शहर के आधे से ज्यादा स्थानों से गायब मिले डस्टबिन

पुराने कूड़ेदान हो चुके हैं जर्जर, सड़क पर फैला रहता है कूड़ा

2015 में निगम ने प्लास्टिक के हरे और नीले रंग के डस्टबिन लगाए

2018 में निगम ने स्टील के नए स्टाइलिश कूडे़दान लगाए.

120 कूड़ा कलेक्शन वाहनों को लगाया था नगर निगम ने

नगर निगम शहर में करीब 1.5 करोड़ रुपये के डस्टबिन अब तक निगम लगवा चुका है.

1450 स्टील के डस्टबिन लगवाए गए थे शहर में

800 से अधिक डस्टबिन गायब हो चुके हैं शहर में अभी तक

10 साल से अधिक पुराने ग्रीन डस्टबिन हो चुके हैं कबाड़

146 अस्थाई खत्ताघर खुले हुए हैं इन दिनों शहर में

800 मीट्रिक टन से अधिक कूड़ा निकलता है शहर में रोजाना

9 करोड़ मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ बन गया है लोहियानगर में

Meerut. स्वच्छता सर्वेक्षण में अपनी जगह बनाने में जुटे नगर निगम को हर साल लाखों प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिल पा रही है. इसका सबसे प्रमुख कारण है शहर का सैकड़ों मीट्रिक टन कूड़ा, जो रोजाना शहर की गलियों से निकलता है और जिसके निस्तारण का निगम के पास कोई प्लान नहीं है. इस कूडे़ से शहर गंदा न हो इसके लिए निगम ने शहर में जगह-जगह डस्टबिन तो लगा दिए लेकिन इनमें से ज्यादातर डस्टबिन भी अब या तो चोरी हो चुके हैं या जर्जर हो चुके हैं. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने शहर के इन कूडे़दानों की स्थिति का जायजा लिया तो कूड़ेदान ढूंढने से मिले. इतना ही नहीं निगम के स्वच्छता सर्वेक्षण का सच भी सामने आ गया.

कूडे़दान से 120 वाहन ढो रहे कूड़ा

स्वच्छ भारत मिशन के तहत 2015 में हर निगम द्वारा प्लास्टिक के हरे और नीले रंग के डस्टबिन लगाए गए थे. इसमें एक में गीला तो दूसरे में सूखा कूड़ा डाला जाना था. मगर ये कूडे़दान सालभर में ही गुम हो गए थे. इसके बाद साल 2018 में निगम ने शहर की सुंदरता को ध्यान में रखते हुए स्टील के नए स्टाइलिश कूडे़दान लगाए. इन कूडे़दान से डोर टू डोर जाने वाली कूड़ा गाडि़यां ही कूड़ा ढोकर डंपिंग ग्राउंड में डालती हैं. इसके लिए नगर निगम ने 120 कूड़ा कलेक्शन वाहनों को लगाया था.

1.58 करोड़ हुए कूडे़ में बर्बाद

नगर निगम शहर में करीब डेढ़ करोड़ रुपये के डस्टबिन अब तक लगवा चुका है. पहली बार प्लास्टिक तो उसके बाद करीब 1450 स्टील डस्टबिन लगवाकर शहर को स्वच्छ रखने का प्रयास किया गया लेकिन दोनों बार ही योजना धड़ाम हो गई. आज शहर में करीब 800 से अधिक डस्टबिन गायब हो चुके हैं. जो लगे हुए हैं, उनमें से अधिकतर टूटे हुए हैं या कूडे़ से ओवरफ्लो हैं. इसके अलावा निगम के बडे़ ग्रीन डस्टबिन तो 10 साल से अधिक पुराने होने के कारण खुद कबाड़ हो चुके हैं. उनको उठाने में ही निगम का कूड़ा सड़क पर फैल जाता है.

कूड़ाघरों की संख्या भी नही कम

स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में कहीं पर भी कूड़ाघर नहीं होने चाहिए. ऐसे में निगम ने कुछ कूड़ाघरों को बंद कराकर सफाई कराई थी, लेकिन अभी भी दिल्ली रोड, लिसाड़ी गेट, बच्चा पार्क, खत्ता रोड, माधवपुरम सहित एक दर्जन स्थानों पर 146 अस्थाई खत्ताघर खुले हुए हैं, जहां कूडे़ का ढेर लगा रहता है.

मंगतपुरम व लोहियानगर में कूड़ा

शहर से प्रतिदिन 800 मीट्रिक टन से अधिक कूड़ा निकलता है. इसको मंगतपुरम के बाद गांवड़ी, कंकरखेड़ा और हापुड़ रोड पर लोहियानगर में डाला जा रहा था. बीते पांच साल में लोहियानगर में नौ करोड़ मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ बन गया है.

वीआईपी इलाकों तक सीमित सफाई

नगर निगम की नजर में शहर केवल वीआईपी इलाकों तक सीमित है इसलिए वीआईपी इलाके जैसे- शास्त्रीनगर, सिविल लाइन, गंगानगर, मेडिकल, मोहनपुरी, जागृति विहार, पटेल नगर, पल्लवपुरम, कंकरखेड़ा आदि सबसे अधिक साफ मोहल्लों में गिने जाते हैं. वहीं पुराने शहर के क्षेत्र अभी गंदगी से सरोबार हैं.

कूड़ा निस्तारण पर निगम की कवायद

2012 में गांवडी में कूड़ा डंपिंग ग्राउंड की कवायद शुरु हुई थी, इससे पहले मंगतपुरम में डंपिंग ग्राउंड पर निगम ने लगाया था कूडे़ का ढेर.

दिसंबर 2016 में शोलापुर की कंपनी को निगम बोर्ड बैठक में कूड़ा निस्तारण प्लांट का काम दिया था लेकिन यह प्रस्ताव अधर मे रहा.

जनवरी 2017 को तत्कालीन महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने गांवड़ी में कूड़ा निस्तारण प्लांट का शिलान्यास किया था.

जुलाई 2018 में लोहियानगर में कूड़ा डंपिंग ग्राउंड में कूड़ा डालने का काम शुरु किया गया.

नवंबर 2018 को शासन ने आइएल एंड एफएस कंपनी को कूड़ा निस्तारण के लिए चुना था.

दिसंबर 2018 में स्टील डस्टबिन लगाने की कवायद शुरू हुई, जिसके तहत 1400 से अधिक डस्टबिन शहर में लगाए गए.

हमारे पास कूड़ा निस्तारण प्लांट नहीं है इसलिए कूडे़ को डस्टबिन में एकत्र करने के बाद कूड़ा कलेक्शन गाडि़यों से डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाया जाता है. कुछ डस्टबिन चोरी हुए हैं उनकी एफआईआर भी कराई गई है. उनकी जगह पर नए कूडे़दान लगाए जाएंगे. कूड़े की कंपोस्टिंग भी शुरू की जा रही है इसलिए बच्चा पार्क पर मशीन भी लगाई गई है. कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने को लेकर दो कंपनियों का मामला हाई कोर्ट में लंबित है. हाईकोर्ट से स्टे आर्डर है.

डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, नगर आयुक्त