गोरखपुर (ब्यूरो)। बता दें, कोरोना की फस्र्ट और सेकेंड वेव में पेशेंट्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा था। गवर्नमेेंट और प्राइवेट हॉस्पिटल्स के बेड भी फुल थे। इतना ही नहीं इंजेक्शन और इससे संबंधित दवाएं को भी टोटा पड़ गया था। पेशेंट की जान बचाने के लिए जिलों ने आनन-फानन में दवाएं मंगा ली थीं। गोरखपुर में 66,878 लोग कोरोना पॉजिटिव हो गए थे और 858 लोगों की मौत हो गई। बावजूद इसके हेल्थ डिपार्टमेंट कोरोना के लिए आईं पूरी दवाएं बांटने में नाकाम रहा। अब हालात सामान्य हैं और इक्का दुक्का पेशेंट सामने आ रहे हैं, तो उनका इलाज पैरासिटामॉल, जिंक और विटामिन सी आदि दवाओं से हो रहा है। जबकि बड़ी संख्या में कोरोना किट का अंबार लगा है।
धड़ल्ले से बांट रहे विटामिन की गोली
जानकारी के अनुसार हेल्थ डिपार्टमेंट के सेंट्रल ड्रग स्टोर में करीब 14 लाख रुपए की पैरासिटामॉल, जिंक और विटामिन सी और डी की दवाएं उपलब्ध हैं। 50 लाख की आबादी वाले गोरखपुर की पब्लिक को विटामिन सी और डी गोली बहुतायत में दी जा रही है। बुखार और हल्के दर्द के मरीजों को पैरासिटामॉल दी जा रही है।
फैक्ट एंड फीगर
एक्टिव केस-8
फस्र्ट वेव से अब तक संक्रमित पेशेंट -66,878
कोरोना को मात देने वाले पेशेंट -65,996
कोरोना से हुईं मौत 858
गोरखपुर में रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं
सीएमओ डॉ। आशुतोष कुमार दुबे ने बताया, कोरोना की फस्र्ट, सेंकेंड और थर्ड वेव में कोरोना संक्रमण के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन और म्यूकरमाइकोसिस से जुड़ी दवाएं खपत के हिसाब से ही मंगाई गई थी.ं जो पूरी तरह से खत्म हैं। अब मिलने वाले कोरोना पेशेंट्स को पैरासिटामॉल, जिंक और विटामिन सी की टेबलेट दी जा रही हैं। बची दवाओं को सामान्य पेशेंट को दिया जाएगा।
कोरोना किट में जितनी भी दवाएं आती हैं। उन्हें सामान्य पेशेंट्स को भी दिया जा सकता है। सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार में पैरासिटामॉल, जिंक, विटामिन सी और डी भी दी जाती है। विटामिन की दवाओं से पेशेंट्स की इम्युनिटी पॉवर बढ़ती है।
डॉ। बीके सुमन, वरिष्ठ फिजिशियन जिला अस्पताल