'फेरेंजाइटिस' के फेर में फंसे

2014-04-09T07:00:01Z

- बदलते मौसम में गले में बढ़ रहा इंफेक्शन

- खांसी, कफ और इरीटेशन के चलते लोग पहुंच रहे हॉस्पिटल

- ठंडी चीजों से करनी होगी तौबा

ALLAHABAD: मौसम तेजी से चेंज हो रहा है। ठंड लगभग गायब हो रही है और गर्मी में इजाफा हो रहा है। ऐसे में होशियार रहने की जरूरत है। खासतौर से मार्केट में बिकने वाली ठंडी चीजों से। इनसे होने वाला इंफेक्शन आपको लंबे समय तक परेशान कर सकता है। विश्वास न हो तो हॉस्पिटल्स का नजारा देख सकते हैं। यहां गले में इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। डॉक्टर्स भी उनको लापरवाही न बरतने की सलाह दे रहे हैं।

निशाने पर है आपका गला

चेंज ऑफ वेदर के दौरान लोगों को आइसक्रीम सहित दूसरी ठंडी चीजें खाने का बहुत मन करता है। ऐसा करने वाले इंफेक्शन का शिकार हो जाते हैं। गले को निशाने पर लेने वाली इस बीमारी का नाम फेरेंजाइटिस है। लोग तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। यह बीमारी ठंडे के साथ कड़ुवा और चटपटी बाजारू चीजें खाने से भी फैल रही है। एक बार इंफेक्शन होने के बाद लंबे समय तक गले में कफ, खांसी और इरीटेशन बना रहता है, जो बिना इलाज के ठीक नहीं होता। अधिक इंफेक्शन होने पर मरीज के गले का टांसिल में भी सूजन आ जाती है। जिससे पेन बढ़ जाता है और खाने-पीने में दिक्कत होती है।

क्या है फेरेंजाइटिस

यह एक तरह का वायरल इंफेक्शन है जो बदलते मौसम में अपने शबाब पर होता है। खासतौर से मार्च और अप्रैल के महीने में इसके मरीजों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हो जाती है। इसमें मरीज के गले के द्वार की झिल्लियों में सूजन आ जाती है जिससे प्रॉब्लम क्रिएट होने लगती है। सेकंडरी इंफेक्शन होने पर मरीज को वोमेटिंग भी होने लगती है। डॉक्टर्स की मानें तो महज गर्म पानी के गार्गल और एहतियात बरतने से यह इंफेक्शन ठीक नहीं होता है। इससे बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह लेनी जरूरी होती है। इससे मरीज को महीनों परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बच्चे भी आए चपेट में

वायरल इंफेक्शन से केवल बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी सफर कर रहे हैं। उनके सामने खांसने या उन्हें प्यार से किस करने से भी यह इंफेक्शन एक से दूसरे में ट्रांसफर हो जाता है। डॉक्टर्स कहते हैं कि बच्चों में शुरुआती दौर में इसका पता नहीं चलता है। अगर बच्चा कुछ भी खाने या पीने से इंकार कर रहा है तो एक बार डॉक्टर को जरूर दिखाएं। कई बार पता नहीं चलने पर इंफेक्शन अपनी दूसरी और तीसरी स्टेज पर पहुंच जाता है। महज ब्8 से 7ख् घंटे के भीतर फेरेंजाइटिस मरीज को अपनी चपेट में ले लेता है।

ये एहतियात बरतना जरूरी

- ठंडी चीजों से बचें।

- गर्मी से आने के बाद अचानक ठंडा पानी न पिएं।

- अधिक कड़ुवी चीजों को खाने से परहेज करें।

- इंफेक्टेड पर्सन से बच्चों को दूर रखें।

- तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज शुरू कर दें।

- एसी या कूलर से दूर रहने की कोशिश करें।

मार्च और अप्रैल के सीजन में फेरेंजाइटिस के फैलने के आसार ज्यादा हाते हैं। इसमें मरीज का निगल द्वार की झिल्लियों में सूजन आ जाती है और वह कुछ खाने-पीने के लायक नही रहता। बार-बार खांसी, सरसराहट और कफ आने से भी वह इरीटेट हो जाता है। लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डॉ। मनीष चौरसिया, बेली हॉस्पिटल

ये सीजनल इंफेक्शन है और इसके मरीज ओपीडी में लगातार बढ़ रहे हैं। शुरुआत में लोग इसको नजरअंदाज करते हैं लेकिन बाद में उन्हें ज्यादा दिक्कत होने लगती है। इसलिए थोड़ा एहतियात बरतना जरूरी है।

डॉ। ओपी त्रिपाठी, सीनियर फिजीशियन


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