कानपुर (दिव्यांश सिंह)। उप्र सरकार पूरे प्रदेश में वृक्षारोपण अभियान चला रही है। कोशिश है कि यूपी का हर कोना पेड़ पौधों से हरा भरा हो। वहीं, आपकी सिटी में सीएसएयू को हरियाली और खेतीबाड़ी के धुरंधर तैयार करने वाली यूनिवर्सिटी के नाम पर जाना जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जो वैज्ञानिक हरियाली से फायदे बताते हैैं। उसी संस्थान के कुछ वैज्ञानिक मौका देखते ही हरे भरे पेड़ों को कटवाने का काम भी करते हैैं। इतना ही नहीं पकड़े जाने पर उन पर एक्शन करने वाले अफसर भी फाइल को आफिस के किसी कोने में दबा देते हैैं। ताजा मामला कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) थरियांव फतेहपुर का है। जहां पर केवीके अध्यक्ष और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ। अरविंद कुमार सिंह और वैज्ञानिक डॉ। नौशाद आलम को मई महीने में केवीके में 112 हरे पेड़ कटवाने के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। सूत्रों ने बताया कि दोनों वैज्ञानिकों ने पेड़ों को कटवाने के बाद लकड़ी को महंगे दामों में बेच दिया। दोनों को पेड़ कटने के मामले में दोषी पाए जाने के दो महीने बाद भी एक्शन की फाइल को ठंडे बस्ते मेें डाल दिया गया। शुरुआती जांच के दौरान दोनों वैज्ञानिकों को फतेहपुर से हटाकर अलग अलग केवीके अटैच किया गया है।

क्या है पूरा मामला
अप्रैल महीने के अंत में सीएसए के तत्कालीन कार्यवाहक वीसी डॉ बिजेंद्र सिंह को सूचना मिली कि केवीके थरियांव फतेहपुर मेें वैज्ञानिकों ने 200 से ज्यादा हरे पेड़ों को कटवाकर बेच दिया गया है। शुरुआती जांच के बाद डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एंड मॉनिटरिंग (डैम) डॉ। नौशाद खान ने आठ मई 2023 को आदेश जारी करते हुए लिखा कि डॉ। अरविंद कुमार सिंह और डॉ। नौशाद आलम को विभिन्न प्रकार के 112 पेड़ कटवाने के प्रकरण में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। विस्तृत जांच के लिए निदेशक कृषि प्रयोग केंद्र की अध्यक्षता में सीएसए के शाकभाजी अनुभाग के प्राध्यापक डॉ। राम प्यारे, हार्टिकल्चर के एचओडी डॉ। विवेक कुमार त्रिपाठी और भूमि संरक्षण एवं जल प्रबंध विभाग के प्रोफेसर डॉ। सर्वेश कुमार की चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई है जो कि 15 दिन के भीतर वीसी को रिपोर्ट करेगी।

दो महीने बाद भी मामला ठंडे बस्ते में
पेड़ कटवाने के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के दो महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी दोषी वैज्ञानिकों पर कोई एक्शन नहीं लिया गया है। डैम ने आठ मई को एक दूसरा आदेश जारी करके डॉ। अरविंद कुमार सिंह को केवीके अलीगढ़ और डॉ। नौशाद आलम को केवीके फिरोजाबाद से अटैच किया गया है। सीएसए के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जांच समिति के निरीक्षण में सदस्यों को पेड़ों के ठूंठ और कटने के प्रमाण मिले हैैं। दोनों वैज्ञानिकों को बचाने के चलते रिपोर्ट को दबाया जा रहा है।

पूर्व वीसी के खास थे डॉ। अरविंद
पेड़ कटवाने के आरोपी डॉ अरविंद कुमार सिंह सीएसए के पूर्व वीसी डॉ डीआर सिंह के खास थे। उनके कार्यकाल में डॉ। अरविंद के पास डायरेक्ट्रेट आफ एक्सटेंशन के कोआर्डिनेटर पद की जिम्मेदारी थी और डायरेक्टर का पद खाली रहा है। उस कार्यकाल में डॉ। अरविंद ने जमकर मलाई काटी है। इनके ऊपर शासन से भी कई जांचे लंबित हैैं।

वरिष्ठ वैज्ञानिक को बना दिया विषय वस्तु विशेषज्ञ
सीएसए में अगर किसी वैज्ञानिक पर एक्शन लिया जाता है तो उसमें नियम कानूनों को ताक में रख दिया जाता है। केवीके रायबरेली की अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ। नीलिमा कुंवर को फसल अवशेष प्रबंधन योजना की गाइडलाइन में विचलन को दोषी पाए जाने पर एक्शन लिया गया है। डैम डॉ। नौशाद खान ने एक्शन करते हुए उनका ट्रांसफर केवीके कासगंज में विषय वस्तु विशेषज्ञ के पद पर कर दिया गया जो कि डिमोशन की श्रेणी में आता है। जबकि किसी वरिष्ठ वैज्ञानिक या प्रोफेसर के डिमोशन के लिए बोर्ड की सहमति आवश्यक है। डॉ। कुंवर का कहना है कि उन्होंने कोई गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं किया है। वह वीसी और शासन के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखेंगी।

बोले जिम्मेदार


जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट को सौंप दिया है। रिपोर्ट कल तक मेरे पास आ जाएगी। उसी के आधार पर दो से तीन में एक्शन लिया जाएगा। इस बारिश में सीएसए की ओर से 50 हजार पौधे रोपे भी गए हैैं।
डॉ आनंद कुमार सिंह, वीसी, सीएसए

हरे पेड़ कटवाने के मामले में डॉ। अरविंद कुमार सिंह और डॉ नौशाद आलम को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। मामले की विस्तृत जांच के लिए कमेटी बनाई गई। आगे का एक्शन वीसी के स्तर से लिया जाएगा। वहीं डॉ नीलिमा कुंवर का डिमोशन नहीं किया गया है। उनकी भर्ती विषय वस्तु विशेषज्ञ के पद पर ही है। बीते सालों में कैरियर एडवांस्डमेंट स्कीम के तहत वह प्रोफेसर के ग्रेड पे तक पहुंच गई हैैं। उनका ग्रेड पे कम नहीं होगा।
डॉ नौशाद खान, डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एंड मानिटरिंग, सीएसए

हरे पेड़ कटवाने मेें मामले मेें कमेटी बनाई गई थी। उस पर आगे का एक्शन रिपोर्ट के आधार पर वीसी के लेबल से होगा। डॉ नीलिमा का डिमोशन नहीं किया गया है, उनका ग्रेड पे भी कम नहीं होगा।
डॉ आरके यादव, डायरेक्टर एक्सटेंशन, सीएसए