जमशेदपुर (ब्यूरो): सिटी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। शुरू से ही स्थिति बदहाल ही रही है। जब भी व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात होती है, उस वक्त राजनीति, बदइंतजामी या फिर गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण व्यवस्था या तो धरातल पर नहीं उतर पाती या धरातल पर उतरने के बाद दम तोड़ देती है। सिटी में ऐसे एग्जांपल भी मौजूद हैं। लोगों को कहना है कि प्रशासन चाहता ही नहीं कि शहर के लोगों को बेहतरीन ट्रांसपोर्ट व्यवस्था मिले। बार-बार बसों की खरीदारी कर सरकारी राशि और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2010 में भी सिटी में जवाहरलाल नेहरू नेशनल अर्बन रिनुअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत 4.66 करोड़ की लागत से 50 सिटी बसें खरीदी गई थीं। उसे भी एसएचजी को परिचालन के लिए दिया गया। लगभग 2 साल तक किसी तरह परिचालन के बाद सेवा बंद हो गई।

बसें हो गई हैं कबाड़

इसके बाद जिला प्रशासन दुबारा इन बसों का परिचालन शुरू नहीं करवा सका, या फिर उसने इस ओर दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब ये बसें बारीडीह बस डिपो में ही कबाड़ हो गई हैं।

जेएनएसी ने की तैयारी

सिटी की ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को सुधारने के लिए जिला प्रशासन एक बार फिर से तैयारी कर रहा है। शहर में एक बार फिर से सिटी बसों को कबाड़ बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमिटी (जेएनएसी) द्वारा सिटी बसों का परिचालन करने की तैयारी है और ये बसें एनजीओ के माध्यम से चलाई जाएंगी। जानकारी के मुताबिक 100 बसों का परिचालन जेएनएसी, मानगो, जुगसलाई, कपाली, आदित्यपुर क्षेत्रों में शुरू होगा। इन बसों को 15वें वित्त आयोग की राशि से शुरू करने की तैयारी चल रही है।

उसे ही मिलेगा जिम्मा

बता दें कि बसों का परिचालन विभिन्न रूटों में किया जाएगा और इसके लिए नीलामी के आधार पर अधिकतम बोली लगाने वाली संस्था को इसके परिचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यहां एक बात यह भी गौर करने लायक है कि इस नीलामी में भी उन्हीं संस्था को शामिल करने का मौका मिल सकेगा, जिनका सालाना टर्नओवर करीब 50 लाख रुपए हो।

सर्वे कार्य चल रहा है और रूट, किराया आदि सारी तैयारी के साथ सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। कितने बस चाहिए, इसकी भी जानकारी ली जा रही है। इसके बाद बसों की खरीदारी होगी, ताकि लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।

संजय कुमार, स्पेशल ऑफिसर, जेएनएसी