टीवी का मैं बड़ा फैन हूँ खासकर की 'बिग बैंग थ्योरी' मेरा पसंदीदा शो है। ये शो मेरे लिए इसलिए खास है कि 'बिग बैंग' मेरे लिए बचपन से ही कौतुहल का विषय रहा है। मैं कक्षा 7 में था और मुझे आज भी याद है कि मैंने एस्ट्रोफिजिक्स सेक्शन से एक किताब उठाई और उसे लेजाकर हिस्ट्री सेक्शन में रख दिया। इस छोटी सी किताब का नाम था 'ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम'. मेरी टीचर ने मुझे जब ये करते हुए देखा तो उन्होंने हंस कर पूछा कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैंने भी जवाब दिया कि हिस्टरी की किताब गलत जगह रखी थी। मेरी टीचर मुझपर हंसी और मुझसे वो कहा जो मैं आज तक नहीं भूला...


"ये किताब हिस्ट्री में हमेशा रहेगी, पर ये कोई साधारण हिस्ट्री बुक नहीं, ये खज़ाना है जिसमे हमारे इस ब्रम्हांड में होने के सारे राज़ छुपे हुए है, इसे शेल्फ पर मत रखो, घर लेजाओ, पढ़ो और जानो की ब्रम्हांड की तरह ज्ञान भी अनंत है"किताब में कितना ज्ञान होगा


मैंने भी सोचा कि इस छोटी सी किताब में कितना ज्ञान होगा, ये तो मैं एक घंटे में यहीं बैठ के पढ़ लूंगा। मैं गलत था, मुझे इस किताब को खत्म करने में 12 दिन लगे, क्योंकि पूरे ब्रम्हांड की हिस्ट्री जो समाई हुई थी उस छोटी सी किताब में। एक एक शब्द इनसाइक्लोपीडिया की तरह था। इससे पहले ब्रह्मांड मेरे लिए सिर्फ वही था जो ब्रम्हा जी ने ब्रम्हावर्त में खूंटी गाढ़ के नापा हुआ था, इस किताब के पढ़ने के बाद मेरे लिए ब्रह्याण्ड की परिभाषा हमेशा के लिए बदल गई। जब किताब खत्म हुई तो मैंने राइटर स्टीफेन हॉकिंग के बारे में पढ़ना शुरू किया और उस दिन से ही मैंने 'हार मानने की आदत' छोड़ दी। स्टीफेन हॉकिंग वो इंसान है जिसने जीवन से कभी हार नहीं मानी, सालों साल व्हील चेयर पर बेजान पड़े स्टीफेन ने वो सब किया जो सहज भगवान के अलावा किसी इंसान के बस की बात नहीं है।

साइंटिस्ट और प्रोफेसर हैंये वो साइंटिस्ट और प्रोफेसर हैं, जिनके काम की छाप आप सिनेमा जगत से टीवी तक हर जगह देख सकते हैं। स्टीफेन हॉकिंग की लिखी हुई बातों से ही स्टीफेन स्पीलबर्ग भी बड़े प्रभावित रहे हैं, उनकी फिल्में जैसे ईटी और जुरासिक पार्क में काफी सारे मुद्दे जैसे एवोल्यूशन और एक्सटिंक्शन के रेफरेन्सेस हॉकिंग की किताबों में वर्णित हैं। उनकी प्रतिभा और उनके द्वारा दिये ज्ञान से प्रेणना लेकर ही अंतर्राष्टीय चर्चित शो बिग बैंग थ्योरी भी बनाया गया। यहां तक कि स्टीफेन हॉकिंग इस सीरीज के एक एपिसोड में नज़र भी आये। चाहे वो मैट्रिक्स हो या ट्रांसफॉर्मस, चाहे वो वेलेरियन हो या अवतार, कॉस्मिक एस्ट्रोफिजिक्स की रिसर्च अगर फ़िल्म के लिए की जा रही होती है तो पहली किताब जो रेफेरेंस के लिए पढ़ी जाती है वो निश्चित स्टीफेन हॉकिंग की ही होती है इसमें कोई दो राय नहीं।साइंस और एस्ट्रोफिजिक्स जैसे सब्जेक्ट्स पर फिल्मे

लोग कहते हैं, की साइंस और सिनेमा का कोई लेना देना नहीं है, पर ये कहना गलत नहीं होगा कि इनदोनों के बीच मे जो लिंक हैं वो स्टीफेन हॉकिंग जैसे महापुरुष ही हैं, जिन्होंने फ़िल्म मेकर्स को साइंस और एस्ट्रोफिजिक्स जैसे सब्जेक्ट्स पर फिल्मे बनाने पर विवश कर दिया और आज भी ये फिल्में उनके दिए हुए ज्ञान और थेओरी का इस्तेमाल करके आपको रोमांचित करती हैं।साधारण इंसान जिसमे असाधारण कौशल हो
साधारण इंसान जिसमे असाधारण कौशल हो ऐसे लोग भगवान कम ही बनाता है, स्टीफेन जैसा अलौकिक किरदार भगवान ने इस कॉस्मिक स्पेस में शायद एक ही बनाया है। आपको जानकर कोई हैरानी नहीं होगी कि बचपन में ही स्कूल में छोटे से स्टीफेन को लोग आइंस्टीन बुलाते थे, उनके पिता ऑक्सफ़ोर्ड से साइंस ग्रेजुएट थे और माँ ऑक्सफ़ोर्ड से ह्यूमैनिटी में स्नातक थी। माता पिता दोनों ने ही अपना अपना ज्ञान छोटे से स्टीफेन को दिया इसलिये स्टीफेन की राइटिंग कभी भी एकतरफा साइंस या ह्यूमैनिटी की तरफ नहीं रही। आसान शब्दों में उन्होंने जटिल से जटिल विषय पर बात करना सीख लिया था। नासा आज भी उनकी दी हुई बातों पर शोध कर रहा है और समय समय पर उनकी कही बातें थ्योरी से लॉ बनती चली जा रही हैं। कहना गलत नहीं होगा कि पूरा नासा एक तरफ और न बोल और न चल सकने वाले स्टीफेन हॉकिंग एक तरफ साथ ही ये भी कहना गलत नहीं होगा कि साइंस की दुनिया का बड़ा अनालीटिक ब्रेन उनके जाने के बाद भी उनके लिखे हुए शब्दों से अरसे तक साइंस की दुनिया को रोशन करेगा। भले ही कॉस्मिक साइंस से मेरा कोई लेना देना नहीं है पर स्टीफेन हॉकिंग की कहानी मेरे लिए किसी इंस्पिरेशनल फ़िल्म से कम नहीं है, अगर सही कहूं तो वे मेरी ज़िन्दगी की सबसे अप्रतिम कहानी है।

स्टीफेन हॉकिंग साइंस की दुनिया का रोशन चिराग
स्टीफेन हॉकिंग साइंस की दुनिया का रोशन चिराग तो थे ही पर स्पेशली एब्लेड लोगों के लिए वो एक सीख थे। ऐसे कितने ही लोग हैं जो हार मान लेते हैं, स्टीफेन का जीवन उन लोगों के लिए मिसाल है। दशकों तक रीढ़ की हड्डियों में व्यथा के कारण स्टीफेन की फिसिकल एबिलिटी घटती चली जा रही थी। एक समय तो ऐसा भी आया कि चलना तो दूर बोलना भी मुश्किल हो गया था, फिर भी वो इंसान कभी नहीं रुका, हर परेशानी एक ताले की तरह होती है और हर ताले की एक चाबी ज़रूर होती है, उनके पास कला थी जिससे वो हर मुसीबत पर विजय हासिल कर सकते थे, हर ताले की चाबी ढूंढ ही लेते थे। 'जब जक ज़िन्दा हो तब तक जीना मत छोड़ो', इस बात की जीती जागती मिसाल है स्टीफेन कि ज़िन्दगी। उन्होंने शरीर भले ही त्याग दिया हो पर वो तो अमर कब के हो चुके हैं, स्टीफेन हॉकिंग का नाम अगले बिग बैंग तक जीवित रहेगा।RIP स्टीफेन हॉकिंग। हम आपको हमेशा याद रखेंगे। Yohaann Bhaargava

Posted By: Mukul Kumar