आगरा (ब्यूरो)। सवाल नकल का नहीं, बल्कि प्रोफेशन का है। एग्जाम में पास होकर ये छात्र डॉक्टर बनते। लोगों की जिंदगी को बचाने का कार्य करते। लेकिन, जब ये नकल से ही पास हुए होंगे, तो मरीजों की जिंदगी बचाएंगे या खतरे में डालेंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। ऐसे में इन नकलची छात्रों से सवाल है कि क्या ऑपरेशन भी यू-ट्यूब या फिर किसी अन्य माध्यम के जरिए नकल करके करेंगे।

जूते में छिपाकर लाए थे नकल
खंदारी परिसर के इंस्टीट््यूट ऑफ इंजीनियङ्क्षरग एंड टेक्नोलॉजी में एमबीबीएस की परीक्षाएं चल रही हैं। सोमवार से शुरू हुई परीक्षा में चार मेडिकल कॉलेजों के छात्र परीक्षा दे रहे हैं। मंगलवार को परीक्षा के दौरान एफएच मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस द्वितीय प्रोफेशनल के दो छात्रों को नकल सामग्री के साथ पकड़ लिया। सचल दल प्रभारी प्रो। पीके ङ्क्षसह के निर्देशन में छात्रों के जूते उतरवाए जा रहे थे। एक छात्र से जब जूते उतारने को कहा गया तो उसके हाथ कांपने लगे। जूते के बाद मोजे उतारते में छात्र ने पर्चियों को हाथ से दबाकर पकड़ लिया। मोजा उल्टा करते ही चार-पांच पर्चियां नीचे गिर गईं। एक अन्य छात्र ने प्रवेश पत्र के पीछे पेंसिल से उत्तर लिखे हुए थे। दोनों की कॉपियों को जमा कराकर फॉर्म भरवाया गया। दूसरी कॉपियां दी गईं। दोनों छात्रों पर अनफेयर मींस के तहत कार्रवाई की गई है।

हर परीक्षा में एफएच के छात्र करते हैं नकल
इस साल फरवरी में हुई परीक्षा में भी एफएच मेडिकल कॉलेज के तीन छात्रों को इलेक्ट्रोनिक डिवाइसों का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। 13 मार्च 2021 को चार परीक्षार्थी फार्मेंसी विभाग में ब्लूटूथ डिवाइस से नकल करते पकड़े गए थे, जबकि वर्ष 2020 में 20 अक्टूबर को 10 नकलची पकड़े गए थे। इन्होंने ताबीज में इलेक्ट्रॉनिक सर्किट और ब्लूटूथ डिवाइस लगा रखी थी।


बीएएमएस कॉपी बदलने की चल रही जांच
डॉ। भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी में शॉर्टकट से मेडिकल एग्जाम में सफलता पाने का ये पहला मामला नहीं है। अभी हाल ही में बीएएमएस एग्जाम की कॉपियां बदलने का खुलासा हुआ था। जिस मामले में एसटीएफ ने यूनिवर्सिटी में डेरा डाला हुआ है। प्रकरण की लगातार जांच जारी है। कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा चुका है।