लखनऊ (ब्यूरो)। 5 दिन पहले पीजीआई थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक सरफिरे आशिक ने युवती पर सरेराह चाकू से कई वार कर उसे घायल कर दिया था। वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है, लेकिन सवाल खड़ा होता है कि वुमेन सेफ्टी को लेकर पुलिस के बड़े-बड़े दावे आखिर क्यों आए दिन खोखले साबित होते रहते हैं? क्यों पुलिस सिर्फ फेस्टिवल सीजन पर ही एक्टिव होती है और बाद में सुस्त हो जाती है? ऐसे कई सवाल हैं, जो महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस पर ही सवाल खड़े कर देते हैं। इसे देखते हुए दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने एक खास रिपोर्ट तैयार की है।

शहर की बड़ी घटनाएं

केस-1

जून 2023 को इंदिरानगर इलाके में इंटर की एक छात्रा का शव उसके घर में फंदे से लटकता शव मिला। मां ने शाहिद नाम के शख्स के खिलाफ बेटी से दुष्कर्म के बाद हत्या का केस दर्ज कराया था। आरोप था कि शाहिद ने हत्या को आत्महत्या का रूप देने के लिए उनकी बेटी के शव को फंदे से लटका दिया है।

केस-2

अक्टूबर 2022 विभूतिखंड थानाक्षेत्र में छात्रा से गैंगरेप की वारदात हुई। ऑटो ड्राइवर और उसके साथी ने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उस पर हमला भी किया और हुसड़िया चौराहे पर फेंककर फरार हो गए थे। इस घटना से राजधानी शर्मसार हो गई थी।

केस-3

जुलाई 2023 को एक युवती इंटरव्यू के लिए घर से निकली थी। घर के पास से ही उसने ई-रिक्शा लिया था। ई-रिक्शा में ड्राइवर सहित चार अन्य लोग भी बैठे हुए थे। ये सभी युवती को एक जंगल में लेकर चले गए। यहां इन लोगों ने उसके साथ दरिंदगी की। जब युवती ने विरोध किया तो मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और गला घोंटकर हत्या कर दी थी।

महिला सुरक्षा की बनीं दर्जनों योजनाएं

महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस विभाग ने कई बड़ी योजनाएं बनाई हैं। इनमें एंटी रोमियो, ईव टीजिंग सेल, पिंक पेट्रोलिंग, मिशन शक्ति समेत कई योजना शामिल है। हैरानी की बात है कि इन सभी योजनाओं के शुरू होने पर पुलिस अलर्ट दिखी। खासकर उन दिनों जब फेस्टिवल सीजन नजदीक हो, या फि कोई बड़ी घटना हो जाए, लेकिन उसके बाद पुलिस चुप्पी साध लेती है। ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर पुलिस की मुस्तैदी होती तो शायद महिलाओं के साथ होने वाले कई बड़े अपराधों पर लगाम लग सकता था।

सफेद हाथी बनीं योजनाएं

कहने को तो पुलिस स्कूल, कॉलेज और भीड़भाड़ वाले जगहों पर एंटी रोमियो अभियान चलाती है। इसके अलावा सिविल वर्दी में भी पुलिस की टीम लगी होती है, लेकिन ये सिर्फ फेस्टिवल सीजन पर एक्टिव रहती है। ऐसे में अपराधियों पर लगाम लगने के बजाए इनके हौसले और बुलंद हो जाते हैं। यही वजह है कि आए दिन सरेराह महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहा है। ऐेसे में अगर पुलिस साल के 12 महीने ऐसा अभियान चलाएं, तो शायद महिला से अपराध होने के आंकड़ों में कमी आ सकती है।

सुरक्षा के लिए सेफ सिटी का प्रोजेक्ट

सेफ सिटी में महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी महिला पुलिस कर्मियों के ऊपर ही रहती है। उनके पास पिंक स्कूटर और एसयूवी वाहन होते हैं, जिससे वे शोहदों पर नजर रख सकते हैं। महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट भी बनाया गया है। इन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी वाहनों से शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाके, पार्क, स्कूल, कॉलेज समेत अन्य जगहों पर पेट्रोलिंग करने की होती है, ताकि महिलाओं की सुरक्षा बनी रहे।

इसकी दी जाती है ट्रेनिंग

- शहर के पार्कों और अन्य जगहों पर लगाई जाती है चौपाल

- महिलाओं और छात्रों की सुरक्षा को लेकर किया जाता है फोकस

- यहां आई महिला और युवती को पुलिस सुरक्षा के गुर सिखाती है

- महिलाओं को किया जाता है अवेयर, ताकि पुलिस को सूचित किया जाए

ये मुख्य योजनाएं

- एंटी रोमियो स्क्वायड

- पिंक पेट्रोलिंग

- ईव टिजिंग सेल

- मिशन शक्ति

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस हमेशा से सतर्क रही है। आए दिन थानों के अंतर्गत महिलाओं की सुरक्षा के लिए अलग-अलग अभियान भी चलाए जाते हैं, ताकि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर रोक लगाई जा सके।

श्रवण कुमार सिंह, डीसीपी, क्राइम अंगेस्ट वुमेन एंड सिक्योरिटी