गोरखपुर (ब्यूरो)।सोशल मीडिया के जरिए अपने वोटर्स और सपोर्टर्स को भी अट्रैक्ट करने की कोशिश में लगे हुए हैं। मगर बात शहर के मुखिया पद की यानि कि मेयर पद की दावेदारी कर रहे कैंडिडेट्स की हो तो वह अभी सोशल नहीं हो पाए हैं। सिर्फ समाजवादी पार्टी के कैंडिडेट को छोड़ दिया जाए तो कोई भी सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं है। ऐसे में सभी के पास लोगों को तक पहुंचने के अलावा कोई दूसरी च्वॉयस नहीं है। हालांकि, अब कुछ दावेदारों ने सोशल अकाउंट बनाकर तेजी दिखाई है, लेकिन वोटर्स से जुडऩे की कोशिशें बेमायने हैं।

सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं

सोशल मीडिया इस वक्त एक ऐसा मीडिया हैं, जिसके जरिए मिनटों में अपने वोटर्स तक पहुंचा जा सकता है। मगर गोरखपुर में मेयर की दावेदारी कर रहे ज्यादा कैंडिडेट्स ने या तो सोशल मीडिया पर सिर्फ प्रोफाइल बनाकर छोड़ रखी है या फिर वह सिर्फ विशेज देने के लिए एक्टिव हैं। भाजपा कैंडिडेट की फेसबुक प्रोफाइल की बात करेें तो कई-कई महीनों तक कोई पोस्ट नहीं है। उनके प्रोफाइल पर सिर्फ वही पोस्ट नजर आते हैं, जिनमें उन्हें टैग किया गया है। ऐसा ही कुछ हाल बसपा कैंडिडेट का है, जिनकी वॉल पर सिर्फ चंद पोस्ट ही नजर आ रही हैं। सपा कैंडिडेट के करीब 90 हजार फॉलोवर हैं और वह अपनी हर गतिविधियां अपडेट भी कर रही हैं।

प्रोफाइल लॉक कर सामाजिक काम

कांग्रेस और आप कैंडिडेट 'शहर सरकारÓ चलाने की दावेदारी कर रहे हैं और मजबूती से लडऩे की बात भी कर रहे हैं, लेकिन इन्होंने तो पूरी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग बना रखी है। इनसे सिर्फ वही जुड़ सकता है या जुड़ा है, जिन्हें यह प्रॉपर वे में जानते हैं। इसके अलावा किसी के पास भी इनसे जुडऩे का कोई ऑप्शन नहीं है। ऐसा इसलिए कि इन्होंने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल लॉक कर रखी है। ऐसे में इनके बारे में जानने के ख्वाहिशमंद वोटर्स सिर्फ इनकी प्रोफाइल डीपी ही देख सकते हैं और उसे ही देखकर उन्हें अंदाजा लगाना पड़ेगा कि उनकी यह च्वॉयस कैसी है।

ट्विटर पर भी गायब

ट्विटर रिनाउंड लोगों का प्लेटफॉर्म माना जाता है। वहां तो नेताओं ने पहले से ही दूरी बना रखी है। यहां भी सिर्फ सपा की कैंडिडेट ही नजर आती हैं, जिनके फॉलोवर्स 50 हजार से ज्यादा हैं। वहीं, बीजेपी कैंडिडेट ने अप्रैल 2023 यानि हाल में ही अपनी ट्विटर प्रोफाइल बनाई है। कांग्रेस, बसपा और आप के कैंडिडेट्स तो इस पर ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।

एक ही नाम के कई ऑप्शन

ट्विटर की बात करें तो यहां अब तक जेनविन प्रोफाइल की पहचान ब्लू चेकमार्क से हो जा रही थी, लेकिन अब ब्लू चेकमार्क हटने के बाद से ही एक ही नाम के ढेरों ऑप्शन नजर आने लगे हैं। ऐसे में अपने कैंडिडेट के बारे में जानकारी करने की चाह रखने वाले वोटर्स के पास सिर्फ दो ऑप्शन हैं। या तो उसे अपने कैंडिडेट का ट्विटर हैंडल मालूम हो या फिर वह उस नाम की हर एक प्रोफाइल को चेक करे और इसके बाद किसी नतीजे पर पहुंचे।