- जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के रेडियोडायग्नोसिस डिपार्टमेंट में लीवर, किडनी, बिलियरी,एप्सिस से जुड़े कई प्रोसीजर शुरू

- पहले इलाज के लिए करना पड़ता था तगड़ा खर्च, एसजीपीजीआई, केजीएमयू लखनऊ के भी लगाने पड़ते थे चक्कर

KANPUR: लीवर और किडनी में फोड़ा बन गया हो या फिर पेट में कोई नस कट गई हो ब्लीडिंग हो रही हो। इन सबके इलाज के लिए या तो गैस्ट्रो और नेफ्रो के विशेषज्ञ के पास जाना पड़ता है या फिर किसी सर्जन से इलाज कराना पड़ता है, लेकिन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के रेडियोडायग्नोसिस डिपार्टमेंट में डॉक्टर्स ने इंटरवेंशनल रेडियोडायग्नोस्टिक के जरिए इसका आसान इलाज शुरू कर दिया है। हर रोज डिपार्टमेंट के माइनर ओटी में गाइडेड अल्ट्रासाउंड के जरिए ऐसे प्रोसीजर किए जा रहे हैं। जिसके लिए प्राइवेट अस्पतालों में हजारों रुपए खर्च करने पड़ते हैं।

माइनर ओटी में शुरू हुए प्रोसीजर

एलएलआर हॉस्पिटल में स्थित रेडियोडायग्नोसिस विभाग में ही एक माइनर ओटी बनाया गया है। जिसमें सीआर्म के साथ ही गाइडेड अल्ट्रासाउंड की फेसेलिटी है। विभाग के हेड डॉॅ। अशोक वर्मा ने इंटरवेंशनल प्रोसीजर शुरू किए हैं। जिसमें वह एंजियोग्राफी अल्ट्रासाउंड के जरिए पतली निडिल के जरिए किडनी से होने वाली ब्लीडिंग को नस में ग्लू लगा कर ब्लॉक कर दिया जाता है। इसमें सिर्फ आधे घंटे का वक्त लगता है। इसके अलावा एप्सिस या लीवर में फोड़ा होने पर अल्ट्रासाउंड गाइडेड प्रोसीजर कर फोड़े के पास एक कैथेटर डाल दिया जाता है। जिससे मवाद या पस कैथेटर से धीरे धीरे निकल जाता है और पेशेंट को दो से तीन दिन में ही इलाज मिल जाता है। इसके अलावा जटिल जगहों पर बॉयोप्सी के लिए भी अल्ट्रासाउंड गाइडेड प्रोसीजर किए जाते हैं। इसके लिए अलग से कोई फीस नहीं है।

ओटी अपग्रेडेशन का भेजा प्रपोजल

डॉ.अशोक वर्मा बताते हैं कि माइनर ओटी को अपग्रेड करने के लिए प्रपोजल दिया है। जिसमें नई सी आर्म के साथ कई उपकरणों की मांग की है। इसके साथ ही प्रोसीजर में मदद के लिए एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट से भी सहयोग ले रहे हैं, क्योंकि कुछ प्रोसीजर में लोकल एनेस्थीसिया की भी जरूरत पड़ती है।

कानपुर में नहीं होते ऐसे प्रोसीजर

कानपुर में इंटरवेंशनल रेडियोडायग्नोसिस के प्रोसीजर ज्यादा नहीं होते। क्योंकि ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती है। इसके लिए कई बार लोगों को एसजीपीजीआई या किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल में जाना पड़ता है। पीजीआई में भी इन प्रोसीजर के लिए 30 से 50 हजार रुपए का खर्च आता है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में इस तरह के प्रोसीजर के लिए 80 से एक लाख रुपए तक खर्च करने पड़ते हैं।

इंटरवेंशनल रेडियोडायग्नोस्टिक में कौन कौन हा ट्रीटमेंट-

- एप्सिस, यूरिन के रास्ते ब्लड आना, सर्जरी के दौरान पेट में किसी नस का कट जाना, लीवर में फोड़ा बन जाना, किडनी और बिलियरी में बायोप्सी के लिए सैंपलिंग।

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वर्जन-

इंटरवेंशनल प्रोसीजर किए जा रहे हैं। सीमित संसाधन होने की वजह से इनकी संख्या अभी कम है। संसाधनों के लिए प्रस्ताव भेजा है। इन छोटे छोटे प्रोसीजर में पेशेंट्स को राहत जल्दी मिलती है।

- डॉ.अशोक वर्मा, एचओडी, रेडियोडायग्नोसिस डिपार्टमेंट, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज