- छुट्टा की दिक्कत से घटे खरीदार, पोल्ट्री फॉर्म में डंप हो रहा माल

GORAKHPUR: नोटबंदी से आदमी के शौक घटे हैं और मुर्गो की खुराक बढ़ गई है। छुट्टा की दिक्कत का असर मुर्गे के मार्केट पर भी पड़ है। इस कारण पोल्ट्री फॉर्म में पड़े-पड़े मुर्गे खाकर मोटे-ताजे हो रहे हैं। फॉर्म संचालकों का कहना है कि कस्टमर अधिक वजन के मुर्गे पसंद नहीं करते लेकिन बिक्री नहीं होने के कारण मुर्गो का वजन बढ़ता जा रहा है। मुर्गो की खुराक पर पोल्ट्री फॉर्म वालों के खर्च भी बढ़ गए हैं। जिससे इस समय पोल्ट्री फॉर्म घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

प्रति मुर्गा 70-75 रुपए की बचत

पोल्ट्री फॉर्म संचालक रामबृक्ष यादव के अनुसार, चूजे को गीडा की हैचरी से 35 रुपए प्रति पीस के हिसाब से खरीद कर लाते हैं और पालते हैं। चूजा से मुर्गा तैयार होने में 40 से 45 दिन लगते हैं। एक चूजे को तैयार करने में करीब 4-5 किलो दाना खर्च हो जाता है। जिसकी कीमत 150 रुपए तक होती है। एक मुर्गे पर 75 से 80 रुपए की बचत होती है लेकिन जब से नोटबंदी हुई है, तब से कारोबार में घाटा लग रहा है।

अब हो रहा घाटा

रामवृक्ष बताते हैं कि मार्केट में खरीदार कम हो गए हैं। इससे पोल्ट्री फॉर्म से मुर्गे नहीं उठ रहे। अधिक दिन रहने के कारण उनका वजन बढ़ता जा रहा है और इसी के साथ उन पर खर्च भी बढ़ता जा रहा है। मार्केट में मुर्गे का वजन एक किलो हो तो लोग पंसद करते हैं लेकिन बाजार में ज्यादा वजन के मुर्गे की डिमांड कम है। सेल न होने से एक हफ्ते से फॉर्म में माल डंप है। जिसके कारण घाटा उठाकर 65 रुपए के हिसाब से माल बेचना पड़ रहा है।

तीन दिन में 60 हजार का घाटा

पोल्ट्री फॉर्म संचालक विपिन यादव के मुताबिक नोट बैन होने से बिजनेस में दिक्कत हो रही है। माल भी औने-पौने दाम पर बेचना पड़ रहा है। उसके बाद भी पार्टी से पेमेंट नही मिल पा रहा है। पेमेंट मांगने पर पार्टी वाले कहते हैं कि पैसा नहीं निकल पा रहा है। 18 तारीख में जो माल बेचा है, उसमें 60 हजार का घाटा हुआ है। पेमेंट न मिलने से व्यापारी दुबारा चूजा भी नही ले पा रहे हैं। इससे फॉर्म खाली हो गया है। हालांकि होटलों में छोटे मुर्गो की डिमांड अधिक है।

खपत घटी

कारोबारी बताते हैं कि जहां पहले जहां एक दिन में 2 कुंतल से अधिक मुर्गे का मीट व 50 कुंतल से अधिक चिकन की बिक्री होती थी, वहीं अब यह काफी घट गई है। राजन सिंह के अनुसार नोटबंदी की वजह से जहां मुर्गा, चिकन की खपत कम हुई है वहीं दानों की खपत बढ़ी है। गोरखपुर जिले में एक करोड़ रुपये के दाना की खपत है। इससे काफी नुकसान हो रहा है। अब तो कंपनियां भी अकाउंट से पेमेंट ले रही हैं लेकिन जिले में 90 प्रतिशत ऐसे फॉर्म मालिकान हैं जिनके पास अकाउंट ही नहीं है। जिसके चलते सेल पर असर पड़ रहा है।

प्वाइंट टू बी नोटेड

- एक चूजा पोल्ट्री फॉर्म में आने के बाद 35 से 40 दिनों में तैयार होता है।

- चूजा से मुर्गा बनाने में 4 से 5 किलो दाना खर्च होता है।

- चूजा तैयार होने के बाद उनका वजन एक किलो या इससे ज्यादा होता है।

- मुर्गा तैयार होने के बाद फॉर्म से 75 से 80 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता है।

- गोरखपुर जिले में पोल्ट्री फॉर्म की संख्या के हिसाब से एक करोड़ रुपये दाने पर खर्च होते हैं।

- मुर्गे के मीट की खपत दो कुंतल और 50 कुंतल चिकन की बिक्री होती है।

मुर्गे का रेट

खड़ा मुर्गा ---100-120 रुपये प्रति किलो

मुर्गे का मीट-- 150-160 रुपये प्रति किलो

चिकन ---160-180 रुपये प्रति किलो

जिले में इतने पोल्ट्री फॉर्म

स्थान संख्या

नगर निगम-- -38

चरगांवा---- -27

बांसगांव-----15

बड़हलगंज----13

गगहा--------15

कौड़ीराम------26

सरदारनगर-----44

पाली--------19

कैंपियरगंज--- -49

ब्रम्हपुर----- -31

गोला------ -20

उरुवा----- -24

पिपरौली--- -23

खोराबार--- -21

बेलघाट--- -13

खजनी---- -23

पिपराईच-- -64

भटहट--- -23

सहजनवां- -24

जंगल कौडि़या -35