जांच करा ली दो बार ऑपरेशन नहीं

2019-06-20T06:00:02Z

जांच पर आंच:

- जांच की आंच में फंसे मरीज, ऑपरेशन कराने के लिए दो बार करानी पड़ी जांच

- दून हॉस्पिटल की पैथोलॉजी लैब में 11.30 बजे के बाद नहीं लिए जाते सैंपल

देहरादून,

दून हॉस्पिटल में जांचें ठप होने से न केवल मरीजों का मर्ज बढ़ता जा रहा है, बल्कि महंगी प्राइवेट जांचें कराने में आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। कई मरीजों की इस कारण सर्जरी रुकी हुई है, तो कई मरीजों को दो-दो बार जांच करानी पड़ रही है, जो जेब पर भारी पड़ रही है। एब्डोमिनल सर्जरी कराने के लिए सेलाकुई से दून हॉस्पिटल पहुंचा संजय सिंह 7 जून से चक्कर काट रहा है। एक बार सर्जरी से पहले की जांचें प्राइवेट लैब से कराईं, लेकिन उसी दिन ओटी में एक मशीन खराब हो गई और सर्जरी नहीं हो पाई, डॉक्टर ने दूसरे दिन आने को कहा, दूसरे दिन सर्जरी के लिए पहुंचा तो डॉक्टर ने दोबारा से सारी जांचें कराने को कहा। हॉस्पिटल में अभी भी केवल दो जांचें ही हो रही है, ऐसे में उसे दोबारा प्राइवेट लैब से जांच करानी पड़ रही है, जिसके लिए उसके पास पैसे नहीं है। दून हॉस्पिटल की अव्यवस्थाएं इसी तरह मरीजों पर भारी पड़ रही हैं।

जांच में दो गुना खर्च, नहीं हुई सर्जरी

सर्जरी के लिए चक्कर काट रहे संजय सिंह ने बताया कि डॉक्टर ने उसे सर्जरी के लिए वेडनसडे 12 जून का टाइम दिया था, लेकिन ओटी में ऑटोक्लेव मशीन खराब हो गई। ऐसे में दोबारा आने को कहा। ट्यूजडे को वह दोबारा ओटी पहुंचा तो डॉक्टर ने पूरी जांचें दोबारा कराने को कहा। एक बार पहले ही वह सर्जरी से पहले कराई जाने वाली जांचें करा चुका था। अधिकतर जांचें प्राइवेट लैब से करानी पड़ीं जिसमें 2100 रुपए खर्च हो गए। संजय के परिजनों का कहना है कि अब दोबारा जांच कराने के लिए पैसे नहीं हैं, जांच कैसे कराएं। दून हॉस्पिटल में जांच हो नहीं रही, ऐसे में सर्जरी कब होगी और मर्ज से कब राहत मिलेगी ये बड़ा सवाल है।

साढ़े 11 बजे बाज नहीं लेते सैंपल

दून हॉस्पिटल की सैंट्रल लैब में जरूरी रीजेंट्स और जांच किट्स की कमी के चलते अधिकांश जांचें नहीं हो पा रही हैं। कुछ पैथोलॉजी जांचें हो भी रही हैं तो लैब की टाइमिंग को लेकर मनमानी की जा रही है। मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में इमरजेंसी केसेज के लिए 24 घंटे लैब फैसिलिटी अवेलेबल होनी चाहिए। लेकिन, दून हॉस्पिटल की लैब पर दो बजे ताला लग जाता है, और मरीजों के सैंपल तो साढ़े 11 बजे तक ही लिए जाते हैं। ऐसे में इमरजेंसी केसेज में पेशेंट्स को प्राइवेट लैब से जांच करानी पड़ती है, जो काफी महंगी पड़ती है। हालांकि, हॉस्पिटल मैनेजमेंट का दावा है कि इमरजेंसी केसेज में वे दोपहर साढ़े 12 बजे तक पेशेंट के सैंपल लेते हैं।

इमरजेंसी केसेज के लिए डायग्नोस्टिक सेंटर खोलने की कवायद

हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने दून हॉस्पिटल में इमरजेंसी केसेज के लिए अब अलग से डायग्नोस्टिक सेंटर खोलने की कवायद शुरू कर दी है। एमएस डॉ। केके टम्टा ने बताया कि हॉस्पिटल की महिला विंग में प्रसव से पूर्व और इमरजेंसी में आने वाले केसेज के लिए पैथोलॉजी लैब में 24 घंटे डायग्नोस्टिक सेंटर खोलने पर सहमति बनी है, शुरुआत में यह सुविधा ऑन कॉल होगी। उन्होंने बताया कि महिला विंग में इमरजेंसी में आने वाले प्रसव केसेज को लेकर अक्सर दिक्कत होती है। जिसमें ब्लड ग्रुप, और सीबीसी जांच जरूरी होती है, लेकिन लैब बंद होने के चलते पेशेंट्स को जांच के लिए प्राइवेट लैब में ही भेजना पड़ता है। हालांकि, इनमें से हीमोग्लोबिन की जांच के लिए ब्लड बैंक की हेल्प ले ली जाती है, जो 24 घंटे खुला रहता है।

50 टेक्नीशियंस की डिमांड, 14 के भरोसे लैब

दून मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 24 घंटे पैथोलॉजी लैब की सुविधा देना हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए बड़ा चैलेंज है। मेडिकल कॉलेज के मानक के हिसाब से दून हॉस्पिटल की लैब में 50 टेक्नीशियन होने चाहिए, जबकि वर्तमान में सिर्फ 14 टेक्नीशियन के भरोसे ही लैब चल रही है। ऐसे में मैनेजमेंट के लिए ऑन कॉल सुविधा भी शुरू करना आसान नहीं है, पहले भी लैब को 5 बजे तक खोलने का दावा किया गया था, लेकिन स्टाफ की कमी के चलते लैब 2 बजे के बाद चलाना मुश्किल हो गया था। पैथोलॉजी में इमरजेंसी केस की स्थिति में सैंपल लेने के लिए 2 बजे तक 1 कर्मचारी ही तैनात रहता है।

आयुष्मान के तहत इलाज से फिर इनकार

एक्सीडेंटल इमरजेंसी केस में मरीज को आयुष्मान कार्ड दिखाने पर भी इलाज नहीं मिल रहा है। बल्लीवाला में रहने वाली रितिका सिंह ने बताया कि उनके पड़ोसी को गंभीर हालात में कोरोनेशन हॉस्पिटल ले गए थे, लेकिन आयुष्मान कार्ड होने के बाद भी हॉस्पिटल ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। जब वे मरीज को सीएमआई हॉस्पिटल लेकर गए, तो हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने बताया कि पेशेंट के पेट में दिक्कत है, लेकिन इसका इलाज आयुष्मान योजना के तहत पैकेज में नहीं किया जा सकता। लेकिन, पेड इलाज चाहें तो करवा सकते हैं।

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आयुष्मान योजना के पहले तो कार्ड ही नहीं बन रहे हैं, जिनके कार्ड बन रहे हैं, उनको योजना का पूरी तरह से लाभ नहीं मिल रहा है। केन्द्र की मोदी सरकार ने जिस उद्देश्य ये यह योजना शुरू की थी, उस पर उत्तराखंड के कर्मचारियों ने पलीता लगा दिया है।

प्रदीप कुकरेती, राज्य आंदोलनकारी

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योजना तो अच्छी है, लेकिन हॉस्पिटल वाले इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। ये योजना गरीबों के लिए शुरू की गई थी, लेकिन इसका फायदा गरीबों को नहीं मिल रहा है। कुछ हॉस्पिटल फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। इसकी निगरानी सही तरीके से होने चाहिए।

डॉ। महेश भंडारी, अध्यक्ष, दून रेजीडेंस वेलफेयर फ्रंट


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