- ईको सिस्टम को संतुलित रखने वाले जीव हो रहे हैं लुप्त

- गंगा को 85 प्रतिशत तक साफ रखते हैं ये जीव जंतु

- दस से बीस प्रतिशत ही रह गया गंगा की सफाई का सहारा

- सोलह कोच की साइंस एक्सप्रेस ने किया गंगा के अशुद्ध होने का दावा

swati.bhatia@inext.co.in

Meerut गंगा तेरा पानी अमृत गाया जाने वाले गीत का महत्व अब शायद कम होने लगा है। क्योंकि आज जीवनदायिनी गंगा नदी पापियों के पाप धोते-धोते खुद अशुद्ध हो चली है। जिसका कारण विलुप्त होते पक्षियों और जीवों को बताया जा रहा है। क्या आप जानते हैं कि ऐसे जीव जंतु दस प्रतिशत से भी कम रह गए हैं। जिनसे लगभग 8भ् प्रतिशत गंगा का पानी साफ होता है। वहीं कुछ पौधे और जीव ऐसे भी हैं जो इको सिस्टम को बनाएं रखने में भी बेहद मददगार साबित होते हैं। बता दें कि इन जीवों के लुप्त होने से जीवनदायिनी गंगा का पानी भी मैला हो चला है।

गायब हो गई वाटर क्लीनर डॉल्फिन

वाटर क्लीनर डॉल्फिन जो अब इंडिया में अब केवल एक हजार की ही संख्या में रह गई है। जानते हैं कि पहले यही संख्या लगभग दस हजार 880 के आसपास थी। लगभग दस से पंद्रह साल पहले तक तो ये नदियों को साफ रखने काम करती थीं। इसी वजह से डॉल्फिन को सांइस ने वाटर क्लीनर फिश का नाम दिया था। लगभग ब्0 प्रतिशत तक पानी को क्लीन करने में और फ्0 प्रतिशत इको सिस्टम को कंट्रोल करने में इस फिश का सहयोग रहता था। लेकिन आज यह दस प्रतिशत भी नहीं रह गई हैं।

घडि़याल करता है 7भ् प्रतिशत गंगा साफ

7भ् प्रतिशत तक गंगा को साफ रखने वाले घडि़याल अब मानों नाममात्र के ही रह गए हैं। देश में केवल इनकी संख्या अब ब् हजार ही रह गई है। जो शायद कभी ब्0 हजार के आसपास थी। घडि़याल जो छोटे जीवों और सड़ी गली चीजों को खाकर गंगा के पानी को साफ रखने में सहयोग करता है। लेकिन विलुप्त होते घडि़याल के कारण गंगा का पानी गंदा होने लगा है। विज्ञान भी ऐसा मानता है कि गंगा को साफ रखने में इस घडि़याल का बड़ा योगदान है।

फ्रेश वाटर टर्टल हो गए गायब

गंगा को साफ करने वाले क्भ् तरह के टर्टल जो नदी के गारबेज, डैड एनिमल्स, सड़े गले पदार्थो को खाकर जल को 8भ् प्रतिशत तक क्लीन करने में सहयोग देते हैं। वह भी अब मात्र बीस प्रतिशत ही रह गए हैं। रिसर्च में सामने आया है कि फिशिंग नेट के बढ़ते प्रचलन ने ही इन फ्रेश वाटर टर्टल को लुप्त कर दिया है। जिसके भयंकर परिणाम ही है जो जीवनदायिनी गंगा का पानी अशुद्ध होने लगा है।

एनवायरमेंट सेफ्टी में भी है बड़े सहयोगी

गंगा को साफ रखने में एक बड़ा सहयोग जीवों का है। तो वातावरण को सेफ रखने में भी यही जीव एक बड़ी जिम्मेदारी निभाते हैं। इको सिस्टम को कंट्रोल रखने वाला सारस क्रेन का बड़ा सहयोग है। वह धरती पर रहने वाले कीट पतंगों, सड़े गले पदार्थो को खाकर लगभग भ्0 प्रतिशत पर्यावरण सेफ करता है। यह अपने प्रदेश का स्टेट पक्षी भी है। इसकी ऊंचाई लगभग छह फुट ऊंची होती है।

क्या कहते हैं जानकार

काफी जीव-जंतु ऐसे हैं जो गंगा और हमारी विभिन्न नदियों के साथ ही इको सिस्टम को भी कंट्रोल करते हैं। लेकिन वह अब गायब होने लगे हैं। जिसके परिणाम काफी भयंकर होने लगे हैं।

दिनेश कुमार, राजस्थान, प्रोजेक्ट कम्नीकेटर, साइंस एक्सप्रेस

गंगा को साफ रखने में लगभग 8भ् प्रतिशत सहयोग घडि़याल व फ्रेश वाटर टर्टल का है। मगर वह अब गायब से ही हो गए हैं। यही कारण है कि गंगा नदी अशुद्ध होने लगी है।

अर्चना, हिमाचल, स्टाफ, साइंस एक्सप्रेस

डॉल्फिन, घडि़याल और टर्टल यहीं सब मिलकर गंगा नदी को साफ रखने का काम करते आए हैं। मगर गंगा के अशुद्ध होने का मेन कारण इनकी घटती संख्या है।

ईशान, बंगलुरू, प्रोजेक्ट कम्नीकेटर, साइंस एक्सपे्रस

इको सिस्टम को कंट्रोल करने व पानी को साफ रखने में सबसे बड़ा सहयोग जीव जंतुओं का होता है।

राहुल बोरा, आसाम, स्टाफ, साइंस एक्सपे्रस

बच्चों ने जाना पर्यावरण को

सोलह कोच की सांइस एक्सप्रेस में सिटी के बच्चों ही नहीं बल्कि विभिन्न लोगों ने जीव जंतुओं से जुड़ी जानकारी ली। एक्सपे्रस में पहुंचे विभिन्न स्कूलों के बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था। गंगा को साफ रखने में किसका बड़ा योगदान है। भारत में कितने क्भ् तरह के टर्टल पाए जाते हैं। संसार का सबसे बड़ा पक्षी कौन है। ट्रेन में मौजूद प्रशिक्षकों ने बच्चों को बहुत सारी जानकारी दी। ये ट्रेन केवल ख्ख् अगस्त तक ही मेरठ में रहेगी। फिर नजीबाबाद के लिए रवाना हो जाएगी। ट्रेन कैंट स्टेशन पर आई हुई है।