लखनऊ (ब्यूरो)। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर राजधानी के विविध शिवालयों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। जहां भस्म आरती से लेकर शोभायात्रा और रुद्राभिषेक तक का आयोजन किया जायेगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी की शुरुआत 8 मार्च को रात 9:57 मिनट पर होगी, जबकि तिथि का समापन अगले दिन शाम 6:17 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, महाशिवरात्रि 8 मार्च को ही मनाई जायेगी। ईशान संहिता के अनुसार, समस्त ज्योतिर्लिंगों का प्रादुर्भाव फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को अर्धरात्रि के समय हुआ था। इस पुनीत पर्व को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है।

भगवान का अभिषेक करें

ज्योतिषाचार्य पं। राकेश पांडेय के अनुसार वैसे तो शिव भक्त प्रत्येक कृष्ण चतुर्दशी को व्रत करते है। परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी का व्रत जन्म जन्मांतर के पापों का समन करने वाला है। इसमें रात्रि जागरण करते हुये रात्रि में चारों प्रहर में चार प्रकार के द्रव्यों से अभिषेक करने का विधान है। स्कंद पुराण के अनुसार, इस दिन सूर्यास्त के बाद भगवान शिव-पार्वती अपने गणों के सहित भूलोक में सभी मंदिरों में प्रतिष्ठित रहते हैं। ऐसे में, प्रथम प्रहर में षोडशोपचार पूजन कर गोदुग्ध से, द्वितीय प्रहर में गोदधि से, तृतीय प्रहर में गोघृत से व चतुर्थ प्रहर में पंचामृत से अभिषेक करने का विधान है।

ऐसे करें महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक

भगवान शिव का पूजन व रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है। रुद्राभिषेक करने से कार्य की सिद्धि शीघ्र होती है। धन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को स्फटिक शिवलिंग पर गोदुग्ध से, सुख समृद्धि की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को गोदुग्ध में चीनी व मेवे के घोल से, शत्रु विनाश के लिए सरसों के तेल से, पुत्र प्राप्ति को मक्खन या घी से, अभीष्ट की प्राप्ति को गोघृत से तथा भूमि भवन एवं वाहन की प्राप्ति को शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए।

पीड़ा के निवारण के लिए ये करें

यदि जन्म कुंडली में सूर्य से संबंधित कष्ट या रोग हो तो श्वेतार्क के पत्तों को पीस कर गंगाजल में मिलाकर रुद्राभिषेक करें। चंद्रमा से संबंधित कष्ट या रोग हो तो काले तिल को पीस कर गंगाजल में मिलाकर, मंगल से संबंधित कष्ट या रोग हो तो अमृता के रस को गंगाजल में मिलाकर, बुध जनित रोग या कष्ट हो तो विधारा के रस से, गुरु जन्य कष्ट या रोग हो तो हल्दी मिश्रित गोदुग्ध से, शुक्र से संबंधित रोग एवं कष्ट हो तो गोदुग्ध के छाछ से, शनि से संबंधित रोग या कष्ट होने पर शमी के पत्ते को पीस कर गंगाजल में मिलाकर, राहु जनित कष्ट व पीड़ा होने पर दूर्वा मिश्रित गंगा जल से, केतु जनित कष्ट या रोग होने पर कुश की जड़ को पीसकर गंगाजल में मिश्रित करके रुद्राभिषेक करने पर कष्टों का निवारण होता है। साथ ही समस्त ग्रह जनित रोग का समन होता है।

इस बात का रखें ध्यान

शिव मंदिर में व्रती को चाहिए कि वह विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक कर दूसरे दिन सूर्योदय के बाद काले तिल, त्रिमधु युक्त पायस एवं नवग्रह समिधा से हवन कर एक सन्यासी को भोजन कराकर स्वयं पारणा करें। शिवलिंग पर चढ़ाई गयी कोई भी वस्तु जनसामान्य के लिए ग्रहण करने के लिए नहीं है। अपितु अलग से मिष्ठान व फल आदि का भोग लगाकर उसे वितरण कर स्वयं भी ग्रहण करना चाहिए।

भव्य श्रृंगार किया जाएगा

मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्यागिरि ने बताया कि महाशिवरात्रि के पर्व पर सूर्योदय से पहले बाबा का भव्य श्रृंगार और महाआरती होने के बाद कपाट सुबह 3:30 बजे भक्तों के दर्शनों के लिए खोल दिये जाएंगे। दर्शन के लिए महिलाओं व पुरुषों की लाइन की अलग-अलग व्यवस्था रहेगी। वहीं, महादेव का दुग्धाभिषेक और जलाभिषेक बाहर से ही करने की अनुमति रहेगी। भक्तों में बाबा का प्रसाद भी वितरित किया जायेगा। सुरक्षा के लिए मंदिर के सेवादार भी मुस्तैद रहेंगे।

सुबह होगी भस्म आरती

राजेंद्रनगर स्थित महाकाल मंदिर के अतुल मिश्रा ने बताया कि सात मार्च को हल्दी-मेहंदी कार्यक्रम, आठ मार्च मंदिर के कपाट खोले जाएंगे, दो बजे रुद्राभिषेक के बाद सुबह 4 बजे भस्म आरती होगी। इसके बाद 4-12 बजे तक पट खुले रहेंगे। वहीं, 12:30 बजे से 5 बजे तक महारुद्राभिषेक होगा। रात में महाआरती और महाभोग लगेगा। वहीं, चौक स्थित कोनेश्वर महादेव मंदिर के राजीव मेहरोत्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि पर महादेव का दूध, दही, घी, शक्कर आदि से अभिषेक किया जाएगा। साथ ही गेंदा व गुलदाऊदी से मंदिर को सजाया जाएगा। साथ ही महाआरती का भी आयोजन होगा। जबकि, मां पूर्वी देवी में एक हजार पंचमुखी दियों से मंदिर को रौशन किया जाएगा।