होली पर परिवार को जाना था श्रीनगर

2019-03-01T06:00:37Z

-बनारस के एक और लाल विशाल पांडेय की शहादत से हर कोई गमगीन

-मां वैष्णो देवी के दर्शन की आस रह गई अधूरी

vinod sharma@inext.co.in

VARANASI

विशाल पांडेय की शहादत की खबर से हर कोई गमगीन है। बेटे के अकस्मात चले जाने का दर्द क्या होता है ये विशाल पांडेय के बूढ़े मां-बाप की आंखों में साफ झलक रहा था। छुट्टी सैंक्शन न होने के कारण इस बार परिवार होली खेलने के लिए श्रीनगर जाने वाला था, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था।

पहले पत्थरबाजों को खत्म करो

बड़े बेटे विशाल के चले जाने के बादे पिता विजय शंकर पूरी तरह से टूट गए हैं। परिजनों को संभालने के लिए आंखों से आंसू बाहर नहीं आने दे रहे हैं। बेटे के जाने के गम के साथ उन्हें गर्व भी है। उन्होंने कहा कि मुझे अपने बेटे की शहादत पर गर्व है, लेकिन सरकार से शिकायत भी है। खराब हेलीकाप्टर क्यों रखा गया है। अगर हेलीकाप्टर सही होता तो मेरा बेटा मेरे पास होता। हादसे के बाद कश्मीर में मौजूद पत्थरबाजों ने मेरे बेटे का शव लाने नहीं दिया। सरकार को पहले उन्हें ही खत्म करना चाहिए। बाद में आतंकियों को।

भाई का सेलेक्शन हो गया, मेरा नहीं

शहीद विशाल के बडे़ भाई विकास पांडेय कहते हैं कि विशाल मेरा भाई ही नहीं, अच्छा दोस्त भी था। हम दोनों की पढ़ाई साथ-साथ और शादी भी एक ही दिन 4 दिसम्बर 2009 को हुई। वायु सेना में भर्ती होने के लिए हम दोनों ने आवेदन किया था, लेकिन मेरा सेलेक्शन नहीं हुआ। इसके बाद मैं लखनऊ चला गया। वहां फार्मासिस्ट कम्पनी में एरिया मैनेजर हूं।

तीन दिन पहले हुई थी बात

विकास कहते हैं कि भाई विशाल से अभी तीन दिन पहले ही बात हुई थी। इस बार मेरा और भाई का परिवार होली पर श्रीनगर जाने वाला था। साल में दीपावली या होली पूरा परिवार एक साथ मनाता है। लगता है ईश्वर मुझसे नाराज हो गया है। मेरा दोस्त, मेरा भाई मुझसे छिन लिया।

बहन की शादी में आए थे बनारस

विकास पांडेय ने बताया कि भाई विशाल आखिरी बार चार दिसंबर 2017 को बड़ी बहन की शादी में शामिल होने के लिए बनारस आए थे। तीन माह पहले लखनऊ में मेरे घर आए थे। करीब चार दिन हम लोगों के साथ रहे। भाई के बुलावे पर दो माह पहले पूरा परिवार मां वैष्णो धाम गया था, वह भी दर्शन करना चाहते थे, लेकिन किसी कारणवश उन्हें छुट्टी नहीं मिली।

भइया को कापी करते हैं आकाश

अब मैं किसे कापी करूंगा। मेरा भइया मुझसे रूठ गया। मैं तो अनाथ हो गया। अब मुझे कपड़ा कौन दिलाएगा। यह कहकर शहीद विशाल के छोटे भाई आकाश पांडेय रोने लगे। वह कहते हैं कि तो फोन पर बात कम होती थी। जब बात होती तो अक्सर पूछते थे कि कुछ चाहिए आकाश। पढ़ाई कैसी चल रही है। आकाश मोहल्ले के गरीब बच्चों को निशुल्क पढ़ाते हैं।

अधिकारियों ने ढांढस बंधाया

विशाल पांडेय के शहीद होने की सूचना मिलते ही सीडीओ गौरंग राठी, एडीएम सिटी विनय सिंह और एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह समेत कई अफसर गुरुवार दोपहर परिजनों से मिलने उनके चौकाघाट आवास पहुंचे। अधिकारियों ने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा प्रशासन साथ खड़ा है। उन्होंने पिता विजय शंकर पांडेय को ढांढस बंधाया।


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