देहरादून (ब्यूरो) ई वेस्ट आम लोगों के साथ पर्यावरण के लिए कितना नुकसानदायक है, इस बात से सभी वाकिफ हैं। लेकिन, इसके बावजूद भी अक्सर घरों, गली-मोहल्लों या फिर कूडें के डंपिंग जोन में ई-कचरा आसानी से नजर आ जाता है। इसको देखते हुए कैंट बोर्ड दून ने एक निजी कंपनी अटैरो के साथ टाइ-अप किया है। करार के मुताबिक कैंट बोर्ड अपने क्षेत्र में लोगों के घरों तक कंपनी के कार्मिकों के साथ जाएगा और वहां से इलेक्ट्रिॉनिक कचरा पिकअप कर साथ में ले जाएगा। खास बात ये है कि बदले में कैंट बोर्ड कंपनी के जरिए ई-कचरा देने वालों को नकद धनराशि भी मुहैया कराएगा। मतलब साफ है कि आप ई-वेस्ट को कैंट बोर्ड को दे रहे हैैं, तो वह खाली नहीं जाएगा। बल्कि, आपको पैसे भी मिलेंगे।

डेटा लीक न हो, रखा जाता है ख्याल
कैंट बोर्ड के अनुसार कैंपेन के लिए संडे को चुना गया। कारण, छुट्टी के दिन लोग घर पर रहते हैं और साफ-सफाई भी करते हैं। इसी दिन कैंट बोर्ड ने आर्मी के साथ सिविल एरियाज में शुरू किए अपने स्पेशल ड्राइव के तहत बड़ी मात्रा में ई-वेस्ट को एकत्रित कर कंपनी को सौंपा। बताया गया है कि कैंट बोर्ड ने जिस निजी कंपनी के साथ करार किया है, उसका रुड़की में बड़ा प्लांट है, जहां पर ई वेस्ट को सबसे पहले डिस्ट्रॉय किया जाता है। जिससे किसी भी प्रकार को डेटा लीक न हो सके। उसके बाद जरूरत के मुताबिक रि-साइकिलिंग की जाती है।


ई-कचरे पर मिल रही धनराशि
-स्मार्ट फोन--10 से 100 रुपए
-एयर कंडीशन--1600 रुपए तक
-टीवी--40 से 50 रुपए तक
-एलसीडी--50 से 650 तक
-लैपटॉप--800 रुपए तक
-रेफ्रिजरेटर--550 रुपए तक