कानपुर (ब्यूरो) केस हिस्ट्री
1: लालबंगला निवासी फतेह बहादुर सिंह ने पासपोर्ट के लिए आवेदन करने के बाद 1500 रुपये फीस भी जमा कर दी। ऑनलाइन 700 रुपये भी दूसरे मदों में जमा करा दिए गए। उनके मोबाइल पर पासपोर्ट ऑफिस से अपॉइंटमेंट मिला। अपॉइंटमेंट मिलने के बाद जब वह ऑफिस पहुंचे तो उन्हें पता चला कि फतेह बहादुर के नाम से कोई अपॉइंमेंट ही नहीं है। इतना सुनते ही उनके होश उड़ गए। जब उन्होंने गंभीरता से जानकारी की तो पता चला कि वो फर्जी वेबसाइट का शिकार हो गए


2: नौबस्ता निवासी सुमित श्रीवास्तव ने 15 दिन पहले पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। उन्हें 13 नवंबर का पासपोर्ट कार्यालय में अपॉइंटमेंट मिला था। जब वह ऑफिस पहुंचे तो उनके नाम से कोई अपॉइंमेंट नहीं था। इसे लेकर कर्मचारी से काफी बहस भी हुई। जांच करने पर पता चला फर्जी वेबसाइट से सुमित ने आवेदन किया था। जांच करने पर पता चला कि जिस साइट पर सुमित ने आवेदन किया था, वैसी कोई साइट है ही नहीं। बल्कि उससे मिलते जुलते नाम से साइट बनाई गई थी।

3: अनवरगंज स्थित कुली बाजार निवासी साहब को विदेश जाना था। उनका वीजा कनफर्म होने के बाद उन्होंने पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया था। जो अपॉइंटमेंट उन्हें दिया गया, उस दिन छुट्टी थी। दीपावली के चंद दिन पहले उनका वीजा आ गया। जब उन्होंने पासपोर्ट के लिए दौड़ शुरू की तो पता चला कि उनके पासपोर्ट फार्म की कहीं इंट्री नहीं है। कानपुर से लखनऊ तक जानकारी की तो पता चला कि गूगल से जो वेबसाइट उन्होंने लेकर अप्लाई किया था वह फर्जी थी।