आगरा(ब्यूरो)। एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और डायबिटीज मामलों के एक्सपर्ट डॉ। प्रभात अग्रवाल ने बताया कि डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही हैै। बीते दस साल में डायबिटीज मरीजों की संख्या बढ़ी है वहीं उम्र कम हुई है। उन्होंने बताया कि इस वक्त 100 में से 15 से 20 मरीजों की उम्र 25 से 35 साल के बीच होती है। बढ़ता पॉल्यूशन और बढ़ते स्ट्रेस से युवा डायबिटिक बन रहे हैं।

युवाओं में भी देखने को मिल रही है

डॉ। अग्रवाल ने बताया कि पॉल्यूशन, प्लास्टिक में खाद्य पदार्थ, फसलों में रसायन के अत्यधिक इस्तेमाल से खाने, सांस लेने से शरीर में एंडोक्राइन डिसरङ्क्षप्टग केमिकल्स (ईडीसी) पहुंच रहे हैं। इनसे शरीर में एंडोक्राइन डिसरप्टर्स बन रहे हैं। यह पैंक्रियाज में इंसुलिन के रिलीज को कम कर देते हैं और बीटा सेल्स ठीक से काम नहीं करते हैं। शुगर का लेवल अनियंत्रित होने लगता है। पहले यह समस्या 55 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मिलती थी। लेकिन अब यह युवाओं में भी देखने को मिल रही है।

कोविड-19 के बाद बढ़ रहे मरीज
डॉ। प्रभात अग्रवाल ने बताया कि कोविड-19 के बाद में डायबिटिक मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। जो लोग कोविड-19 वायरस से संक्रमित हुए थे ऐसे लोगों में इंसुलिन बनना बंद होने की समस्या सामने आ रही है। इस कारण डायबिटिक मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। डॉ। अग्रवाल ने बताया कि इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल (आईसीएमआर) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2023 के बीच देश में 7.7 करोड़ से 10 करोड़ डायबिटीज मरीज हो गए हैैं। देश में 36 परसेंट डायबिटीज रोगी बढ़े हैं। मोटापा, बदली जीवनशैली, शारीरिक परिश्रम न करने, परिवार में किसी अन्य के डायबिटीज से पीडि़त होने पर बीमारी बढ़ रही है।

स्ट्रेस हार्मोन से शुगर हो रही अनियंत्रित
सुबह और रात में मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करने से डायबिटीज रोगी टहलने नहीं जा रहे हैं। इसके साथ ही मोबाइल अधिक इस्तेमाल करने से नींद पूरी नहीं हो रही है, इससे स्ट्रेस हार्मोन तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का समूह का स्तर बढ़ रहा है और शुगर का स्तर अनियंत्रित हो रहा है।


गर्भावस्था में कराएं जांच
गर्भावस्था में मधुमेह की समस्या बढ़ रही है। 10 परसेंट गर्भवती में शुगर का स्तर बढ़ा मिल रहा है, लेकिन ये जांच नहीं कराती हैं। इससे मां और गर्भस्थ शिशु के लिए डायबिटीज घातक हो रहा है। वहीं, डायबिटीज रोगी दवाएं नहीं ले रहे हैं। इससे आंखों की रोशनी जा रही है, गुर्दे खराब हो रहे हैं और हार्ट अटैक के मामले भी बढऩे लगे हैं।
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20 परसेंट डायबिटीज मरीजों में 25 से 35 साल के युवा
4.16 लाख-टाइप टू डायबिटीज मरीज हैं आगरा में
10 हजार-टाइप वन डायबिटीज मरीज हैैं आगरा में
3.80 लाख-प्री डायबिटिक पेशेंट्स हैैं आगरा में
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डायबिटीज से बचाव के लिए यह करें
- रोजाना अपने लिए एक घंटा जरूर निकालें
- एक्सरसाइज करें
- मेडिटेशन करें
- नींद पूरी लें
- घर में कोई डायबिटिक है तो 25 साल की उम्र से अपनी भी रूटीन जांच कराएं
- तंबाकू उत्पादों का सेवन न करें
- अल्कोहल का सेवन न करें
- वजन को नियंत्रित रखें

भागमभाग भरे जीवन और बदलते लाइफस्टाइल के कारण युवा खुद को समय नहीं दे पा रहे हैैं। इस कारण युवाओं में डायबिटीज की समस्या बढऩे लगी है। युवाओं को रोजाना अपने लिए दिन में एक घंटा अवश्य निकालना चाहिए।
- डॉ। प्रभात अग्रवाल, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, एसएनएमसी