पूर्वांचल के एम्स कहे जाने वाले बीएचयू के सर सुंदरलाल हॉस्पिटल में ओपीडी की बढ़ी फीस से न सिर्फ आम जनता नाखुश है बल्कि हॉस्पिटल के कई डॉक्टर भी बीएचयू प्रशासन के इस निर्णय के खिलाफ हैैं. डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी पर्ची के रेट बढ़ाने के फैसला को तत्काल वापस लेना चाहिए.

वाराणसी (ब्यूरो)। हॉस्पिटल के हार्ट डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर ओम शंकर ने तो फ्री हेल्थ सुïिवधा मुहैया कराने की वकालत की। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में सोमवार से ओपीडी पर्ची शुल्क 30 रुपए लिया गया, जबकि ये शुल्क पहले 20 रुपए था। एक साथ 50 फीसदी शुल्क बढऩे से लोगों में आक्रोश बढ़ गया। ये सूचना कैंपस में आग की तरह फैली। बनारस के नागरिक, विश्वविद्यालय और अस्पताल के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और ओपीडी पर्ची में पचास फीसदी वृद्धि को वापस करने की मांग करने लगे।

परामर्श शुल्क ही लिया जाए
बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल के हार्ट डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो। ओम शंकर ने हॉस्पिटल प्रशासन के इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने न सिर्फ बढ़ी फीस को तत्काल वापस करने की बात कही, बल्कि फीस खत्म करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि मरीजों से सिर्फ परामर्श शुल्क ही लिया जाए।

बीस की पर्ची पर तीस की मुहर
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में पर्ची काउंटर और आयुर्वेदिक विभाग के पर्ची काउंटर पर खिडक़ी खुलते ही पर्ची शुल्क 20 रुपए की जगह 30 रुपए मांगे जाने पर मरीज चौंक गए। पर्ची पर 20 रुपए ही लिखा है, लेकिन अलग से काली स्याही में 30 रुपए की मुहर लगाकर लोगों से पैसे वसूले जा रहे हैैं।

विरोध करने पर लाइन से निकाला
आयुर्वेद काउंटर पर 30 रुपए की मुहर लगाकर वसूले जा रहे पैसे का विरोध करने पर पर्ची काट रहे स्टाफ ने भोला शर्मा को लाइन से बाहर घंटों इतंजार कराया। अंत में थककर भोला को 30 रुपए में ही पर्ची लेनी पड़ी।

रोगों की जांच के भी बढ़े हैं शुल्क
सर सुंदरलाल अस्पताल पर मरीजों का काफी लोड रहता है। प्रतिदिन प्रत्येक विभाग में हजारों-हजार की संख्या में मरीज इलाज कराने पहुंचते हैैं। गैर-कानूनी तरीके से इसका फायदा उठाने से आईएमएस बीएचयू नहीं चूक रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा हाल ही में कई रोगों के जांच की शुल्क को भी मनमाने तरीके से बढ़ाया गया है। इस वृद्धि का बीएचयू के स्टूडेंट्स ने विरोध भी जताया था। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, लिहाजा यहां जांच के बाद अब पर्ची का भी शुल्क मनमाना तरीके से बढय़ा जा रहा है।

अस्पताल का खर्च वसूल रहे मरीजों से
समय के साथ महंगाई बढ़ रही है। इसके चलते बिजली का बिल, मेंटीनेंस और मेडिकल उपकरण के लिए अधिक पैसों की जरूरत है। इसके लिए यहां इलाज कराने आए मरीजों से ये पैसे चिकित्सीय शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैैं। पर्ची शुल्क की बढ़ोत्तरी कुलपति और केंद्र सरकार के एप्रूवल के बाद ही लागू की गई है।
-प्रो केके गुप्ता,मेडिकल सुपरिटेंडेंट , आइएमएस, बीएचयू

वैसे तो सभी नागरिकों को परामर्श, जांच और दवा निशुल्क मिलनी चाहिए। सरकार को बढ़े हुए पर्ची शुल्क का डायरेक्ट संज्ञान लेना चाहिए। आए दिन बीएचयू अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्टूडेंट्स और मरीजों पर अतिरिक्त फीस और पैसों का बोझ डाला जा रहा है। बीएचयू में इलाज कराने आने वाले मरीज अधिकतर गरीब तबके के होते हैैं। बगैर किसी सूचना के पर्ची शुल्क 50 फीसदी बढ़ाने का मतलब है, इन्हें खुलेआम लूटना। तत्काल इस वृद्धि को वापस लिया जाए।
- प्रो ओमशंकर, विभागाध्यक्ष, ह्दय रोग विभाग, बीएचयू


बीएचयू अस्पताल प्रबंधन के मनमाने रवैये की अब इंतहा हो रही है। जांच के बाद गरीब मरीजों को लूटने की नीयत से पर्ची के दाम बढ़ाए गए हैैं। पर्ची काटने वाले बिना किसी जानकारी दिए लोगों से केवल मुहर लगाकर 30 रुपए की वसूली की जा रही है, जो संवैधानिक दायरे के खिलाफ है।
- आनंद यादव, स्टूडेंट, बीएचयू


मुझे शुगर की परेशानी है। पर्ची कटाने के लिए चार बजे भोर से ही लाइन में लगा हूं। करीब एक हफ्ते पहले 20 रुपए लिए गए थे, लेकिन सोमवार को मनमाने तरीके से 30 रुपए लिए गए। इस बढ़े रेट को वापस लिया जाए।
-मधु प्रसाद, बच्छाव


कई सालों से मेरे शरीर में दर्द बना रहता है। लगातार इलाज के चलते बहुत पैसे खर्च हो रहे हैैं। जैसे-तैसे गांव से पैसे का जुगाड़ कर यहां आया हूं, लाइन में लगने के दौरान पता चला कि पर्ची की फीस बढ़ा दी गई है, बताइए हम गरीब लोग कहां जाएं।
- कन्हैया, बलिया


लाइन में खड़े थे, तभी काउंटर पर बढ़े पैसे का विरोध के बाद उस व्यक्ति को लाइन से बाहर कर दिया गया। पर्ची की फीस बढ़ानी है तो इसकी जानकारी सभी को होनी चाहिए, ऐसे कैसे कोई मनमाने पैसे वसूल सकता है।
-विवेक विश्वकर्मा, गोरखपुर

Posted By: Inextlive