चीन में सत्ता परिवर्तन पर सारी दुनिया की नज़र

Updated Date: Thu, 08 Nov 2012 12:25 PM (IST)

चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का एक अहम अधिवेशन हो रहा है जिसमें नेतृत्व में बड़े पैमाने पर बदलाव होंगे जिसका देश की भावी दिशा-दिशा पर गहरा असर पड़ सकता है.

चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है और विश्व अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका बढ़ती ही जा रही है। यही वजह है कि चीन के शीर्ष नेतृत्व में होने वाले इस बदलाव पर सारी दुनिया की निगाहें लगी हैं.

पार्टी कांग्रेस क्या हैकम्युनिस्ट पार्टी का ये अधिवेशन हर पांच वर्ष में होता है। पार्टी इस मंच के माध्यम से अपनी नीतियों और नेतृत्व में बदलाव की घोषणा करती है।

आठ नवंबर से शुरू हुए इस अधिवेशन में पूरे चीन से 2200 से ज्यादा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। पार्टी पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक अपनी एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन करती है। लेकिन अधिवेशन की ज्यादातर कार्यवाही बंद कमरों में होती है।

अधिवेशन की समाप्ति के साथ ही पार्टी का शीर्ष नेतृत्व तय हो जाता है। अभी नहीं पता है कि ये अधिवेशन कब तक चलेगा, लेकिन के हाल में इस तरह के जो अधिवेशन हुए, वे सात दिनों में संपन्न हुए।

इसका क्या महत्व हैइस वर्ष हो रहा कम्युनिस्ट पार्टी का अधिवेशन खासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके माध्यम से देश का शीर्ष नेतृत्व तय होगा जो दस वर्ष के अंतराल में एक बार बदलता है।

पार्टी ने अपने नेताओं के लिए उम्र का निर्धारण बड़ी सख्ती से किया है और पार्टी पोलित ब्यूरो के मौजूदा नौ में से सात नेताओं के हट जाने की उम्मीद है।

इन सात नेताओं में राष्ट्रपति हू जिंताओ और प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ भी शामिल हैं। अधिवेशन की समाप्ति के बाद देश का नया नेतृत्व अपनी वरीयता क्रम से प्रेस से रूबरु होता है।

चीन के नए नेता कौनउप राष्ट्रपति शी जिनपिंग, राष्ट्रपति हू जिंताओ की जगह नए पार्टी प्रमुख बन सकते हैं और अगले वर्ष की शुरुआत में चीन के नए राष्ट्रपति भी हो सकते हैं। शी जिनपिंग उन चुनिंदा पार्टी नेताओं में से एक हैं जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है। उप प्रधानमंत्री ली केकियांग, हू जिंताओ के करीबी सहयोगी है, वे प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की जगह ले सकते हैं।

पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के अन्य सदस्यों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। इस तरह की खबरें बड़े पैमाने पर आ रही हैं कि समिति का आकार छोटा किया जाएगा और सदस्यों की संख्या नौ से घटाकर सात कर दी जाएगी ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके।

नए नेताओं का चयन कैसे होता है

सैद्धांतिक रूप से पार्टी कांग्रेस, केंद्रीय समिति के सदस्यों का चुनाव करती है जो पोलित ब्यूरो और इसकी स्थायी समिति का निर्धारण करते हैं। लेकिन व्यावहारिक रूप से आमतौर पर ऐसा नहीं होता है और शीर्ष स्तर पर नेतृत्व के निर्धारण में कांग्रेस की भूमिका केवल रबर स्टाम्प की होती है।

माओ जेडांग और डेंग शियाओपिंग के समय शीर्ष नेताओं ने अपने उत्तराधिकारियों का नाम खुद तय किया था। लेकिन चीन की राजनीति में ऐसे ताकतवर राजनेताओं का दौर खत्म हो गया है। अब नए नेता के चुनाव के लिए पार्टी के विभिन्न धड़ों के खरीद-फरोख्त की प्रक्रिया चलती है।

वैसे तो ली केकियांग को हू जिनताओ का पसंदीदा उम्मीदवार माना जाता है, शी जिनपिंग भी उभरकर शीर्ष पर आए हैं क्योंकि पार्टी के सभी धड़े उनके नाम पर रज़ामंद हैं।

नए नेताओं से क्या बदलाव आएगाचीन में आर्थिक और सामाजिक समस्याएं गहराने पर कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता पर पकड़ ढीली पड़ सकती है। यही वजह है कि नए नेतृत्व को इस दिशा में फौरन सुधार करने की जरूरत होगी। देश में राजनीतिक सुधारों की जरूरत भी महसूस होती रही है।

शी जिनपिंग ने हाल ही में संकेत दिया था कि वो इस दिशा में कठोर कदम उठा सकते हैं। लेकिन चीन की राजनीति में कुछ ताकतवर समूह हैं जो इस तरह के प्रबल सुधारों का विरोध कर सकते हैं। नए नेता के चुनाव में इस तमाम बातों का ख्याल रखा जाएगा।

सेवानिवृत्त हुए नेताओं का क्या होगाचीन में अक्सर ये होता आया है कि सक्रिय राजनीति से संन्यास ले चुके राजनेता पर्द के पीछे से अपनी भूमिका का निर्वहन करते है और देश की राजनीति पर असर डालते हैं।

जियांग ज़ेमिन साल 2002 में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से हट गए थे, लेकिन इसके बाद भी वे दो वर्ष तक देश के केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष बने रहे।

कुछ लोगों का मानना है कि जियांग ज़ेमिन ने जो नज़ीर पेश की, हू जिनताओ उसका अनुसरण कर सकते हैं। वैसे पार्टी के बुजुर्ग नेता आधिकारिक तौर पर किसी पद पर काबिज़ हुए बिना भी राजनीति में सक्रिय भूमिका अदा कर सकते हैं।

जैसे जियांग और उनके प्रतिद्वंद्वी रहे ली रुइहुयान के बारे में खबरें आती रहीं कि वो अपना कद बढ़ाने के लिए सार्वजनिक तौर पर नजर आते रहे।

गोपनीयता

चीन में नेतृत्व किस तरह बदलता है, इसके बारे में वर्ष 1978 से दुनिया को पता चलना शुरू हुआ। लेकिन चीन का राजनीतिक तंत्र अभी तक कई मायनों में गोपनीय तरीकों से काम करता है।

मसलन अभी चंद हफ्ते पहले की बात है जब शी जिनपिंग का दो सप्ताह तक कहीं अतापता नहीं था जिससे अटकलों का बाज़ार गर्म होने लगा था।

कम्युनिस्ट पार्टी के इस अधिवेश से जो एक बात हमें पता चलेगी, वो हू जिंताओ की बहु-प्रतीक्षित 'पॉलिटिकल-रिपोर्ट' होगी जिसे आठ नवंबर को जारी किया जाएगा।

चीन के नेताओं के भाषण समझने के लिहाज से आमतौर पर दुरूह होते हैं क्योंकि इसकी भाषा भी कठिन होती है। लेकिन चीन मामलों के जानकार इन नेताओं की भाषा पर गहरी नज़र रखेंगे क्योंकि इससे चीन की भावी दिशा-दिशा के संकेत मिल सकते हैं।

Posted By: Inextlive
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