मेरठ (ब्यूरो)। शहर में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। वहीं बीते रैपिड कॉरिडोर के निर्माण कार्य के चलते पॉल्यूशन के लेवल में और बढ़ोतरी हो रही है। बावजूद इसके इसे कंट्रोल करना तो दूर इसे कम करने के लिए कोई बड़े प्रयास नहीं किए जा रहे हैैं। हालांकि एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने हाल ही में जिले में उद्योगों में संचालित हो रहे डीजल जनरेटर बंद करने आदेश जारी किए थे। मगर मोहकमपुर और परतापुर इंडस्ट्रियल एरिया में आदेशों की अनदेखी साफ देखी जा सकती है। इतना ही नहीं, हर साल की तरह बीते महीनों में बड़े लेवल 31 विभागों ने मिलकर करीब 27 लाख पौधों का रोपण भी किया था। मगर उनकी देख-रेख न होने के चलते बीते तीन सालों में करीब 9 लाख पौधे बर्बाद हो गए हैैं। मगर अब मेडा ने शहरवासियों को पॉल्यूशन से निजात दिलाने और हरियाली का दायरा बढ़ाने के लिए शहर के बीचोंबीच एक घना जंगल तैयार करने की योजना बनाई है। यह घना जंगल पॉल्यूशन पर वार कर आबोहवा को शुद्ध करेगा। साथ ही यहां योग, मेडिटेशन और फव्वारों के बीच मार्निंग वॉक की सुविधा भी लोगों को मिलेगी।

आठ हजार वर्ग मीटर
दरअसल, एमडीए ने वेदव्यासपुरी में आठ हजार वर्ग मीटर में डेंस फॉरेस्ट (घना जंगल) विकसित करने की योजना बनाई है। इस जंगल का सबसे ज्यादा लाभ परतापुर, दिल्ली रोड, शताब्दीनगर और रिठानी क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। साथ ही इससे दिल्ली रोड पर प्रदूषण काफी हद तक कम हो जाएगा। क्योंकि दिल्ली रोड पर रैपिड कॉरिडोर के निर्माण कार्य के चलते प्रदूषण स्तर लगातार बढ़ रहा है और आने वाले सालों में प्रदूषण की समस्या और बढ़ सकती है।

मियावाकी से विकसित होगा
इस जंगल को जापानी तकनीक मियावाकी से विकसित किया जाएगा। इस तकनीक के तहत पास-पास झुंड के रूप में पौधरोपण होता है, जो बाद में घने जंगल का रूप लेता है। यह जंगल पूरी तरह से विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधों और फूलों से हराभरा होगा। इसके अलावा इस जंगल का प्रमुख आकर्षण इस जंगल में लगे औषधीय और फलदार पेड़ रहेंगे।

मेडिटेशन के लिए उपयुक्त
इस जंगल की खासियत रहेगी कि यहां पर्यावरण के साथ-साथ प्राकृतिक शांति का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इस जंगल में प्राकृतिक माहौल के बीच लोग मेडिटेशन का लाभ भी उठा सकेंगे। इसके लिए बकायदा इस जंगल में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा भी लगाई जाएगी। कुल-मिलाकर जंगल का माहौल लोगों को योग-साधना समेत प्राणायाम के लिए प्रेरित करेगा। वॉकिंग ट्रैक के साथ-साथ इस सबकी सुविधा भी लोगों को यहां मिलेगी।

यह बहुत ही अच्छी योजना है। बढ़ते पाल्युशन के बीच शहर में इस तरह के जंगल की जरूरत भी है। जिससे शुद्ध हवा लोगों को मिल सके।
दीपक

दिल्ली रोड पर रैपिड कॉरिडोर के निर्माण कार्य के चलते हरे पेड़ व हरियाली नष्ट हो चुकी है। इस वन से हरियाली में वृद्धि होने के साथ ही प्रदूषण भी कम होगा
वसीम

एकमात्र संजय वन के विकल्प के तौर पर इस जंगल का लोग प्रयोग कर सकेंगे। संजय वन का अधिकतर हिस्सा रैपिड स्टेशन के चलते प्रभावित हो चुका है।
आशुतोष

शहर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण कम करने और हरियाली के दायरे को बढ़ाने के लिए वेदव्यासपुरी में मियावाकी तकनीक से डेंस फॉरेस्ट विकसित किया जाएगा।
विजय कुमार, नगर नियोजक मेडा