कानपुर (ब्यूरो)। कानपुराइट्स की प्यास बुझाने के लिए गवर्नमेंट ने जेएनएनयूआरएम में पानी की तरह पैसा बहाया गया, लेकिन आज भी लोग प्यासे हैं। रोड पर फौव्वारे छूटते हैं, लेकिन घरों तक ड्रिकिंग वॉटर नहीं पहुंच रहा है। कुल मिलाकर जेएनएनयूआरएम स्कीम करप्शन, मनमानी और लापरवाही की भेंट चढ़ गई। हालांकि इसको लेकर जलनिगम के आला ऑफिसर एक्शन में हैं। पहले ही जलनिगम के रिटायर सहित 24 इंजीनियर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। इधर नोटिस के बावजूद कांट्रैक्टर कम्पनी के अधूरे कार्य पूरा करने का काम शुरू न करने पर कांट्रैक्टर कम्पनी की बैंक गारंटी जब्त कर ली गई है। इसके अलावा कम्पनी के खिलाफ आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।


869 करोड़ के प्रोजेक्ट पास किए थे
दरअसल सेंट्रल गवर्नमेंट की स्कीम जवाहर लाल अरबन रिन्यूवल मिशन के अंर्तगत गंगा का पानी ट्रीटकर घर-घर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई। इस स्कीम के अन्र्तगत ड्रिकिंग वाटर पार्ट वन व टू मिलाकर 869 करोड़ के प्रोजेक्ट पास किए गए। इस स्कीम के तहत गंगा बैराज के पास 200-200 एमएलडी के दो और गुजैनी में 28.5 एमएलडी का एक नया वॉटर ट््रीटमेंट प्लांट बनाया गया। इसके साथ ही पहले से बने जलकल के 200 व 28.5 प्लांट का रेनोवेशन किया गया। गंगा बैराज से साउथ व नार्थ सिटी में पानी पहुंचाने के लिए डीप वॉटर लाइन, ओवरहेड टैंक, रिजरवायर, जोनल पम्पिंग स्टेशन बनाने आदि कार्य हुए।


कानपुराइट्स को नहीं मिला फायदा
ड्रिकिंग वाटर प्रोजेक्ट्स पर करीब 8.7 अरब रुपए खर्च होने के बावजूद कानपुराइट्स को पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। घटिया पाइपों से पानी के फव्वारे छूटने लगे। घरों तक ड्रिकिंग वॉटर पहुंचने के बजाए रोड पर ही पानी बहा करता है। अब तक जेएनएनयूआरएम के अंर्तगत पड़ी लाइनों में 800 से अधिक लीकेज हो चुके हैं। जलनिगम के प्रोजेक्ट इंजीनियर अजमल हुसैन ने बताया कि लाइन लीकेज की वजह से 8 में से दो ही पम्प चलाए जाते हैं। इसके अलावा वॉटर लाइनों में गैप, डैमेज होने आदि वजहों से एक दर्जन से अधिक ओवरहेड टैंक तक पानी ही नहीं पहुंच रहा है। लाखों लोगों को अभी नलों से फौव्वारे छूटने का इंतजार है। हाल ये है कि नगर निगम एरिया में 600 एमएलडी ड्रिकिंग वॉटर की जरूरत है, जबकि ट्यूववेल आदि को मिलाकर 448 एमएलडी ड्रिकिंग वॉटर सप्लाई हो रहा है। वहीं सिटी में बने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की कैपेसिटी 937 एमएलडी है। शायद इन्हीं हालातों की वजह से शासन के सख्त तेवर अपनाने के जलनिगम के 24 इंजीनियर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बावजूद इसके कांट्रैक्टर कम्पनी के अधूरे कार्य पूरे न करने पर जलनिगम इंजीनियर्स को हैदराबाद भेजकर उसकी 23 करोड़ बैंक गारंटी जब्त कर ली है। हालांकि कम्पनी भी डिसीजन के खिलाफ कोर्ट चली गई है।


&& पाइपलाइन में कई जगह गैप हैं, जिसके कारण वॉटर सप्लाई नहीं हो पा रही है। अधूरे कार्य पूरे करने की कांट्रैक्टर कम्पनी को नोटिस दी गई थी, काम शुरूआत न उसकी 23 करोड़ बैंक गारंटी जब्त कर ली गई है। आगे की अन्य कार्रवाई भी की जाएगी.&य&य
-- सुनील तिवारी, प्रोजेक्ट मैनेजर, जलनिगम गंगाबैराज यूनिट

डिमांड के मुताबिक वॉटर सप्लाई नहीं
टोटल सरफेस वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट -937 एमएलडी
ड्रिकिंग वॉटर की डिमांड-- 594.9 एमएलडी
सप्लाई हो रहा है ड्रिकिंग वॉटर--448.4 एमएलडी
(डिटेल जलनिगम के मुताबिक, नगर निगम एरिया में 34.49 लाख पापुलेशन के अनुसार)

ड्रिकिंग वॉटर प्रोजेक्ट(जेएनएनयूआरएम)
पाइप लाइन
पास पाइप लाइन -- 2066.22 किमी।
एग्जिक्यूटेड-- 1827.24 किमी।
कमिश्नड-- 971.33 किमी।
हैंडओवर -- 370

ओवरहेड टैंक
पास हुए ओवरहेड टैंक--45
एग्जिक्यूटेड-- 45
कमिश्नड-- 36
हैंडओवर-- 19

जेएडपीएस
पास हुए जेएडपीएस-- 85
एग्जिक्यूटेड-- 82
कमिश्नड-- 71
हैंडओवर-- 47
(जलनिगम के मुताबिक)