- चुन्नीगंज में बना केंद्रीय राजकीय पुस्तकालय अब ई-पुस्तकालय बनेगा

- माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से ई-लाइब्रेरी बनाने का पूरा किया प्रॉसेस

- 67 साल बाद, राजकीय पुस्तकालय अब ई-लाइब्रेरी

- 400 किताबों से हुई थी शुरुआत, अब 65 हजार किताबें

KANPUR: किताबें हमारी च्च्छी दोस्त होती है। यदि आप भी बुक लवर हैं तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है। अब आप एक क्लिक करके हजारों किताबें घर बैठे ही पढ़ सकेंगे। दरअसल, चुन्नीगंज में बना केंद्रीय राजकीय पुस्ताकलय अब ई-लाइब्रेरी में तब्दील हो रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से इस पुस्तकालय को ई-पुस्तकालय बनाने के लिए सभी तरह की कवायद पूरी हो गई हैं।

नए सेशन से मिलेगा फायदा

डिपार्टमेंट के आफिसर्स का कहना है, कि अब जैसे ही सेशन की शुरुआत होगी तो इस लाइब्रेरी में मौजूद हजारों किताबों को स्टूडेंट्स और टीचर एक क्लिक पर पढ़ सकेंगे। पिछले कई सालों से इसे ई-पुस्तकालय बनाने की दिशा में कवायद चल रही थी।

1954 में बना था

मौजूदा समय में लाइब्रेरी की देखरेख कर रहे राजकीय इंटर कॉलेज चुन्नीगंज के वरिष्ठ प्रवक्ता अशफाक अहमद खान ने बताया कि वर्ष 1954 में इस लाइब्रेरी की जब स्थापना हुई थी, तब यहां महज 400 किताबें थीं। हालांकि इस समय किताबों की संख्या बढ़कर 65000 पहुंच चुकी हैं। इन किताबों में साहित्य, राजनीति, ¨हदी, अंग्रेजी समेत कई अन्य विषयों की सभी किताबें उपलब्ध हैं।

500 रुपये है मेंबरशिप की फीस

इस लाइब्रेरी के लिए सदस्यता शुल्क 500 रुपये रहता है, जोकि तीन वर्षों के लिए मान्य है। स्टूडेंट, टीचर और अन्य कोई भी जन इस लाइब्रेरी की सदस्यता ले सकते हैं।

कौन-कौन से सब्जेक्ट की किताबें

- साहित्य

- राजनीति

- ¨हदी

- इंग्लिश

- अन्य