Check before transaction


Allahabad: उन्होंने अपनी तरफ से वह हर संभव कदम उठाया था जिससे पकड़ में न आएं। लेकिन, करते क्या। कानून के लम्बे हाथ आखिर उसके गिरेबां तक पहुंच ही गए। पकड़े जाने के बाद जो सच सामने आया, उसे जानने के बाद पुलिस वाले भी भौचक्के रह गए। एटीएम की सिर्फ चार डिजिट को पलक झपकते ही नोट कर लेना उनके लिए बाएं हाथ का खेल है। कितने भी सुरक्षित तरीके से करें पासवर्ड जान लेना भी उनके लिए कोई बड़ा काम नहीं था। इसी के बदौलत वे आनलाइन फ्राड का बिजनेस चला रहे थे। उन्होंने दर्जनभर से अधिक ऐसे एटीएम के बारे में बताया जिनसे उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था फिर उन्होंने उस कार्ड का इस्तेमाल करके मनचाहे तरीके से खरीदारी की। इनकी लाइफ स्टाइल देखकर कोई भी दंग रह जाए। दो पकड़ में आ चुके हैं और दो पकड़ से बाहर है। खास बात यह है कि ये भी रिश्तेदार हैं.

एक मुकदमे ने खोला Fraud  
साइबर क्राइम से जुड़े मामले में पहली बार इतने बड़े लेवल पर खुलासा करने वाली पुलिस टीम ने बताया कि पिछले दिनों मनीष पाण्डेय नामक युवक ने जार्जटाउन थाने में मुकदमा दर्ज कराया कि उसकी बहन के खाते से फ्राड करके लाखो रुपए की शापिंग की गई है। मामले की जांच में लगी टीम ने सर्विलांस और इंटरनेट एसेस के जरिए फ्राड करने वालों को आईडेंटीफाई किया और फिर संगम पेट्रोल पंप के पास घेराबंदी करके पकड़ लिया। पूछताछ में इन्होंने अपना नाम आशीष कुमार और अभिषेक कुमार बताया। पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया कि इस काम में उनके पिता सभापति चौरसिया और चाचा अजीत कुमार भी शामिल हैं. 

अपराधियों की कार्य शैली
मीडिया के सामने आने पर अपनी कार्य प्रणाली के बारे में शातिर ने बताया कि योजना के तहत ये पहले एटीएम के आसपास की रेकी करते थे। टारगेट हमेशा वह एटीएम होता था जहां आने-जाने वालों की संख्या थोड़ा ज्यादा हो। भीड़ का फायदा उठाकर वह एटीएम के भीतर घुस जाते थे। दोनों अलग-अलग होने का दिखावा करते थे ताकि सामने वाला कुछ भांप न सके। दोनों एटीएम से ट्रांजेक्शन करने वाले के अलग-बगल रहने की कोशिश करते थे। एक काम एटीएम के चार डिजिट नोट करना होता था और दूसरे की नजर पासवर्ड पर होती थी। यहां से निकलकर वह सीधे साइबर कैफे पहुंचते थे आनलाइन शापिंग करते थे। बिल का भुगतान एटीएम कार्ड नम्बर तथा पासवर्ड के जरिए करते थे। इस फार्मूले से वे सैकड़ों लोगों को चूना लगा चुके थे. 

Cyber cafe का करते थे इस्तेमाल
दो शातिर युवक आशीष और अभिषेक आन लाइन शापिंग के लिए सिर्फ साइबर कैंफे यूज करते थे। ऐसा इसलिए ताकि पुलिस आईपी एड्रेस के जरिए उन तक पहुंचने की कोशिश करे भी तो गुमराह हो जाए। पुलिस ने बचने के लिए वह ऐसे मकान का एड्रेस होम डिलीवरी के लिए सेलेक्ट करते थे, जो उनके घर से दूर होता था। डिलेवरी लेने के लिए वह खुद कोरियर एजेन्सी के टॅच में रहते थे ताकि सामान के घर पहुंचने की नौबत ही न आए। पुलिस के हत्थे चढ़े शातिर साइबर क्रिमनलों के पिता सभापति चौरसिया निवासी जौनपुर जूनियर हाईस्कूल सिंहपुर में टीचर हैं। फैमिली के साथ वह भदोही जिले के ज्ञानपुर में रहते हैं.

कई बार कर चुके हैं air travel 
आनलाइन फ्राड करके पैसे कमाने में माहिर आशीष और अभिषेक कई बार हवाई यात्रा भी कर चुके हैं। वह ई शापिंग के जरिए ही अपने एयर टिकट भी बुक कराते थे। इसके साथ ही उन्होंने ई शापिंग के जरिए सोने के सिक्के समेत कई तरह के महंगे सामान भी खरीदे थे. 

आरोपियों के पास से बरामद सामान
-सोने के आभूषण, चांदी की आठ जोड़ी पायल 
-कई एअर लाइंस के लाखों रुपए के एअर टिकट 
-तीन लैपटॉप, एक कम्प्यूटर सिस्टम
-एप्पल का आईपैड व एक सैमसंग गैलक्सी टैबलेट 
-बैंक खातों की डिटेल, फर्जी पते पर यूज किए जा रहे सिम कार्ड 
-कई लोगों के फर्जी वोटर पहचान पत्र, महंगे मोबाइल फोन, चश्मा, कान्टैक्ट लैंस, महंगे कपड़े व जूते
-पल्सर बाइक, मोबाइल फोन और 55 हजार रुपए नकद 

ये सतर्कता जरूर बरतें
-एटीएम में अपने आसपास किसी को न रहने दें
-कोई है भी तो उससे बाहर जाने की रिक्वेस्ट कर लें
-समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें और यह संदेह हुआ है कोई पीछे से फॉलो कर रहा है तो तत्काल अपना पासवर्ड चेंज कर दें
-एटीएम का इस्तेमाल करने के लिए किसी को भी न दें
-एसएमएस एलर्ट सुविधा जरूर अवेल करें ताकि किसी भी ट्रांजेक्शन की आपको तत्काल इंफारमेशन मिल सके

एक मुकदमे ने खोला Fraud  

साइबर क्राइम से जुड़े मामले में पहली बार इतने बड़े लेवल पर खुलासा करने वाली पुलिस टीम ने बताया कि पिछले दिनों मनीष पाण्डेय नामक युवक ने जार्जटाउन थाने में मुकदमा दर्ज कराया कि उसकी बहन के खाते से फ्राड करके लाखो रुपए की शापिंग की गई है। मामले की जांच में लगी टीम ने सर्विलांस और इंटरनेट एसेस के जरिए फ्राड करने वालों को आईडेंटीफाई किया और फिर संगम पेट्रोल पंप के पास घेराबंदी करके पकड़ लिया। पूछताछ में इन्होंने अपना नाम आशीष कुमार और अभिषेक कुमार बताया। पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया कि इस काम में उनके पिता सभापति चौरसिया और चाचा अजीत कुमार भी शामिल हैं. 

अपराधियों की कार्य शैली

मीडिया के सामने आने पर अपनी कार्य प्रणाली के बारे में शातिर ने बताया कि योजना के तहत ये पहले एटीएम के आसपास की रेकी करते थे। टारगेट हमेशा वह एटीएम होता था जहां आने-जाने वालों की संख्या थोड़ा ज्यादा हो। भीड़ का फायदा उठाकर वह एटीएम के भीतर घुस जाते थे। दोनों अलग-अलग होने का दिखावा करते थे ताकि सामने वाला कुछ भांप न सके। दोनों एटीएम से ट्रांजेक्शन करने वाले के अलग-बगल रहने की कोशिश करते थे। एक काम एटीएम के चार डिजिट नोट करना होता था और दूसरे की नजर पासवर्ड पर होती थी। यहां से निकलकर वह सीधे साइबर कैफे पहुंचते थे आनलाइन शापिंग करते थे। बिल का भुगतान एटीएम कार्ड नम्बर तथा पासवर्ड के जरिए करते थे। इस फार्मूले से वे सैकड़ों लोगों को चूना लगा चुके थे. 

Cyber cafe का करते थे इस्तेमाल

दो शातिर युवक आशीष और अभिषेक आन लाइन शापिंग के लिए सिर्फ साइबर कैंफे यूज करते थे। ऐसा इसलिए ताकि पुलिस आईपी एड्रेस के जरिए उन तक पहुंचने की कोशिश करे भी तो गुमराह हो जाए। पुलिस ने बचने के लिए वह ऐसे मकान का एड्रेस होम डिलीवरी के लिए सेलेक्ट करते थे, जो उनके घर से दूर होता था। डिलेवरी लेने के लिए वह खुद कोरियर एजेन्सी के टॅच में रहते थे ताकि सामान के घर पहुंचने की नौबत ही न आए। पुलिस के हत्थे चढ़े शातिर साइबर क्रिमनलों के पिता सभापति चौरसिया निवासी जौनपुर जूनियर हाईस्कूल सिंहपुर में टीचर हैं। फैमिली के साथ वह भदोही जिले के ज्ञानपुर में रहते हैं।

कई बार कर चुके हैं air travel 

आनलाइन फ्राड करके पैसे कमाने में माहिर आशीष और अभिषेक कई बार हवाई यात्रा भी कर चुके हैं। वह ई शापिंग के जरिए ही अपने एयर टिकट भी बुक कराते थे। इसके साथ ही उन्होंने ई शापिंग के जरिए सोने के सिक्के समेत कई तरह के महंगे सामान भी खरीदे थे. 

आरोपियों के पास से बरामद सामान

-सोने के आभूषण, चांदी की आठ जोड़ी पायल 

-कई एअर लाइंस के लाखों रुपए के एअर टिकट 

-तीन लैपटॉप, एक कम्प्यूटर सिस्टम

-एप्पल का आईपैड व एक सैमसंग गैलक्सी टैबलेट 

-बैंक खातों की डिटेल, फर्जी पते पर यूज किए जा रहे सिम कार्ड 

-कई लोगों के फर्जी वोटर पहचान पत्र, महंगे मोबाइल फोन, चश्मा, कान्टैक्ट लैंस, महंगे कपड़े व जूते

-पल्सर बाइक, मोबाइल फोन और 55 हजार रुपए नकद 

ये सतर्कता जरूर बरतें

-एटीएम में अपने आसपास किसी को न रहने दें

-कोई है भी तो उससे बाहर जाने की रिक्वेस्ट कर लें

-समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहें और यह संदेह हुआ है कोई पीछे से फॉलो कर रहा है तो तत्काल अपना पासवर्ड चेंज कर दें

-एटीएम का इस्तेमाल करने के लिए किसी को भी न दें

-एसएमएस एलर्ट सुविधा जरूर अवेल करें ताकि किसी भी ट्रांजेक्शन की आपको तत्काल इंफारमेशन मिल सके