- ईद पर इस बार न जाएं दूसरों के घर, सोशल डिस्टेंसिंग का रखें ध्यान

Lucknow रमजानुल मुबारक में हर इबादत का सवाब रमजान के अलावा दिनों से कई गुना जियादा मिलता है। इस मुबारक माह की सबसे अहम इबादत रोजा है। फिर कुरान मजीद की तिलावत है। कुरान मजीद इसी मुबारक महीने में नाजिल किया गया। वहीं मौलाना निजामी ने बताया कि अब हमारे पास इस रमजान मे सिर्फ एक रात 29 रमजान जोकि 22 मई की रात होंगी। इसमें हम सब को रात भर जाग कर खुदा पाक की इबादत करना चाहिए और अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए। अवाम से अपील है कि अलविदा और ईद उल फित्र के सिलसिले में उलमा ने जो अपीलें की हैं उस पर हम सब को अमल करते हुए अपने घरों में ही ईद की नमाज अदा करनी है। न किसी से मिलने जाना है और न किसी को अपने घर में बुलाना है और न ही गले मिलना और न ही हाथ मिलाना है।

शिया हेल्पलाइन

सवाल- अगर ईद कोई तकलीद नहीं करता है तो उसकी इबादत का क्या हुक्म है।

जवाब- अगर कोई बालिगए आकिल आदमी तकलीद नहीं करता तो फौरन नियत करके मुजताहिद सव तकलीद करना होगी। वह तकलीद नहीं करेगा तो उसी सब इबादत कबूल नहीं होगी।

सवाल- ईद के दिन क्या कारोबार करना हराम है।

जवाब- ईद के दिन कारोबार करना हराम नहीं है।

सवाल- क्या ईद की रात जागना जरूरी है।

जवाब- रवायत से पता चलता है कि ईद की रात भी जागना और आमाल करना चाहिए।

सवाल- क्या ईद की नमाज वाजिब की नियत से पढ़ी जाएगी।

जवाब- ईद की नमाज गैबते इमाम मे मुसतहब है इसलिए कुरबत की नियत से पढ़ी जाएगी।

सवाल- क्या ईद की नमाज घर में पढ़ सकते हैं।

जवाब- ईद की नमाज घर मे पढ़ सकते हैं लेकिन मसजिद के सवाब से महरूम होगे।

सुन्नी हेल्पलाइन

सवाल- इस साल लॉकडाउन से हम बच्चे ईदगाह ईद की नमाज पढ़ने नहीं जा जायेंगे तो हम लोगों को ईदी कैसे मिलेगी।

जवाब- यह हकीकत है कि इस साल लॉकडाउन की वजह से कोई ईदगाह नमाज पढ़ने नहीं जा जायेगा, लेकिन बच्चे अपने बड़ों से ईदी अपने वालिदान के बैंक खाते में ऑनलाइन मंगवा सकते हैं।

सवाल- अगर ईद की नमाज में उस वक्त शरीक हुए जबकि पहली रकअत शुरू हो गयी तो तकबीरें कैसे कहें।

जवाब- अगर नमाज में उस वक्त शरीक हुए जब इमाम तकबीर कह चुका हो तो आप को नमाज में शरीक होकर तुरंत तकबीरें कह लेनी चाहिए।

सवाल- अगर ईद की नमाज से पहले जकात नहीं अदा की तो क्या हुक्म है।

जवाब- अगर रमजान में साल पूरा हो गया और जकात नहीं निकाल सके तो रमजान के बाद निकाल दें।

सवाल- घर में यह तरीका है कि सब भाई की तनख्वाह लाकर वालिदा को देते हैं जो घर का खर्च चलाती हैं। जब की जेवर और कुछ बचत की रकम हमारे पास होती है, तो क्या जकात मेरे जिम्मे फर्ज है या वालिदा के।

जवाब- अगर वह सोना और बचत की रकम इतनी हो कि अगर उसको बांटा जाये तो सब भाई निसाब के मालिक हो सकते हैं तो जकात वाजिब है वरना नहीं।

सवाल- एक गरीब शख्स की बीवी शादी के मौके पर 10 तोला सोना जेवरात की शक्ल में लायी है तो क्या शौहर के लिए जरूरी है कि हर हाल में उसकी जकात अदा करे।

जवाब- इन जेवरात की मालिक औरत है इसीलिए इन जेवरात की जकात बीवी के जिम्मे है, गरीब शौहर के जिम्मे नहीं।

कोट

लॉकडाउन का ध्यान रखें। अगर हम लोग महफूज और सेहतमंद रहे तो अगली बार धूमधाम के साथ ईद की खुशियां आपस में बांट सकेंगे। सभी से अपील है कि घर पर ही इबादत करें और ईद सादगी से परिजनों के साथ ही मनाएं। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें और दुआ करें कि यह संकट जल्द दूर हो।

ताहिर हुसैन, शीशमहल

Posted By: Inextlive

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