आगरा(ब्यूरो)। दरोगा भर्ती की ऑनलाइन परीक्षा 12 नवंबर 2021 से दो दिसंबर 2021 के मध्य आयोजित हुई थी। पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के पुलिस अधीक्षक हफजुर रहमान ने इस भर्ती में धांधली के मामले में जून 2022 में सिकंदरा थाने में मुकदमा लिखाया था। इंस्पेक्टर आनंद कुमार शाही ने बताया कि इस मुकदमे में चार अभ्यर्थी नरेशपाल, राजीव शर्मा, राजेश कुमार और नीतू बघेल नामजद किए गए थे। सभी ने हाईकोर्ट से अपनी गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था। इसके बाद भर्ती बोर्ड के पुलिस अधीक्षक द्वारा जनवरी 2023 में एक और मुकदमा लिखाया गया।

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04 मिनट 32 सेकेंड में 40 प्रश्नों के जवाब
इसमें अभ्यर्थी अक्षय मलिक और भर्ती परीक्षा कराने वाली कंपनी एनएसईआईटी के अधिकारी नामजद किए थे। मुकदमे में उन अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया गया था स्क्रीङ्क्षनग के दौरान जिनकी धांधली पकड़ में आई थी। अभ्यर्थियों ने चार मिनट 32 सेकेंड में 40 से अधिक प्रश्नों के जवाब दिए थे। एक प्रश्न को हल करने में अभ्यर्थी ने नौ सेकेंड से भी कम समय लगाया था। 23 दिसंबर 2022 को पुलिस ने अक्षय मलिक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उससे पूछताछ में कई राज खुले। मुकदमों की विवेचना कर रहे इंस्पेक्टर उत्तर चंद पटेल ने बताया कि परीक्षा आयोजित कराने वाली कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी भी गड़बड़ी में शामिल थे।

सॉल्वर की मदद से अभ्यर्थी देते थे एग्जाम
परीक्षा केंद्र के लोगों को भी अपने साथ मिला लिया था। जिन अभ्यर्थियों से सेङ्क्षटग हो जाती थी उन्हें उस कंप्यूटर पर बैठाया जाता था। जिसका ङ्क्षलक सॉल्वर के कंप्यूटर से होता था। सॉल्वर की मदद से अभ्यर्थी परीक्षा देते थे। विवेचना में उनके नाम प्रकाश में आए। इसके बाद गुरुवार को बाग खिन्नी महल ताजगंज निवासी बहादुर ङ्क्षसह, आवास विकास कॉलोनी सेक्टर चार निवासी प्रवेश यादव, कोसीकला निवासी फतेहराम व कानपुर निवासी विनायक शर्मा को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। आरोपी विनायक शर्मा एनएसईआईटी कंपनी का कलस्टर हेड है। प्रवेश यादव और फतेहराम भी कंपनी के कर्मचारी हैं। सिकंदरा क्षेत्र में यश इंफोटेक ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर बनाया गया था। केंद्र व्यवस्थापक यशपाल भी इनसे मिले हुए थे। उन्हें मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। आरोपी बहादुर ङ्क्षसह सेंटर का आईटी इंचार्ज है।

खराब बताकर बदल देते थे कंप्यूटर
जिन अभ्यर्थियों से सेङ्क्षटग होती थी उन्हें परीक्षा में नकल कराई जाती थी। ऑनलाइन परीक्षा में अभ्यर्थी को एक कंप्यूटर आवंटित किया जाता है। सेङ्क्षटग वाले अभ्यर्थी का कंप्यूटर बदल दिया जाता था। उसे आवंटित कंप्यूटर में खराबी बता दी जाती थी। परीक्षा कक्ष में दस से पंद्रह प्रतिशत कंप्यूटर खाली छोड़े जाते हैं। सेङ्क्षटग वाले अभ्यर्थी को जो कंप्यूटर दिया जाता था उसमें स्क्रीन शेयङ्क्षरग एप एक्टिवेट रहता था। उसके माध्यम से दूसरे कमरे में बैठा सॉल्वर परीक्षा देता था।


इस मुकदमे में चार अभ्यर्थी नरेशपाल, राजीव शर्मा, राजेश कुमार और नीतू बघेल नामजद किए गए थे। सभी ने हाईकोर्ट से अपनी गिरफ्तारी पर स्टे ले लिया था। इसके बाद भर्ती बोर्ड के अधिकारियों द्वारा इस संबंध में जनवरी 2023 में मुकदमा दर्ज कराया था।

आनंद कुमार शाही, प्रभारी सिंकदरा