-हाल मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड का

-मामले पर मेडिकल कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन की चुप्पी

-प्राइवेट वार्ड के छह कमरों में आरामतलबी से काट रहे 'सजा'

-मधुमिता हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाए अमरमणि और उनकी पत्‍‌नी मधुमणि भी शामिल

sunil.trigunayat@inext.co.in

GORAKHPUR : बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में फ्0 कमरे हैं। इन कमरों में छह वीआईपी कैदी इलाज के लिए भर्ती हैं। इनमें अमरमणि त्रिपाठी, मधुमणि त्रिपाठी, गोपाल यादव, राममिलन यादव, रामनारायण यादव और मारकण्डेय शाही शामिल हैं। ये सभी हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए हैं और आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। चूंकि ये सभी हाइप्रोफाइल हैं, इसीलिए अपने रसूख का इस्तेमाल कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में उनके रसूख को देखकर यही लगता है कि ये सभी बीमारी का हवाला इसलिए दे रहे हैं ताकि उन्हें जेल में कैदी की तरह न रहना पड़े और आराम फरमा रहे हैं। इन पर किसी का जोर नहींचलता। मेडिकल कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन भी इन पर चुप्पी साधे हुए हैं। इनसे मिलने रिश्तेदार और सहयोगी दिनभर आते रहते हैं। यह सिलसिला पिछले कई सालों से चल रहा है।

क्- अपराधी-अमरमणि त्रिपाठी

अपराध-मधुमिता हत्याकांड के मुख्य दोषी।

सजा-आजीवन कारावास।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर 8 में एडमिट।

मानसिक रोगी- अमरमणि पिछले दो साल से बीआडी मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में कमरा नंबर आठ में भर्ती हैं। इन्हें मानसिक रोग से ग्रस्त बताया जा रहा है। जब आई नेक्स्ट ने इनकी डिटेल्स खंगालनी शुरू की तो कोई भी डॉक्टर यह नहींबताया पाया कि अमरमणि को कौन सी मानसिक बीमारी है। वहींउत्तराखंड हाईकोर्ट भी यह पूछ चुकी है कि आखिर इन्हें जेल क्यों नहीं भेजा जा रहा है?

मौजा ही मौजा

आई नेक्स्ट रिपोर्टर जब मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर 8 के अंदर पहुंचा तो वहां बीमार अमरमणि नहींबल्कि बाहुबली अमरमणि मिले। उनके कमरे के अगल-बगल किसी को भी कमरा नहीं दिया गया है। नीचे कई लग्जरी गाडि़यां और उनके समर्थक मिले। जब आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने

अंदर जाने की कोशिश की तो उसे रास्ते में ही रोक दिया गया। कमरे के आस पास और अंदर सुरक्षा का ऐसा अघोषित घेरा था कि उसमें परिंदा भी पर नहींमार सकता है।

ख्-अपराधी-मधुमणि त्रिपाठी

अपराध-मधुमिता हत्याकांड में दोषी

सजा-आजीवन करावास

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड के रूम नंबर क्म् में भर्ती।

ये भी मानसिक रोगी- पिछले दो साल से मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड के रूम नंबर क्म् में भर्ती मधुमणि को भी मानसिक रोगी बताया जा रहा है। इनके मामले में भी कोई डॉक्टर यह नहींबता पाया कि आखिर मधुमणि को ऐसी कौन सी बीमारी जिसकी वजह से वे पिछले दो साल से मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं।

मौजा ही मौजा

आई नेक्स्ट रिपोर्टर जब प्राइवेट वार्ड के कमरा क्म् में पहुंचा तो यहां मधुमणि मिलीं। कमरे के दरवाजे के बाहर पुलिस मुस्तैद थी। जब आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने मधुमणि से बात करनी चाही तो उन्होंने बात करने से इंकार कर दिया।

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फ्-अपराधी-गोपाल यादव

अपराध- हत्या

सजा- आजीवन कारावास

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड कमरा नंबर क्ब् में भर्ती

पेट की बीमारी- पिछले डेढ़ साल से मेडिकल कॉलेज में एडमिट हैं। इन्हें पेट की बीमारी से पीडि़त बताया जा रहा है। आई नेक्स्ट ने जब इनके बारे में पता किया तो पता चला कि सर्जरी विभाग के डॉक्टर्स इनकी देख रेख कर रहे हैं।

मौजा ही मौजा-आई नेक्स्ट रिपोर्टर जब प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर क्ब् में पहुंचा तो बीमार गोपाल यादव मिले। कमरे के बाहर उनके समर्थक भी मिले। जब उनके बारे में कुछ जानने की कोशिश की गई तो उनके समर्थक आ गए और कुछ भी बताने से मना कर दिया। उनके कमरे के बाहर पुलिस के जवान भी तैनात थे। उन्होंने भी कुछ बताने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि साहब आराम फरमा रहे हैं।

ब्-अपराधी -राममिलन यादव

अपराध- हत्या

सजा- आजीवन कारावास

मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड कमरा नंबर क्9 में भर्ती।

इन्हें भी है मानसिक रोग- पिछले डेढ़ साल से राममिलन यादव मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। इन्हें मानसिक रोग की बीमारी से पीडि़त बताया जा रहा है। ये महाशय भी मानसिक रोग विभाग के डॉक्टरों की देख रेख में हैं।

मौजा-ही-मौजा- आई नेक्स्ट रिपोर्टर जब प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर क्9 में पहुंचा तो वहां बीमार राममिलन यादव थे। कमरे के बाहर एक पलंग था। उस पर उनके समर्थक बैठे थे। जब आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने उनसे बातचीत करनी चाही तो उन्होंने मना कर दिया। रिपोर्टर यहां से जाने लगा तो वार्ड के बाहर गेट पर एक लग्जरी गाड़ी रुकी और उसमें सफेद कुर्ते-पायजामे में एक व्यक्ति उतरा। जब रिपोर्टर उनके पास पहुंचा तो वहां कुछ लोगों ने बताया कि उनसे बात करना मुश्किल है। काफी देर इंतजार करने के बाद भी रिपोर्टर की उनसे मुलाकात नहींहो पाई।

भ् अपराधी -रामनारायण यादव

अपराध- हत्या

सजा- आजीवन कारावास

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में कमरा नबंर फ्0 में भर्ती।

ये भी मानसिक रोगी - रामनारायण यादव पिछले एक साल से मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में एडमिट है। इन्हें भी मानसिक रोग है। आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने जब डॉक्टर से इस बारे में पूछा तो उनका कहना था कि समय के अनुसार इनकी बीमारियों बदलती रहती है।

मौजा ही मौजा- आई नेक्स्ट रिपोर्टर प्राइवेट कमरा नंबर फ्0 पास पहुंचा तो देखा कि दरवाजे के बाहर कुछ लोग खड़े थे। एक पुलिसकर्मी इसी रास्ते गुजर रहा था। रिपोर्टर ने जब उससे बात की तो उसने बताया कि उसे कैदियों की सुरक्षा में तैनात किया गया है। इसके अलावा वह कुछ भी बताने में असमर्थ था। रिपोर्टर ने रामनारायण यादव से मिलने की कोशिश की, लेकिन उसे मिलने नहींदिया गया।

म्-अपराधी- मारकण्डेय शाही

अपराध- हत्या

सजा-आजीवन कारावास

मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड कमरा नम्बर ख्0 में एडमिट।

हड्डी से संबंधित बीमारी- मारकण्डेय शाही पिछले डेढ़ साल से मेडिकल कॉलेज में भर्ती हैं। बताया जाता है कि इन्हें हड्डी से संबंधित रोग है। आई नेक्स्ट ने जब इनकी डिटेल खंगाली तो कोई भी डॉक्टर यह नहींबता पाया कि आखिर उन्हें एक्जेक्ट कौन सी बीमारी है।

मौजा ही मौजा- रिपोर्टर जब प्राइवेट वार्ड के कमरा नंबर ख्0 में पहुंचा तो वहां मारकण्डेय शाही मिले। कमरे के पास एक हेल्थ एंप्लाइ खड़ा था। जब आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने एंप्लाई से बात करनी चाही तो वह घबरा गया। उसने कुछ भी कहने या बताने से साफ इंकार कर दिया। काफी देर तक प्राइवेट वार्ड के कमरे में एडमिट सजायाफ्ता कैदियों से मिलने का प्रयास किया गया, लेकिन रिपोर्टर को बाहर ही रोक दिया गया।

बदलती रहती है बीमारियां

ये सभी हाइप्रोफाइल कैदी एक लग्जीरियस लाइफ जीते हैं। इनकी बीमारी भी मौमस की तरह बदलती रहती है। हैरानी की बात यह है कि डॉक्टरों को भी यह ठीक से नहींपता कि आखिर एग्जेक्ट उन्हें बीमारी क्या है। इन छह कैदियों के बारे में कोई भी डॉक्टर यह बताने को तैयार नहींहै कि आखिर उन्हें बीमारी क्या है और वे क्यों स्वस्थ नहींहो रहे हैं? साथ ही यह भी कोई नहींबता पाया कि किस कैदी का इलाज कौन सा डॉक्टर कर रहा है। सभी मेडिकल कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन की मेहरबानी वे मौज काट रहे हैं।

डॉक्टर्स की टीम भी धराशायी

कुछ महीने पहले इन कैदियों जांच के लिए डॉक्टरों की एक टीम बनाई गई थी। तय किया गया था कि कमेटी में फ्9 डॉक्टर्स इनकी जांच करेंगे। कमेटी की कमान एसआईसी डॉ। रामयश यादव को दी गई थी, लेकिन यह टीम धीरे-धीरे बिखरती नजर आ रही है। अभी तक टीम एक भी कैदी की बीमारी का पता नहींलगा सकी है।

वर्जन

प्राइवेट वार्ड में छह कैदी काफी दिनों से इलाज करा रहे हैं। इनके स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए फ्9 डॉक्टर्स की टीम बनाई गई थी। लेकिन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य से लिखित आदेश नहीं मिलने की वजह से जांच नहीं हो पायी। उधर हर हफ्ते जिला जेल अधीक्षक को पत्र भी दिया जाता है, लेकिन इसका जबाव नहीं मिलता पाता है। एक कैदी मारकण्डेय शाही को कहा जा चुका है कि आपका यहां इलाज नहीं हो सकता है आप कहीं और चले जाइए। लेकिन वे कहीं नहीं जा रहे हैं।

डॉ.रामयश यादव एसआईसी नेहरू चिकित्सालय

प्राइवेट वार्ड में भर्ती कैदियों की जांच के लिए फ्9 डॉक्टर्स की टीम बनाई गई है। टीम जांच कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद स्वस्थ्य कैदियों को भेज दिया जाएगा।

डॉ। केपी कुशवाहा, प्रिंसिपल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज

प्राइवेट वार्ड में भर्ती कैदियों की मेडिकल रिपोर्ट महीने में दो बार मांगी जाती है, जवाब आता है कि इलाज चल रहा है।

एसके शर्मा, जेल अधीक्षक, मंडलीय कारागार गोरखपुर