- बच्चा वार्ड में दोपहर की शिफ्ट में सामने आई विभाग की गंभीर लापरवाही

- गंभीर बीमारी से ग्रसित दो बच्चों को नहीं मिला इलाज, प्राइवेट अस्पताल ले गए परिजन

बरेली : महाराणा प्रताप जिला संयुक्त चिकित्सालय में मरीजों के साथ हो रही लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही है. हाल ही में विभागीय अफसरों की लापरवाही के चलते एक मासूम अपनी जान गवां चुका है. ऐसा ही एक मामला फ्राईडे को जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में देखने को मिला, यहां डायरिया और बुखार से पीडि़त 20 मासूमों के इलाज की जिम्मेदारी सिर्फ एक नर्स के भरोसे थी. हैरत की बात तो यह रही कि नर्स की ओर से बार-बार स्टाफ मुहैया कराने की गुहार को भी आलाधिकारी नजरअंदाज करते रहे, लेकिन इसका खामियाजा मासूमों को भुगतना पड़ा. समय से इलाज न मिलने पर दो मासूमों के परिजन उन्हें लेकर प्राइवेट अस्पताल चले गए.

केस 1

बदायूं के कादरचौक के रहने वाले सलीम अपने एक साल के बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने काफी देर तक बच्चा वार्ड में इंतजार किया. इसके बाद नर्स से बच्चे को भर्ती करने को कहा लेकिन नर्स उस वक्त दूसरे बच्चे को ड्रिप लगा रही थीं. जब बच्चे की हालत बिगड़ने लगी तो सलीम उसे प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए.

केस 2

भमोरा क्षेत्र के सेहंदी निवासी सुनीता अपने नौ माह के बच्चे को लेकर फ्राईडे सुबह यहां लेकर आईं तो नर्स दूसरे बच्चे को भर्ती करने की प्रक्रिया में व्यस्त दिखीं, जब काफी समय बीत गया तो सुनीता अपने बच्चे को लेकर प्राईवेट हॉस्पिटल चली गई.

ये होनी चाहिए व्यवस्था

विभागीय गाइडलाइन के अनुसार, एक वार्ड में तीन स्टाफ नर्स और एक वार्ड ब्वॉय और सफाई कर्मचारी मौजूद होने चाहिए, लेकिन जिला अस्पताल में बच्चा वार्ड में आए दिन एक या दो नर्स के भरोसे मासूमों के इलाज के जिम्मेदारी छोड़ दी जाती है.

वर्जन

मेरी ड्यूटी इवनिंग शिफ्ट में है. मेरे अलावा किसी अन्य नर्स की ड्यूटी यहां नही लगाई गई. जिस कारण कई बच्चों को भर्ती नही किया गया. वर्क लोड की वजह से बच्चों को भर्ती नहीं किया गया.

ज्योति, नर्स

वर्जन ::

मामला मेरे संज्ञान में नहीं है. ड्यूटी लगाने की जिम्मेदारी मैट्रेन की है. अगर उन्होंने एक नर्स के अलावा किसी अन्य को वहां तैनात नहीं किया है तो उनसे जबाव-तलब कर कार्रवाई की जाएगी.

डॉ. टीएस आर्या, सीएमएस.