- संजीत यादव किडनैपिंग एंड मर्डर में पकड़े गए आरोपी युवकों की कोई क्रिमिनल हिस्ट्री नहीं, फिर भी एक महीने तक पुलिस अफसरों को छकाते रहे

-किडनैपर्स की तैयारी और शातिर प्लानिंग के आगे पुलिस का हर पैतरा फेल, जबरदस्त ट्रेनिंग, हाईटेक संसाधन, सालों का अनुभव कुछ नहीं आया काम

-किडनैपिंग, बंधक बनाकर रखने, फिरौती मांगने और वसूलने से लेकर हत्या तक को बर्रा क्षेत्र में ही दिया गया अंजाम फिर भी पुलिस नहीं लगा पाई सुराग

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KANPUR: तेज तर्रार पुलिस अफसर, जबरदस्त ट्रेनिंग, हाईटेक संसाधन, सालों का अनुभव, लंबी-चौड़ी टीम, हर महीने मोटी सैलरी। लेकिन, कुछ भी काम नहीं आया। चंद नौसिखिए किडनैपर्स हर कदम पर पुलिस को मात देते रहे। ऐसे किडनैपस जिनका यह पहला अपराध था। इससे पहले अपराध का कोई रिकॉर्ड नहीं। फिर भी ये अपराधी पुलिस को करीब एक महीने तक अपने तरीके से नचाते रहे। बर्रा में लैब टेक्निशियन संजीत यादव को किडनैप करने, उसकी हत्या और फिरौती मांगने तक एक महीने के वक्त में किडनैपर्स हमेशा पुलिस से दो कदम आगे रहे। गिरफ्तार किए गए संजीत के दोस्त कुलदीप और सभी चार युवकों का इससे पहले कभी अपराध से वास्ता नहीं रहा है, लेकिन इस घटना को अंजाम देने में न सिर्फ उन्होंने दुस्साहस दिखाया बल्कि पूरी प्लानिंग भी की। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस के पक्ष को जानने के बाद कहा जा सकता है कि इस किडनैपर्स की तैयारी पुख्ता थी। जबकि स्मार्ट और हाईटेक पुलिसिंग का दावा करने वाली कानपुर पुलिस बेबस सी नजर आ रही थी। पुरे मामले में पुलिसिंग के तरीके पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। क्या ट्रेनिंग में कहीं कमी है या फिर काम करने की नीयत में

कैसे की किडनैप करने की प्लानिंग

कुलदीप, रामजी और ज्ञानेंद्र उर्फ ईशू के पास लॉकडाउन के दौरान कोई काम नहीं था। वह ज्यादा पैसा कमा कर हॉस्पिटल और पैथोलॉजी खोलना चाहते थे। इसी के चलते उन्होंने किडनैप करने का प्लान बनाया। शुरुआत में किसी बच्चे को किडनैप करने का प्लान था, लेकिन कुलदीप ने संजीत को किडनैप करने के लिए कहा। संजीत को लेकर उन्हें पता था कि वह काफी अच्छा कमाता है और घर से भी मजबूत है। ऐसे में उससे 30-40 लाख रुपए वसूला जा सकता है। किडनैप करके संजीत को कहां रखा जाएगा। इसके लिए कुलदीप और ईशू ने पहले किराए पर एक घर लेने के लिए ब्रोकर रविंद्र कुमार तिवारी से संपर्क किया। रवींद्र ने उन्हें बर्रा-6 एमआईजी में सुनील श्रीवास्तव का घर दिखाया। सुनील ने शादीशुदा लोगों को ही घर किराए पर देने की बात कही। तब ईशू और राम जी ने गुमटी में रहने वाली महिला प्रीति शर्मा को इस खेल में शामिल किया। उसे पत्नी बता कर सुनील का घर 15 हजार रुपए किराए पर लिया गया। प्रीत को इस काम के एवज में दो लाख रुपए देने की बात हुई थी।

फिरौती मांगने को खरीदा अलग सिम

संजीत को किडनैप करने के लिए फिरौती किस फोन नंबर से मांगी जाएगी। इसकी व्यवस्था भी कुलदीप ने की। सचेंडी से एक प्री एक्टिवेटेड सिम और फोन खरीदा गया जोकि सिर्फ फिरौती को लेकर बातचीत में यूज किया जाना था। 29 जून को इस नंबर से पहली बार फिरौती मांगने के लिए फोन किया गया। संजीत के परिजन किडनैपर्स की आवाज न पहचानें, इसके लिए फोन पर वाइस चेंजर एप का भी यूज किया गया। फिरौती के लिए बात रामजी ने ही की। बात हो जाने के बाद फौरन फोन बंद कर दिया जाता था। यह मोबाइल पुलिस अभी तक बरामद नही कर सकी है।

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शोर न मचाए इसके लिए खिलाई दवा

किडनैप करने के बाद संजीत शोर न मचाए, इसके लिए उसे लगातार बेहोशी की दवा दी जाती थी। उसे किडनैप भी शराब पीने के दौरान बेहोशी की गोली खिला कर ही किया गया था। किडनैपिंग के बाद उसे बर्रा-6 में ही किराए के घर में रखा गया। वहीं इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस की जांच पर नजर रखने के लिए कुलदीप संजीत के सहकर्मियों और दोस्त हिमांशु से बातचीत करता रहा। साथ ही बातचीत के दौरान वह पुलिस और परिजनों को लेकर भी जानकारी लेता रहा। पुलिस को संजीत को लेकर पहला सुराग भी हिमांशु से पूछताछ के दौरान ही चला था।