूजर फ्रेंडली होने का दावा कर रहा है. लेकिन, इसके एवज में इंडस्ट्रियलिस्ट को न केवल एक्सप‌र्ट्स की मदद लेनी पड़ रही है. बल्कि उन्हें कम से कम पांच हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं. इस प्रॉब्लम को लेकर इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, होटेल्स एसोसिएशन के अलावा तमाम दूसरे एसोसिएशंस ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी आनंदबर्धन से मुलाकात की. बदले में प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने भरोसा दिया कि उनको वेबसाइट में आ रही दिक्कतों से जल्द निजात मिल जाएगी. नई वेबसाइट को फाइनल टच दिया जा रहा है.

प्रदूषण में भी हो रही दिक्कत

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने शासन को सौंपी अपनी कंप्लेन में कहा कि इंडस्टी डिपार्टमेंट की जो वेबसाइट यूजर फ्रेंडली बताई गई है, उसमें हर प्रकार की इंडस्ट्रीज को प्रॉब्लम्स झेलनी पड़ रही है. लॉग-इन करने के बाद विंडो पर क्लिक करने के बाद छोटा विंडो दिखने के बाद आवेदन करने की कोई जानकारी नहीं मिल पाती है. इसके अलावा लॉग-इन करने के बाद जब नया पेज खुलता है, उसमें एप्लीकेशन सब्मिट करने का लोगो पेज के नीचे वाले हिस्से में छुपा है. जिस कारण नए या फिर पुराने इंडस्ट्री को एप्लीकेशन जमा करने में स्पेशलिस्ट व कंसल्टेंट की मदद लेकर कम से कम पांच हजार रुपए खर्च करने को मजबूर होना पड़ रहा है. इंडियन इंस्ट्रीज एसोसिएशन के स्टेट चेयरमैन राकेश भाटिया का कहना है कि उद्योग स्थापना के लिए कुछ खास प्रावधान हैं. जिसको दून वैली नोटिफिकेशन की संज्ञा दी गई है. जिस वक्त नोटिफिकेशन लागू किया गया था, उस वक्त से लेकर आज तक टेक्नोलॉजी में बेहद अंतर आ चुका है. नए टेक्नोलॉजी के कारण प्रदूषण करने वाले इंडस्ट्री भी बिना प्रदूषण के चल सकते हैं. ऐसे में दून वैली नोटिफिकेशन की डिटेल समीक्षा की जरूरत है. राकेश भाटिया का कहना है कि इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने के लिए सरकार सिंगल विंडो का दावा कर रही है, उद्योग स्थापित होने के बाद सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था की गई है. लेकिन पॉल्यूशन बोर्ड की ओर से दूसरे के स्थान पर त्रिस्तरीय प्रावधान लागू हो गया है. सैद्धांतिक सहमति प्राप्त करने के बाद भी फिर से नए प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जो पूर्व में लागू थी. उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की दिक्कतें भी आ रही हैं. जिसके गाइडलाइन वेब पर अपलोड होने चाहिए. इसके अलावा एप्लीकेशंस प्राप्त होने पर समयसीमा के तहत क्वेरीज अपलोड कर दी जाएं.

ऑनलाइन फीस व्यवस्था बहाली की मांग

आईआईए के मुताबिक डिपार्टमेंट द्वारा पूर्व में स्थापित ऑनलाइन फीस की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है. लेकिन यहां बैंक ड्राफ्ट से एक्सेप्ट की जा रही है. प्रिंसिपल सेक्रेटरी को सौंपे पत्र में आईआईए ने राज्य में प्लास्टिक निर्माण व बिक्री के नियम के अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देश के बारे में जानकारी स्पष्ट करने की डिमांड की है. जिससे भ्रम की स्थिति साफ हो पाए. कहा है कि हर डिपार्टमेंट इंडस्ट्रीज को डरा व धमका रहा है. ऐसे में दिशा-निर्देश सरकारी डिपार्टमेंट को भेजे जाएं.