कानपुर। भारतीय मूल के अभिजीत विनायक बनर्जी को वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए उनके प्रयोगात्मक दृष्टिकोण के लिए स्वीडिश अकादमी ने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया है। अमेरिका में रह रहे नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत का भारत से गहरा कनेक्शन है। वह भारत में ही पैदा हुए हैं। अभिजीत विनायक बनर्जी का जन्म  21 फरवरी, 1961 में हुआ।

दिल्ली के जेएनयू से एमए की पढ़ाई पूरी की

अभिजीत विनायक बनर्जी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से शिक्षा पूरी की। एमआईटी यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के मुताबिक अभिजीत विनायक बनर्जी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से 1981 में बीएससी की डिग्री हासिल की। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से 1983 में एमए की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1988 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी कंप्लीट की।

एमआईटी में प्रोफेसर हैं अभिजीत बनर्जी

अभिजीत विनायक बनर्जी वर्तमान में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी' (एमआईटी) में इकाेनामिक के फोर्ड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर हैं। अभिजीत विनायक बनर्जी ने ही एस्तेर डुफ्लो और सेंथिल मुलैनाथन के साथ अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब की स्थापना की है। उन्होंने इस लैब के निदेशक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली।  

अभिजीत इन्फोसिस प्राइज के विनर रहे

अभिजीत विनायक बनर्जी ब्यूरो ऑफ रिसर्च इन द इकोनॉमिक एनालिसिस ऑफ डेवलपमेंट, एनबीईआर के एक रिसर्च एसोसिएट, एक सीईपीआर के रिसर्च फेलो, कील इंस्टीट्यूट के इंटरनेशनल रिसर्च फेलो, अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज एंड इकोनोमेट्रिक सोसाइटी के और एक गुगेनहेम के फेलो रहे हैं। वह एक अल्फ्रेड पी स्लोन फेलो और इन्फोसिस प्राइज के विनर रहे हैं।

डाॅक्यूमेंट्री फिल्मों का डायरेक्शन भी किया

अभिजीत ने  कई आर्टिकल लिखें हैं। इसके अलावा चार किताबें भी लिखी हैं। इनकी लिखी किताबों में से एक पुअर इकोनॉमिक्स शामिल है, जिसने गोल्डमैन सैक्स बिजनेस बुक ऑफ द ईयर अवार्ड जीता। वह तीन और किताबों के एडीटर हैं। इसके अलावा इन्होंने दो डाॅक्यूमेंट्री फिल्मों का डायरेक्शन भी किया है। यह यूएन सेके्रटरी के पद-2015 डेवलपमेंट एजेंडा पर इमीनेंट पर्सन के हाईलेवल पैनल में भी शामिल रहे।

Posted By: Shweta Mishra

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