- दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के ऑनलाइन पोल में दिखी लोगों की नाराजगी

- 75 परसेंट ने कहा स्मार्ट सिटी के काम खराब, 8 परसेंट ने बोले, सुधार की गुंजाइश

देहरादून,

देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए किये जा रहे काम दूनाइट्स को पसंद नहीं आ रहे हैं। सिटी के 83 परसेंट लोग शहर में हो रहे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के कामों से संतुष्ट नहीं हैं। 75 परसेंट लोगों का साफ तौर पर कहना है कि सिटी को स्मार्ट बनाने के लिए जो काम किये जा रहे हैं, वे खराब हैं। जबकि 8 परसेंट लोगों का कहना है कि इन कामों में सुधार किया जा सकता था।

सोशल मीडिया पोल

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने स्मार्ट सिटी कार्यो को लेकर दूनाइट्स की राय लेने के लिए ट्विटर पर यह पोल किया। इस पोल में लोगों से सवाल किया गया था कि देहरादून में किये जा रहे स्मार्ट सिटी के कामों के बारे में आप क्या कहेंगे। इस पोल में लोगों को चार ऑप्शन दिये गये थे- बहुत शानदार, संतोषजनक, खराब और सुधार की संभावना।

बहुत शानदार को एक भी वोट नहीं

पोल में दिये गये पहले ऑप्शन बहुत शानदार को एक भी वोट नहीं मिला। जबकि 17 परसेंट लोगों ने स्मार्ट सिटी के कामों को संतोषजनक माना। सबसे ज्यादा वोट थर्ड ऑप्शन यानी खराब को मिले। 75 परसेंट लोगों ने साफ तौर पर कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत किये जा रहे काम खराब हैं। 8 परसेंट लोग यह भी मानते हैं कि जो काम किये गये हैं, उनमें सुधार की संभावना बनी हुई है।

इन प्रोजेक्ट पर हो रहा काम

दून में पिछले करीब दो वर्षो से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के काम चल रहे हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण काम स्मार्ट रोड का चल रहा है। राजपुर रोड, चकराता रोड, गांधी रोड और ईसी रोड और हरिद्वार रोड के कुछ हिस्से को स्मार्ट रोड के रूप में डेवलप किया जाना है। लेकिन कई महीनों से लगातार इस सड़कों पर खुदाई होने से दूनाइट्स को भारी परेशानी हो रही है। पलटन बाजार में किये गये सुधार कार्यो से भी लोग संतुष्ट नहीं हैं।

क्या कहते हैं लोग

स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ पैसे की बर्बादी हो रही है। दो साल से सड़कों को खोद रहे हैं, आज तक कुछ हासिल नहीं हुआ है, आगे कुछ होगा, हमें तो नहीं लग रहा है।

गिरधर पंडित, सीनियर सिटीजन

एक अच्छे भले शहर को खोदकर स्मार्ट सिटी बनाने का दावा किया जा रहा है। उदाहरण पलटन बाजार का है। जहां पहले डामर थी वहां टाइल्स बिछा दी हैं, जो लोगों को परेशान कर रही हैं। यही है स्मार्टनेस।

मनोज कुंवर, स्टूडेंट

स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ हल्का है और बजट ठिकाने लगाने की कोशिश है। इससे ज्यादा कुछ नहीं होना है। होना होता तो इन दो सालों को कुछ तो नजर आता। गड्ढों के अलावा हमें तो कुछ नहीं दिख रहा।

अखिलेश डिमरी, व्यवसायी

स्मार्ट सिटी बनानी ही तो किसी नई जगह पर नये सिरे से बेहतर प्लानिंग के साथ कुछ नया करते। देहरादून सिटी पहले से स्मार्ट थी। सफाई और जल निकासी जैसी सुविधाएं बढ़ा देते बस। अब तो बस सड़कें खोद रहे हैं, इससे ज्यादा कुछ नहीं हो रहा।

भार्गव चंदोला, एक्टिविस्ट