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AGRA: एसएन मेडिकल कॉलेज प्रबंधन मरीजों को हाईटेक इलाज देने के चाहे जितने भी दावे कर ले लेकिन हकीकत इसके ठीक विपरीत है. अस्पताल के हालात यह हैं कि मरीज इलाज के लिए दर-दर भटक रहा है. मरीजों को भर्ती करने के लिए एसएन प्रबंधन के पास पर्याप्त बेड भी नहीं है. शर्मनाक बात तो ये है कि यहां पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों का इलाज सब्जी की ठेल और स्ट्रैचर पर किया जा रहा है. स्ट्रेचर और ठेल में पहिये होने के कारण उन्हें आपस में जंजीर से बांधा भी गया है. गौरतलब है कि इस समय एसएन के पुरानी सर्जरी बिल्डिंग में मरम्मत का कार्य चल रहा है जिसकी वजह से भी मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

30 बेड और मरीज 50
एसएन मेडिकल कॉलेज के कैंसर रोग वार्ड में बेडों की संख्या 30 है, लेकिन यहां अधिकतर मरीजों की संख्या 50 से ऊपर रहती है. मरीजों के लिए वार्ड के बाहर गैलरी में भी एक-दो बेड डाल रखे है. मंगलवार को हालात और भी बदतर मिले. मरीजों को ठेल और स्ट्रेचर पर ही लिटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही थी. ऐसे में प्रश्न उठता है कि एसएन प्रबंधन द्वारा किस तरह स्वास्थ्य व्यवस्था को ताक पर रखकर इलाज किया जा रहा है.

ई-हॉस्पिटल से जोड़ा जा रहा कैंसर वार्ड
एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी हाल ही में ई-हॉस्पिटल की सुविधा शुरू की गई है. ई-हॉस्पिटल के जरिए मरीजों का डाटा सेव किया जा रहा है, जिससे बड़े चिकित्सा केन्द्रों से मरीजों की बीमारी के बारे में राय ली जा सके. बीमारी को अन्य चिकित्सकों से डिशकश किया जा सके. इसके लिए यह सुविधा सर्वप्रथम कैंसर वार्ड से शुरू की जाएगी. कैंसर विभाग के मरीजों का डाटा कैंसर इंस्टीट्यूट लखनऊ के डॉक्टरों के साथ साझा किया जाएगा. इसके बाद ट्रीटमेंट किया जाएगा.