यूपी में सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत पिंक बूथ का निर्माण कराया गया था। राजधानी में लगभग 100 से ज्यादा पिंक बूथ मौजूद हैं। इन बूथ में 2 महिला सिपाही सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक तैनात रहती हैं।


लखनऊ (ब्यूरो)। 'जैसा नाम, वैसा काम', लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में तैनात दो महिला कांस्टेबल पर यह मुहावरा फिट बैठता है। 2018 व 2019 बैच की महिला कांस्टेबल ज्योति व किरण अपने नामों को सार्थक करते हुए न केवल खाकी का सम्मान कायम करने में सफल हो रही हैं बल्कि कई परिवारों के घरों में खुशियों की रोशनी भी बिखेर रही हैैं। दोनों महिला पुलिस कर्मियोंं की ड्यूटी आलमबाग थाना क्षेत्र के पिंक बूथ नंबर 20 पर है। उनकी वर्किंग के चलते उन्हें डीसीपी सेंट्रल ने सम्मानित भी किया है ताकि इस नजीर से अन्य पुलिस कर्मियों को भी सीख मिले।खुद पहुंचती हैं पीडि़तों के पास
आलमबाग इंटरनेशनल बस अड्डे में मौजूद पिंक बूथ में तैनात महिला कांस्टेबल ज्योति व किरण सुबह 8 बजे पिंक बूथ आ जाती हैं और बस अड्डे के अंदर गश्त करती हैं। उनकी ड्यूटी बूथ में रहती है लेकिन वे किसी पीडि़त के आने का इंतजार करने से ज्यादा पीडि़तों के पास जाने पर भरोसा करती हैं। इसी नियत से दोनों बस टर्मिनल के अंदर और बाहर हर लड़की व महिला से बातचीत करती हैैं।4 माह में 12 महिलाओं को पहुंचाया घर


ज्योति बताती हैं कि सुबह आते ही जो भी महिला उन्हें अकेले बैठे मिलती है, वे उनसे बातचीत करती हैं। खासतौर पर उन महिलाओं पर ज्यादा ध्यान देती हैं जो मायूस बैठी होती हैं। वे उनसे प्यार से बातचीत करती हैं और लखनऊ आने का कारण पूछती हैं। कोई समस्या होने पर उसका हल तलाशती हैं।केस 1महिला कांस्टेबल ज्योति के अनुसार, एक महिला ने बताया कि वह अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती और उनसे झगड़ा कर लखनऊ आ गई है। ज्योति ने उसकी काउंसलिंग की और उसको बूथ में बैठाया। उसके घरवालों की डिटेल लेकर उनसे बात की और फिर उन्हें समझा कर उनके सुुपुर्द कर दिया।केस 2एक अन्य महिला को उसके गांव का एक लड़का बहला-फुसलाकर लखनऊ ले आया और खुद गायब हो गया था। वह महिला बस अड्डे पर रो रही थी। नजर पड़ते ही उन्होंने उसे खाना खिलाया। उसके घर का पता लेकर उनके परिजनों को बुलाकर सौंप दिया। ज्योति के मुताबिक, जनवरी से अप्रैल तक 12 महिलाओं को उनके घर वालों से मिलवाया है।महिलाओं की अपेक्षा बच्चियां ज्यादा होती हैं

किरण के मुताबिक, अधिकतर लड़कियां 10 से 13 साल की होती हैं, जो या तो घर से गुस्से में भाग आती हैं या फिर उन्हें कोई बहला-फुसलाकर ले आता है। किरण बताती हैं कि महिलाओं की अपेक्षा बच्चियों से बात करने में समस्या आती है। उन्हें घर का पता बताने में दिक्कत होती है या घरवालों के डर से बताती नहीं हैं, लेकिन उनकी दोस्त बनकर उन्हें समझाती हैं। इस काम में कभी-कभी घंटों लग जाते हैं।सुबह 8 से रात 8 बजे तक मुस्तैद रहती हैंयूपी में सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत पिंक बूथ का निर्माण कराया गया था। राजधानी में लगभग 100 से ज्यादा पिंक बूथ मौजूद हैं। इन बूथ में 2 महिला सिपाही सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक तैनात रहती हैं। इनमें तैनात महिला सिपाही महिलाओं और छात्राओं की समस्याओं को सुनने उनकी मदद करने व राहत दिलाने का काम करती हैं।

Posted By: Inextlive