चुनाव की घोषणा के बाद बनारस में राजनैतिक माहौल गर्म होने लगा है. अब तक छोटे दलों की ओर से कुछ प्रत्याशियों के नाम सामने आए हैं लेकिन प्रमुख पार्टियों ने पत्ते नहीं खोले हैं. बावजूद इसके पार्टियों की ओर से वोटरों पर डोरे डालने का कार्य शुरू हो गया है. हालांकि टारगेट में सभी वोटर्स होते हैं लेकिन पहली बार वोट डालने वाले 18-19 आयु वोटरों पर ज्यादा फोकस है. वाराणसी में इस बार 34550 नये वोटर बने हैं जिसमें सबसे ज्यादा संख्या 5264 अजगरा विधानसभा में है जबकि सेवापुरी सबसे कम 3535 युवा वोटर हैं.

वाराणसी (ब्यूरो)। युवा यानी नये वोटर्स की तरह इस बार के चुनाव में 80 प्लस बुजुर्ग भी काफी अहम हैं। वाराणसी के सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों में कुल 42763 बुजुर्ग वोटर्स हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या 7560 कैंटोमेंट विधानसभा में हैं, जबकि दक्षिणी सबसे कम 4392 बुजुर्ग वोटर हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने इसकी सहूलियत के लिए घर बैठे मतदान करने की सुविधा दी है। बुजुर्ग वोटरों को बैलेट पेपर दिया जाएगा। अगर प्रत्याशियों में कांटे की टक्कर हुई या कम वोटों से हार-जीत दिखी तो इनका वोट निर्णायक साबित होगा।

दिव्यांग भी होंगे पावरफुल
हर बार के चुनाव में कई ऐसी तस्वीर भी सामने आयी हैं, जिसमें बुजुर्ग व दिव्यांग वोटरों को पोलिंग बूथ तक ले जाने में तमाम दिक्कतें आती थीं। इसे चुनाव आयोग ने गंभीर से लिया। बुजुर्ग के साथ दिव्यांग वोटरों को भी घर बैठे वोट देने की सुविधा दी है। आंकड़ों की बात करें तो वाराणसी के सभी आठ विधानसभा क्षेत्रों में कुल 26415 बुजुर्ग वोटर्स हैं। इसमें सबसे ज्यादा संख्या 3944 शिवपुर विधानसभा में हैं, जबकि कैंट में सबसे कम 2471 बुजुर्ग वोटर हैं। बीएलओ के जरिए इनके घरों तक बैलेट पेपर भेजा जाएगा। बुजुर्ग की तरह ये भी जीत-हार में अहम भूमिका अदा करेंगे।

सर्विस वोटरों की मतपेटी
सरकारी नौकरी के लिए बहुत से वोटर्स शहर के बाहर रहते हैं। ऐसे लोगों को सर्विस वोटर कहा जाता है। मतदान करना सभी का अधिकार है। इसलिए अन्य जिलों व प्रदेशों में रहने वाले सर्विस वोटरों को उनके पते पर बैलेट पेपर भेजा जाता है। इनके वोट को सुरक्षित रखा जाता है। अगर हार-जीत टाई होता है तो इनके वोटों की गिनती होती है। कई बार यह भी निर्णायक होते हंै।

Posted By: Inextlive