गोरखपुर (ब्यूरो) ऐसे में गीता प्रेस से छपी पुस्तकों को यंगस्टर्स ज्यादा खरीदने लगे हैं, जिसके चलते गीता प्रेस मांग के अनुरूप लोगों को किताबें उपलब्ध नहीं करा पा रहा है।

धार्मिक किताबें बांटते भी हैं

बुधवार की दोपहर करीब दो बजे गीता प्रेस के सामने उनकी किताबों के शोरूम में बड़ी संख्या में लोग खरीदारी करते दिखे, जिसमें बड़ी संख्या में यंगस्टर्स शामिल थे। इस बीच संतकबीर नगर से पहुंचे युवक रवि ने बताया कि वह अक्सर गीता प्रेस आते हंै और यहां से किताबें खरीदकर ले जाते हैं, उन्होंनेे बताया कि वह धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए धार्मिक किताबों को बांटते भी हैं।

मोबाइल के दौर में भी बनीं पसंद

गीता प्रेस के ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल और कंप्यूटर ने भले नई पीढ़ी में किताबों के प्रति रुचि को कम कर दिया है, लेकिन धार्मिक किताबों का महत्व पहले से भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि गीता प्रेस की किताबें नई पीढ़ी में संस्कार का निर्माण करने के साथ ही उनमें सनातन के प्रति रुचि बढ़ाती हैं।

2047 तक 200 करोड़ पुस्तक छापने का लक्ष्य

गीता प्रेस से 100 वर्षों में 95 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है, पर जिस तरह से यूथ की गीता प्रेस के धार्मिक किताबों के प्रति रुचि बढ़ी है, इससे गीता प्रेस प्रबंधन उत्साहित है। गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ। लालमणि तिवारी ने बताया कि अब गीता प्रेस ने अगले 23 वर्षों यानी वर्ष 2047 तक 200 करोड़ धार्मिक किताबें प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए गीता प्रेस का विस्तार किया जाएगा।

15 भाषाओं में प्रकाशित होती हैं किताबें

असमिया

बांग्ला

अंग्रेजी

गुजराती

हिंदी

कन्नड़

मलयालम

मराठी

नेपाली

उडिय़ा

पंजाबी

संस्कृत

तमिल

तेलगू

ऊर्दू

करोड़ों में प्रकाशित हुई हैं ये किताबें

श्रीमद्भागवत गीता- 17.60 करोड़

रामचरित मानस एवं तुलसी साहित्य- 12.50 करोड़

पुराण, उपनिषद् आदि ग्रंथ- तीन करोड़

महिलाओं एवं बालकोपयोगी किताबें- 12.50 करोड़

भक्त चरित्र एवं भजनमाला- 18.25 करोड़

कल्याण- 18 करोड़

अन्य प्रकाशन- 15 करोड़

धार्मिक किताबों के प्रति युवाओं की दिलचस्पी बढ़ी है। युवा जिन किताबों को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं उनमें हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीस, रामचरित मानस और श्रीमद्भगवत गीता शामिल है।

आप किसी भी धर्म के हों, अपने धर्म में विश्वास होना चाहिए। आस्था और विश्वास के लिए धार्मिक किताबों को जरूर पढऩा चाहिए।

पूर्णिमा पांडेय, बरगदवां

गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली किताबों को पढ़ता हूं। इससे मन में भक्तिभाव आता है। हनुमान चालीसा और दुर्गा चालीसा का पाठ नियमित करता हूं।

आयुष उपाध्याय, सूर्यकुंड

मैं गीता प्रेस अक्सर आता रहता हूं। यहां आकर किताबों को खरीदता हूं और खुद पढऩे के साथ ही दूसरों में भी किताबों का वितरण करता हूं।

आशुतोष पांडेय, सिद्धार्थनगर