एक तरह से देखा जाए तो आईटीसी यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यापारियों के लिए पूंजी की तरह है।
इस पैसे को अगली देन दारी में एडजस्ट कर अपने ऊपर से टैक्स लायबिलिटी को कम कर देते हैं।
लेकिन जब यह समय से नहीं मिलता है तो व्यापारियों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
उनकी शिकायत है कि हमारी कैलकुलेशन में आईटीसी कुछ और होता है और पोर्टल पर कुछ और नजर आता है। इससे हमें नुकसान उठाना पड़ता है।

अक्सर होती है ये परेशानी
अक्सर व्यापार में नुकसान उठाने वाले व्यापारियों की वजह से आईटीसी फंस जाती है।
मान लीजिए किसी व्यापारी ने सौ रुपए का माल खरीदा और बिक्री नही होने पर उसे औने पौने दाम पर बेच दिया।
अब यह व्यापारी रिटर्न फाइल नही करेगा तो जिसने उससे माल खरीदा है उसे कैसे आईटीसी मिलेगी।
जबकि उसने खरीद पर पूरा टैक्स चुकाया है।
यही बात विवाद का कारण बनती है और आईटीसी मिस मैच का मामला सामने आता है।


कोरोना काल में नुकसान
कोरोना काल में जबरदस्त नुकसान की वजह से व्यापार ठप हो गया था। उस दौरान बहुत से व्यापारियों ने रिटर्न दाखिल नही किया। इसकी वजह से आईटीसी मिस मैच की समस्या आने लगी थी। कई व्यापारी ऐसे थे जिनका व्यापार ही ठप हो गया। कोरोना के बाद उन्होंने या तो बिजनेस बदल दिया या दूसरे काम करने लगे। इससे दूसरे व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ा।

हजारों लाखों का टैक्स है बकाया
समय पर रिटर्न नही भरने पर सरकार जीएसटी के तहत भारी भरकम फाइन लगाती है। इसकी वजह से बहुत से व्यापारियों पर हजारों लाखों रुपए की लॉयबिलिटी खड़ी हो गई है। यह लोग जीएसटी में पंजीकृत हंै और पूरा माल बेचने के लिए इन्होंने रिटर्न दाखिल नही दिया है। इनको यह भी नही पता कि इन पर कितना फाइन बकाया है। लेकिन इनकी वजह से दूसरे व्यापारियों की आईटीसी खतरे में पड़ गई है।

आईटीसी को लेकर काफी कन्फ्यूजन है। व्यापारी इसको समझ नही पाते हैं। क्योंकि इतने जटिल कानून हैं और आम व्यापारी की समझ के बाहर है। सरकार को इसमें बदलाव कर देना चाहिए।
मनीष गुप्ता, व्यापारी

आईटीसी मिस मैच की वजह से व्यापारियों को दिक्कत होती है। इसे ठीक करने के लिए समय भी नही दिया जाता है। जबकि फाइन अलग से लग जाता है। नियम में बदलाव जरूरी है।
सुशांत कुमार केसरवानी, व्यापारी

बहुत से ऐसे व्यापारी हैं जिन्होंने कोरोना काल में नुकसान होने पर व्यापार ही बंद कर दिया। उन्होंने रिटर्न भी नही भरा। ऐसे में जिन लागों ने उनसे माल खरीदा था वह अब नुकसान का सामना कर रहे हैं।
मुसाब खान, व्यापारी

जीएसटी में बहुत अधिक बदलाव की जरूरत है। जिसकी मांग व्यापारी लंबे समय से करते चले आ रहे हैं। अगर सुनवाई शुरू हो जाए तो यह एक सरल नियम बन जाए जिसे सब समझ सकते हैं।
संदीप जायसवाल, व्यापारी

आईटीसी से जुड़े नियमों में ढील देनी चाहिए। क्योंकि यह व्यापारी की पूंजी होती है और इसे वह नही छोड़ सकता है। इसलिए नियमों को सरल बनाकर आईटीसी से जुड़े विवादों को निस्तारित कर दिया जाए।
राजेश अग्रवाल, व्यापारी

यह समस्याएं जब तक खत्म नही होगी जब तक जीएसटी के नियमों को सरल नही बना दिया जाएगा। सरकार को आईटीसी और रिटर्न में फाइलिंग में हुई गलती के सुधार का मौका व्यापारियां को देना चाहिए।
अजय अवस्थी, व्यापारी