देहरादून (ब्यूरो) दरअसल, बीती 26 फरवरी शाम की बात है। जब, आदमखोर लैपर्ड ने गल्जवाड़ी इलाके में 9 वर्षीय बच्चे पर हमला बोल दिया। जिससे बच्चे की मौत हो गई। तब से लेकर अब तक इलाके में दहशत का माहौल है। विभाग की ओर से लैपर्ड को आदमखोर घोषित करते हुए मार गिराने के आदेश दिए हैं। तब से लेकर अब तक वन विभाग के कर्मियों की इलाके में तैनाती की गई है। लेकिन, लैपर्ड है कि नजरों से लगातार ओझल रहा है। हालांकि, बताया जा रहा है कि गल्जवाड़ी इलाके में लगाए गए ट्रैप कैमरों में रात को इस लैपर्ड का मूवमेंट आंशिक तौर पर दिखाई दिया। लेकिन, उसके बाद वह कहीं भी देखने में नहीं आ पा रहा है।

गुर्जर परिवार आईटी पार्क शिफ्ट
वन विभाग के कर्मचारियों ने इलाके में ही दिन-रात डेरा जमाए हुए हैं। खुद एसडीओ और आरओ गल्जवाड़ी इलाके में स्थानीय गुर्जर की छानी (छप्पर) में कैंप किए हुए हैं। वहीं, इलाके से गुर्जर समुदाय के करीब 5 परिवारों को आईटी पार्क उनके डेरों में शिफ्ट कर दिया गया है।

पिंजरे ले जाने में छूट गए पसीने
जिस इलाके में घटना घटी, वहां पर पैदल जाने तक रास्ता नहीं है। यहां पिंजरे पहुंचाने के लिए विभागीय कर्मचारियों को पसीना बहाना पड़ा। बताया, जा रहा है कि जिस जमीन पर ये गुर्जर परिवार निवास करते थे, वह निजी प्रॉपर्टी है। जिसको गुर्जर समुदाय को लीज पर दिया गया था।

बंदूक के साए में गश्त
घटना वाले क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारी बंदूक के साए में अपना आना-जाना कर रहे हैं। पूरी रात जाग रहे हैं और शिफ्ट में ड्यूटी कर रहे हैं। इसमें खुद डीएफओ दून, गढ़वाल चीफ और कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट के साथ अन्य अधिकारी मूवमेंट पर हैं। मसूरी डिविजन की ओर से भी कर्मचारियों की तैनाती का भरोसा दिया गया है।

किमाड़ी इलाके से लोगों को हटाया
गल्जवाड़ी के जिस क्षेत्र में ये घटना घटी, उसके रास्ते में किमाड़ी क्षेत्र पड़ता है। जहां पर दून शहर से लोगों का घूमने के लिए आना-जाना लगा रहता है। लैपर्ड के खतरे को देखते हुए वन विभाग के कर्मचारियों की ओर से घूमने के लिए आने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है। उन्हें वहां से हटाया जा रहा है।

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