- जिला अस्पताल के ओपीडी में मरीजों का बुरा हाल

- प्लास्टर रूम और डॉक्टर तक गोद में उठाकर ले जा रहे परिजन

GORAKHPUR:

आप अगर जिला अस्पताल के ओपीडी से पेशेंट्स को प्लास्टर रूम या डॉक्टर तक पहुंचाना चाह रहे हैं तो स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की उम्मीद तो कतई न करें। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि इतने बड़े अस्पताल की ओपीडी में न स्ट्रेचर है और न ही व्हील चेयर। यह व्यवस्था सिर्फ इमरजेंसी में ही लागू हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन का दावा है कि दोनों जगहों पर यह सुविधा है। आप भी देखिए कि यहां ऑर्थो पेशेंट्स किस तरह परेशान हो रहे हैं।

ओपीडी के बाहर पेशेंट्स

सुबह करीब 9:30 बजे आर्थो ओपीडी के बाहर पेशेंट्स की लम्बी कतार। वहीं प्लास्टर रूम में मरीजों की भरमार है। तीमारदार प्लास्टर रूम से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के बिना पेशेंट को गोद में उठाकर बाहर ला रहे हैं। अस्पताल कैंपस के बाहर फर्श पर बैठे मरीजों से इस बारे में बातचीत की गई। उनकी कहानी कुछ इस कदर है।

बेलीपार के बहरामपुर निवासी वकील (23) का पिछले दिनों एक हादसे में बाया पैर फै्रक्चर हो गया। किसी तरह अपने परिजन जशवंत के साथ जिला अस्पताल के ओपीडी पहुंचे। यहां उन्हें स्ट्रेचर नहीं मिला तो जशवंत उन्हें गोद में उठाकर प्लास्टर रूम तक पहुंचाए। प्लास्टर होने के बाद फैमिली मेंबर्स ने ओपीडी के बाहर लाकर फर्श पर बैठाया। उनका कहना है कि ऐसे तो सिर्फ दवा और इलाज किया जा रहा है लेकिन यदि जुगाड़ है तो सबकुछ मिलेगा।

पिपराइच के उनवल कलवारी माफी के रहने वाले संदीप शर्मा (19) का बायां पैर फै्रक्चर हो गया था। जिसका कुछ दिन पहले ऑपरेशन किया गया। आज वह प्लास्टर कटवाने के लिए अपने पिता रामशब्द के साथ ओपीडी पहुंचे। अकेले ही उनके पिता ने किसी तरह डॉक्टर के पास लेकर पहुंचाया। डॉक्टर से सलाह लेने के बाद वह प्लास्टर रूम में पहुंचे। जहां उनका प्लास्टर काटा गया। उसे बाहर ले जाने के लिए स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिला तो पिता ने किसी तरह उसे बाहर पहुंचाया। पशेंट को बाहर बिठाकर वह दवा लेने चले गए। पिता का कहना है कि यहां की व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है।

शाहपुर के मणिन्द्र पांडेय का एक हादसे में बायां हाथ टूट गया था। जिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर से दिखाया गया। एक्सरे होने पर फ्रैक्चर होने की जानकारी हुई। इसके बाद फैमिली मेंबर्स ने उसे लेकर डॉक्टर से मुलाकात की। उन्हें प्लास्टर की सलाह दी गई। पिता गोरख का कहना है कि वे खुद ही बीमार चल रहे हैं। किसी तरह बेटे को यहां लेकर आए हैं। व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि यहां सभी अपने में मशगूल हैं। बाहर कुछ और, अंदर कुछ और है।

पुरानी ओपीडी में पहले से ही एक स्ट्रेचर रखवाया गया है। एक और स्ट्रेचर के लिए स्टोर कीपर को कहा गया है। ओपीडी और न्यू ओपीडी में एक-एक व्हीलचेयर जल्द रखवाया जाएगा।

डॉ। एचआर यादव, एसआईसी