कोलंबो (रॉयटर्स)। श्रीलंका की राजनीति में लंबे समय तक राजपक्षे ब्रदर्स की तूती बोलती रही है। एक छोटे अंतराल के बाद वह फिर से वापसी की कोशिश कर रहे हैं। जहां एक भाई की नजर इस सप्ताह के अंत में होने जा रहे श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में जीत पर है वहीं दूसरे की प्रधानमंत्री बनने पर है। जिसके लिए चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं। वहीं दो अन्य भाई श्रीलंका पोडुजना पेरमुना पार्टी के राजनीतिक रणनीतिकार की भूमिका में हैं। जिनमें से एक की निगाह संसद के स्पीकर पद पर है।

अगली पीढ़ी के तीन सदस्य भी राजनीति में

परिवार की अगली पीढ़ी के तीन सदस्य भी राजनीति में हैं। राजपक्षे, जिन्हें अलगाववादी तमिल विद्रोहियों को निर्दयता से कुचलने और पश्चिमी देशों व भारत के हिंद महासागर में स्थित इस द्वीपीय देश से दूरी बनाने पर चीन के करीब ले आने के लिए जाना जाता है, एक बार फिर इस देश की राजनीति के केंद्र में हैं। पूर्व रक्षा सचिव गोतबाया राजपक्षे की शनिवार को होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीत की संभावना जताई जा रही है। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी सरकार में मंत्री सजिथ प्रेमदास दौड़ में पीछे माने जा रहे हैं।

श्रीलंका से महत्वपूर्ण शिपिंग लेन पर स्थित

गोतबाया ने जब तमिल टाइगर्स के खिलाफ ऑपरेशन का नेतृत्व किया उनके बड़े भाई महिंदा राजपक्षे राष्ट्रपति थे। गोतबया को युद्ध के दौरान तमिल अलगाववादियों, आलोचकों और पत्रकारों की हत्याओं के आरोप में श्रीलंका व अमेरिका में मुकदमों का सामना करना पड़ा। दोनों भाई इसे पश्चिमी देशों की साजिश बताकर आरोपों से इनकार करते आए हैं। वह इस सबको 22 मिलियन की आबादी वाले द्वीप देश में हस्तक्षेप की साजिश करार देते हैं। श्रीलंका से महत्वपूर्ण शिपिंग लेन पर स्थित है। जो लंबे समय से बहुसंख्यक सिंहली बौद्धों और अल्पसंख्यक तमिलों के बीच तनाव के कारण खबरों में रहा है। हाल में सिंहली कट्टरपंथियों ने मुस्लिम समुदाय को भी निशाना बनाया है। महिंद्रा 2015 का राष्ट्रपति चुनाव अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगी मैत्रिपाल सिरिसेना से हार गए थे।

श्रीलंका की राजनीति में दबदबा कम

इसके बाद परिवार का श्रीलंका की राजनीति में दबदबा कम हो गया। लेकिन ईस्टर संडे को होटलों व चर्चों में बम धमाकों के बाद राष्ट्रपति सिरिसेना दबाव में आ गए, और उन्होंने इस साल का राष्ट्रपति चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी। हमलों जिनकी जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली है, ने राजपक्षे व उनके सिंहली राष्ट्रवाद के प्रति समर्थन पैदा किया। महिंदा जो फिर से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकते भाई गोतबया के लिए प्रचार कर रहे हैं, जो अपनी सैन्य प्रतिभा के लिए अधिक जाना जाता है। एक और भाई बेसिल, पार्टी का वित्त संभालता है और चौथा भाई व पूर्व स्पीकर चमाल द्वीप के दक्षिण में चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए है।

Posted By: Shweta Mishra

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