देहरादून (ब्यूरो)। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए इस गांव की कुछ जमीन 2018 में एक्वायर की गई थी। 2019 में मुआवजा दिया गया। काम शुरू हुआ तो 9 मकान भी तोड़े गये। कई खेत रेलवे लाइन 135 मीटर गहराई तक काटे गये। लोगों ने मुआवजे की राशि से मकान बनाये, लेकिन अब ये मकान भी दरकने लगे हैं। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने अटाली गांव का रियलिटी चेक किया तो पाया कि गांव में लोगों के घर ही नहीं रेलवे लाइन के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार भी दरक गई है और इस दीवार के ऊपर के खेतों में दो से तीन फीट चौड़ी दरारें आ गई हैं। लोगों के घर भी दरक रहे हैं।

गांव पहुंचना भी कठिन
अटाली गांव बदरीनाथ हाईवे से करीब 1 किमी ऊपर है। गांव का रास्ता अब बंद है। टीन की चद्दरों से दोनों तरफ से कवर करके एक पतला सा रास्ता रेलवे ने गांव जाने के लिए बनया है। आगे जाकर लोहे की सीढ़ी गांव तक पहुंचने के लिए लगाई गई है। बताया गया कि यहां रेलवे स्टेशन बनेगा। यह एक खुला स्टेशन होगा। गांव के खेतों को करीब 135 मीटर नीचे तक खोद कर स्टेशन बनाया जा रहा है और स्टेशन के ठीक बाद रेलवे लाइन फिर से टनल के अंदर चली जाएगी।

रेलवे के सेफ्टी दीवार भी फटी
गांव जाने के इस कवर्ड रास्ते से एक जगह रेलवे की सुरक्षा दीवार दिखती है। दीवार में एक बड़ी दरार है। गांव में पहुंचने पर पता चला कि इस दीवार के ठीक ऊपर गांव के खेतों में भी दरार है और यह दरार चौड़ी होती जा रही है। सीढ़ी से ऊपर चढ़ते ही गांव शुरू होता है और सबसे पहला घर जयसिंह का है। जय सिंह के घर में की कई दीवारें चटक गई हैं और आंगन में भी दरार है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ये दरारे आई। शिकायत की गई तो रेलवे के कर्मचारियों ने दरारों पर सीमेंट की पट्टियां और लाल निशान लगाये, यह देखने के लिए कि दरारें चौड़ी हो रही हैं या नहीं, लेकिन एक दिन बाद ही सीमेंट की पट्टियों में भी दरारें आ गई हैं।

खेत भी हो गये तबाह
निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन की सुरक्षा दीवार खत्म होते ही टिन की चद्दरें लगाई गई हैं और जिस जगह रेलवे की सेफ्टी वाल में दरार आई है, उसके ठीक ऊपर खेतों में भी दरारें हैं। ये दरारें ऊपर तक चली गई हैं। ठीक ऊपर के घर में कृष्णा चौहान का घर है। कृष्णा चौहान बताते हैं कि उनके काफी खेत तो रेलवे ने एक्वायर कर दिये थे। जो अब स्टेशन के लिए काट दिये गये हैं, लेकिन जो खेत बच गये थे, उनमें भी दरारें आ गई हैं। अब तो खेतों में जाने में भी डर लग रहा है।

सूख गये पानी के स्रोत
अटाली गांव के दोनों ओर पानी के दो नेचुरल स्रोर्स थे। पानी की जरूरत पूरी करने के साथ ही इन स्रोतों से अटाली के खेतों की सिंचाई भी होती थी, लेकिन दोनों पानी के स्रोत सूख गये हैं। अब दूर के किसी स्रोत से पाइप लाइन के जरिये गांव में पानी पहुंचाया जा रहा है। जय सिंह कहते हैं कि अब उस स्रोत का पानी भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। खास बात यह है कि निर्माणाधीन रेलवे स्टेशन और उसके आसपास लगातार भारी मात्रा में पानी रिस रहा है।