देहरादून (ब्यूरो) नगर निगम वर्ष 2017 से दून शहर में वेंडिंग जोन की बात करते आ रहा है। वर्ष 2019 में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मसूरी बाईपास के छह नंबर पुलिया पर यकीनन सिंचाई विभाग की जमीन पर एक वेंडिंग जोन की शुरुआत की थी। उस दौरान बड़े-बड़े वादे किए गए। लेकिन, एक नहीं तीन-तीन सरकारें बदल गईं। वेंडिंग जोन जमीं पर नहीं उतर पाए। कारण जो भी रहे हों। लेकिन, सिटी में करीब सात वर्ष पहले वेंडिंग जोन की स्थिति व व्यवस्थाएं थी, आज भी वही नजर आती हैं। कई बार मामला नगर निगम बोर्ड तक पहुंचा। बावजूद इसके वेंडिंग जोन का मसला आगे नहीं बढ़ पाया। जाहिर है कि एक बार फिर से यह मुद्दा गरमाने लगा है। कारण, सिटी में लगातार ट्रैफिक का प्रेशर बढ़ रहा है। नतीतजन, सिटी के तमाम इलाकों में मौजूद वेंडर्स पर कई बार आरोप लगते हैं कि उनकी वजह से ट्रैफिक बाधित हो रहा है।

वेंडिंग जोन लटकने की वजह
ऐसा नहीं है कि नगर निगम प्रशासन की ओर से वेंडिंग जोन को लेकर प्रयास नहीं किए गए। लेकिन, निगम के पास जमीन न होने के कारण वेंडिंग जोन लटक गए। हालांकि, नगर निगम के पास सिटी के आउटर इलाकों में जमीन मौजूद है। लेकिन, दूर होने के कारण वेंडर्स इसमें इंट्रेस्ट लेते नहीं दिखे।

6 नंबर पुलिया से भी दिक्कत
वर्ष 2019 में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र रावत ने छह नंबर पुलिया में बेंगलुरू की तर्ज पर स्मार्ट वेंडिंग जोन की शुरुआत की, ये जोन अब तक संचालित हो रहा है। लेकिन, ये वेंडिंग जोन अब ट्रैफिक के लिए मुसीबत बन गया है। यहां तक कि कुछ वर्षों पहले एसपी ट्रैफिक ने इसको लेकर पत्राचार भी किया। कारण, जिस वक्त इस वेंडिंग जोन की शुरुआत हुई, उस वक्त यहां सीमित संख्या में वेंडर्स को जगह आवंटित की गई। लेकिन, अब ये आंकड़ा यहां डेढ़ सौ से ज्यादा पहुंच गया है। यहां तक कि इस वेंडिंग जोन से सड़क भी संकरी हो गई है। इस वेंडिंग जोन को नगर निगम ने रोल मॉडल तक बताया था।

टेंडर भी हुए थे
नगर निगम ने सिटी के कुछ इलाकों में वेंडिंग जोन शुरू करने के लिए टेंडर भी फ्लोट किए थे। लेकिन, स्थानीय लोगों के विरोध के बाद बात आगे नहीं बढ़ पाई और वेंडिंग जोन का मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया। इनमें आईटी पार्क और नालापानी इलाके शामिल रहे।

कैंट बोर्ड का भी यही हाल
नगर निगम के अलावा कैंट बोर्ड ने भी वर्ष 2020 में प्रेमनगर इलाके में वेंडिंग जोन बनाने की तैयारी शुरू की थी। बाकायदा, वेंडर्स से आवेदन भी मांगे गए, टोकन मनी तक ली गई। लेकिन, यहां भी बात नहीं बनी। मामला अब तक अधर में लटका हुआ है।

पीपीपी मोड पर भी प्रस्ताव
वेंडिंग जोन को लेकर जब निवर्तमान बोर्ड के पार्षदों ने सवाल-जवाब किए। उसके बाद निगम प्रशासन के सामने पीपीपी मोड पर वेंडिंग जोन संचालित करने का भी प्रस्ताव आया। इसके लिए 10 स्थानों को चयन तक किया गया है। इसमें भी बात आगे नहीं बढ़ पाई।

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