देहरादून (ब्यूरो) मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में रेजीडेंशियल नक्शा स्वीकृत करने के लिए रोड की न्यूनतम चौड़ाई न्यूनतम 12 मीटर रखी गई है। कॉमर्शियल के लिए भी 30 से लेकर 80 व 90 फीट तक सड़क की चौड़ाई निर्धारित की गई है। आम पब्लिक की आपत्ति है कि इस नियम के तहत शहर के फुटहिल एरियाज में आवास बनाना संभव नहीं हो पाएगा। शहर के ऊंचाई वाले इलाकों में 12 और 15 फीट तक की सड़कें हैं। ऐसे में यहां 30 से लेकर 90 फीट तक सड़कें कहां से आएंगी। मास्टर प्लान लागू होने के बाद सड़कों की चौड़ाई मास्टर प्लान के अनुसार न होने पर मकानों के नक्शे स्वीकृत नहीं हो पाएंगे। इतनी चौड़ी सड़कें तो कई जगहों पर मैदानी इलाकों में भी नहीं है। मैदानों में थोड़ा गुंजाइश है, लेकिन हिल एरियाज में मैदानों के बराबर सड़क होना संभव नहीं है।

कई जगह नहीं हो पाएंगे नक्शे पास
राजपुर रोड पर जाखन से ऊपर कुठालगेट तक का फुट हिल एरिया हिल्स की तरह हैं। यहां पर 30-30 मीटर तक रोड मिलना संभव नहीं है। यदि मास्टर प्लान में ये ड्राफ्ट में निर्धारित किए रोड के नियम में बदलाव नहीं किया गया तो हिल एरिया में आम पब्लिक को सिर छिपाने के लिए जमीन और मकान नहीं मिल पाएगा। यही स्थिति नवादा, सहस्त्रधारा रोड, नेहरू ग्राम, आदि क्षेत्रों की भी है। लोग फुटहिल एरिया में हिल्स की तरह सड़क का प्रावधान करने की मांग की है। शहर में जहां डेवलपमेंट की संभावनाएं हंै, वहां के लिए नियम जटिल बनाए जा रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि हिल्स में 60 मीटर चौड़ी सड़क संभव नहीं है। जब नक्शे स्वीकृत नहीं होने हैं, तो मकान कैसे बनाएंगे।

फॉल्ट लाइन पर भी संशय
एससी घिल्डियाल, विभा पुरी दास, अनूप नौटियाल, विकी रावत, और गणेश चंद्र मधवाल ने संयुक्त रूप से आपत्ति जताई है कि सिटी के कई इलाकों में फॉल्ट लाइन गुजर रही है। इनके नीचे बड़ी संख्या में आवास बने हैं। इस बारे में पब्लिक को कोई जानकारी नहीं है। फॉल्ट लाइन पर जो निर्माण पहले हो चुके हैं, उनके प्रोटेक्शन के लिए कोई रेट्रोफिटिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। इसकी सेफ्टी ऑडिट कौन से महकमा करेगा, इसकी भी मास्टर प्लान में कोई जानकारी नहीं है।

पार्क और खुले स्थान चिन्हित नहीं
लोगों का कहना है कि मास्टर प्लान में आवासीय भू उपयोग 60 परसेंट से भी अधिक प्रस्तावित है। मिश्रित भू-उपयोग में भी 9 परसेंट से अधिक प्रस्तावित है। जिसमें लगभग 50 आवासीय है। 62 परसेंट आवासीय भू-उपयोग में कहीं भी पार्क और खुले स्थान नहीं दिर्शाए गए हैं।

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